
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अयोध्या में श्रीराम यंत्र की स्थापना की, रामलला के किए दर्शन
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर में पूजा कर श्रीराम यंत्र की स्थापना की, रामराज्य के आदर्शों पर दिया संदेश।
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अयोध्या: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राम जन्मभूमि मंदिर में किए दर्शन, श्रीराम यंत्र की स्थापना
अयोध्या, 20 मार्च 2026। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पावन अयोध्या धाम में स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन-पूजन किया और विशेष अवसर पर श्रीराम यंत्र की स्थापना की। इस दौरान मंदिर परिसर में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
भव्य स्वागत के साथ हुआ आगमन
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अयोध्या आगमन पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने उनका स्वागत किया।
श्रीराम यंत्र की स्थापना और आरती
राष्ट्रपति ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र की स्थापना की और रामलला के दिव्य विग्रह के समक्ष पूजा-अर्चना कर आरती की। उन्होंने प्रभु श्रीराम से देशवासियों की सुख-समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना की।
अयोध्या को बताया परम सौभाग्य
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि “प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या की पवित्र धूलि का स्पर्श प्राप्त करना मेरा परम सौभाग्य है। स्वयं भगवान श्रीराम ने अपनी इस जन्मभूमि को स्वर्ग से भी श्रेष्ठ बताया था।”
राम मंदिर से जुड़ी ऐतिहासिक तिथियां
उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का भूमिपूजन, रामलला की प्राण प्रतिष्ठा, राम दरबार का भक्तों के लिए खुलना और मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजारोहण—ये सभी तिथियां भारत के इतिहास और संस्कृति की स्वर्णिम उपलब्धियां हैं।
रामराज्य के आदर्शों पर राष्ट्र निर्माण
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि देश आज एक समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र की दिशा में आगे बढ़ रहा है और प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से वर्ष 2047 या उससे पहले ही भारत अपने लक्ष्यों को प्राप्त करेगा।
उन्होंने कहा कि रामराज्य के आदर्शों पर चलकर हम नैतिकता और धर्माचरण पर आधारित राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।
देव-भक्ति और देश-भक्ति का संदेश
राष्ट्रपति ने सभी देशवासियों से ‘घट-घट व्यापी राम’ के भाव के साथ एकजुट होकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश का पुनर्जागरण आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सभी आयामों में हो रहा है और देव-भक्ति तथा देश-भक्ति का मार्ग एक ही है।












