
MGNREGA Bachao Sangram: कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल का राजभवन मार्च, पीएम मोदी से माफ़ी की मांग
कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, डीके शिवकुमार और रणदीप सुरजेवाला के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राजभवन पहुंचकर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री से माफी की मांग की।
‘MGNREGA बचाओ संग्राम’: कर्नाटक में कांग्रेस का राजभवन मार्च, पीएम मोदी से माफ़ी की मांग
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को लेकर कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ‘MGNREGA बचाओ संग्राम’ के तहत मंगलवार को कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, एआईसीसी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला, और केपीसीसी अध्यक्ष एवं उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व में कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल राजभवन पहुंचा।
प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल थे। इस दौरान राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करोड़ों श्रमिकों से सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगने की मांग की गई।
मनरेगा कानून पर हमला करने का आरोप
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने मनरेगा कानून पर लगातार हमले किए हैं और इससे ग्रामीण मजदूरों के रोजगार और आजीविका सुरक्षा के अधिकार को कमजोर किया गया है। ज्ञापन में कहा गया कि यह योजना ग्रामीण गरीबों के लिए सुरक्षा कवच है, लेकिन मोदी सरकार की नीतियों के चलते इसे धीरे-धीरे खोखला किया जा रहा है।
बजट कटौती और भुगतान में देरी पर नाराज़गी
कांग्रेस ने मनरेगा को कमजोर करने के लिए सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। पार्टी ने कहा कि
- अपर्याप्त बजटीय आवंटन,
- मजदूरी भुगतान में लगातार देरी,
- तकनीक का मनमाना इस्तेमाल,
- और प्रशासनिक अड़चनें
श्रमिकों को उनके कानूनी अधिकार और मेहनत की मजदूरी से वंचित कर रही हैं।
“ग्रामीण गरीबों के अधिकारों से समझौता नहीं”
कांग्रेस पार्टी ने दो टूक शब्दों में कहा कि वह उस कानून को कमजोर होते हुए खामोश नहीं देखेगी, जिसे ग्रामीण गरीबों की सुरक्षा और सम्मानजनक रोजगार के लिए बनाया गया था। पार्टी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया, तो देशभर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
राजनीतिक संघर्ष और तेज होने के संकेत
मनरेगा को लेकर कांग्रेस का यह आंदोलन ऐसे समय में सामने आया है, जब रोजगार, महंगाई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज हो रही है। माना जा रहा है कि MGNREGA बचाओ संग्राम आने वाले दिनों में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।











