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Aadhaar Selective Sharing: पूरी पहचान नहीं, अब सिर्फ ज़रूरत की जानकारी साझा होगी | जानिए कैसे बदलेगा डिजिटल सुरक्षा का खेल

Aadhaar Selective Sharing: डेटा प्राइवेसी की दिशा में बड़ा कदम

नई दिल्ली। डिजिटल युग में पहचान सबसे बड़ी ताकत भी है और सबसे बड़ी चुनौती भी। आधार आज देश के करोड़ों नागरिकों की पहचान का सबसे अहम दस्तावेज बन चुका है—चाहे बैंक खाता खुलवाना हो, सरकारी योजनाओं का लाभ लेना हो या मोबाइल सिम लेना। लेकिन इसके साथ-साथ डेटा प्राइवेसी और जानकारी के दुरुपयोग को लेकर चिंताएं भी लगातार बढ़ती रही हैं।

इन्हीं चिंताओं के समाधान की दिशा में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार ऐप में एक अहम सुविधा ‘Selective Sharing’ पेश की है। यह फीचर नागरिकों को अपनी पहचान पर पूरा नियंत्रण देता है।


क्या है Selective Sharing फीचर?

Selective Sharing का सीधा मतलब है—
पूरी जानकारी साझा करने की बजाय, सिर्फ उतनी ही जानकारी देना जितनी जरूरी हो।

अब तक कई बार ऐसा होता था कि किसी छोटे से वेरिफिकेशन के लिए भी पूरा आधार विवरण देना पड़ता था। इससे आधार नंबर, जन्मतिथि और अन्य संवेदनशील जानकारियां जोखिम में आ जाती थीं।

Selective Sharing फीचर के जरिए यूज़र तय कर सकते हैं कि—

  • केवल नाम साझा करना है
  • सिर्फ उम्र या जेंडर बताना है
  • या केवल पता

यानि, “Need to Know Basis” पर ही जानकारी साझा होगी।


क्यों जरूरी था यह फीचर?

बढ़ते साइबर खतरे

डिजिटल लेन-देन और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ने के साथ साइबर फ्रॉड, फिशिंग और डेटा लीक के मामले भी बढ़े हैं। कई बार लोग अनजाने में पूरा आधार विवरण साझा कर देते हैं, जिसका गलत इस्तेमाल हो सकता है।

न्यूनतम जानकारी का सिद्धांत

दुनिया भर में डेटा सुरक्षा का एक अहम सिद्धांत है—
Minimal Data Sharing
UIDAI का यह कदम इसी वैश्विक मानक के अनुरूप है।

नागरिकों में भरोसा बढ़ाना

आधार को लेकर सबसे बड़ी चिंता हमेशा यही रही है—
“मेरी जानकारी कितनी सुरक्षित है?”
Selective Sharing इस सवाल का ठोस जवाब देता है।


कैसे काम करता है Selective Sharing?

UIDAI के अनुसार यह सुविधा पूरी तरह Consent-Based है।
इसका मतलब—

  • बिना आपकी अनुमति कोई भी जानकारी साझा नहीं होगी
  • आप खुद तय करेंगे कि कौन-सी जानकारी दिखे

आधार ऐप में QR-Code या डिजिटल शेयरिंग के जरिए सीमित डेटा ही वेरिफायर को मिलेगा।

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बैंकिंग और सरकारी सेवाओं में क्या बदलेगा?

बैंक और वित्तीय संस्थान

अब बैंक KYC के दौरान केवल जरूरी विवरण ही देख पाएंगे। इससे आधार नंबर के दुरुपयोग की संभावना घटेगी।

सरकारी योजनाएं

राशन कार्ड, छात्रवृत्ति, पेंशन जैसी योजनाओं में सिर्फ पात्रता से जुड़ी जानकारी साझा होगी।

निजी सेवाएं

होटल, यात्रा, मोबाइल सिम जैसी सेवाओं में भी पूरी पहचान साझा करने की मजबूरी खत्म होगी।


ग्रामीण भारत के लिए क्यों अहम?

ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग आधार को लेकर पूरी जानकारी देने में संकोच करते हैं, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण वे जोखिम उठा लेते हैं।

Selective Sharing—

  • ग्रामीण नागरिकों को सुरक्षित बनाएगा
  • डिजिटल सेवाओं में उनका भरोसा बढ़ाएगा
  • फर्जीवाड़े की संभावना घटाएगा

यह डिजिटल साक्षरता को भी बढ़ावा देगा।


डिजिटल इंडिया मिशन से कैसे जुड़ा है यह कदम?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के Digital India विज़न का मूल उद्देश्य है—

तकनीक को सुरक्षित, सुलभ और भरोसेमंद बनाना

Selective Sharing इसी सोच का व्यावहारिक रूप है। यह दिखाता है कि सरकार अब सिर्फ डिजिटल सेवाएं नहीं, बल्कि डिजिटल अधिकार भी सुनिश्चित कर रही है।


यूज़र को क्या करना चाहिए?

UIDAI ने नागरिकों से अपील की है कि वे—

  • आधिकारिक Aadhaar App डाउनलोड करें
  • अनधिकृत ऐप्स और वेबसाइट से बचें
  • आधार की पूरी जानकारी अनावश्यक रूप से साझा न करें

फीडबैक और सुझाव

यूज़र अपने अनुभव और सुझाव भेज सकते हैं—
📧 feedback.app@uidai.net.in


आगे क्या?

विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में UIDAI—

  • और ज्यादा कस्टमाइज्ड शेयरिंग विकल्प लाएगा
  • डेटा ट्रैकिंग और अलर्ट सिस्टम को मजबूत करेगा
  • आधार को पूरी तरह यूज़र-कंट्रोल्ड डिजिटल पहचान बनाएगा

Selective Sharing फीचर सिर्फ एक तकनीकी अपडेट नहीं, बल्कि यह नागरिकों के डिजिटल अधिकारों की सुरक्षा का प्रतीक है।
अब आधार सिर्फ पहचान नहीं, बल्कि सुरक्षित पहचान बन रहा है।

कम जानकारी साझा करना—
✔ ज्यादा सुरक्षा
✔ ज्यादा भरोसा
✔ ज्यादा नियंत्रण

यही है आधार का नया डिजिटल अवतार।

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