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हरिद्वार: अमित शाह ने गुरुकुलम और शांतिकुंज से दिया संस्कृति व राष्ट्र निर्माण का संदेश

गुरुकुल से शांतिकुंज तक: अमित शाह ने बताया भारतीय संस्कृति को राष्ट्र पुनर्निर्माण की आत्मा

हरिद्वार।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हरिद्वार दौरे का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू भारतीय संस्कृति, शिक्षा और आध्यात्मिक चेतना से जुड़ा रहा। उन्होंने पतंजलि गुरुकुलम और गायत्री तीर्थ शांतिकुंज का दौरा कर भारतीय परंपरा को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया।

अमित शाह ने कहा कि भारत की शक्ति उसकी संस्कृति, संस्कार और जीवन दर्शन में निहित है। यदि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ा जाए तो भारत न केवल स्वयं सशक्त बनेगा, बल्कि विश्व को भी मार्गदर्शन देगा।

पतंजलि गुरुकुलम: आधुनिक युग का प्राचीन मॉडल

पतंजलि गुरुकुलम में शिक्षकों और विद्यार्थियों से संवाद करते हुए अमित शाह ने कहा कि यह संस्थान भारतीय मूल्य-आधारित शिक्षा का जीवंत उदाहरण है। यहाँ विद्यार्थी केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि योग, प्राणायाम, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का अभ्यास भी कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आज की शिक्षा प्रणाली में जहाँ केवल डिग्री पर जोर है, वहीं गुरुकुल परंपरा चरित्र निर्माण पर बल देती है। यही राष्ट्र निर्माण की असली नींव है।

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शांतिकुंज और अखंड ज्योति का महत्व

अमित शाह ने हरिद्वार स्थित गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में 100 वर्षों से प्रज्ज्वलित अखंड ज्योति के दर्शन किए। उन्होंने कहा कि यह ज्योति पं. श्रीराम शर्मा आचार्य और माता भगवती देवी शर्मा के उस संकल्प का प्रतीक है, जिसमें व्यक्ति निर्माण को राष्ट्र निर्माण का आधार माना गया।

उन्होंने कहा कि ‘हम बदलेंगे, युग बदलेगा’ का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना दशकों पहले था।

गायत्री परिवार का सामाजिक योगदान

अमित शाह ने कहा कि अखिल विश्व गायत्री परिवार ने शिक्षा, सेवा, संस्कृति और राष्ट्र चेतना के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान दिया है। आपदा, संकट या सामाजिक आवश्यकता—हर अवसर पर गायत्री परिवार सेवा कार्यों में आगे रहा है।

उन्होंने कहा कि भारतीय शास्त्रों और परंपराओं को वैज्ञानिक और तर्कपूर्ण तरीके से जन-जन तक पहुँचाने का कार्य पं. श्रीराम शर्मा आचार्य का ऐतिहासिक योगदान है।

भारतीय परंपरा और वैश्विक समाधान

अमित शाह ने कहा कि आज विश्व जिन समस्याओं—तनाव, हिंसा, पर्यावरण संकट और नैतिक पतन—से जूझ रहा है, उनका समाधान भारतीय दर्शन में निहित है। योग, संयम, सेवा और संतुलन ही भविष्य का मार्ग है।

 

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