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लोकसभा में फंड रिलीज पर घमासान: केरल और तमिलनाडु को कम फंड देने के आरोप पर कांग्रेस का सवाल

लोकसभा में फंड रिलीज पर घमासान: केरल और तमिलनाडु को कम फंड देने के आरोप पर कांग्रेस का सवाल

नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट

लोकसभा में एक बार फिर केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संबंधों को लेकर बहस तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी की ओर से सांसद मणिकम टैगोर ने केंद्र सरकार से सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि राज्यों को आवंटित फंड और वास्तविक रूप से जारी की गई राशि के बीच बड़ा अंतर देखा जा रहा है।

उन्होंने विशेष रूप से केरल और तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कहा कि इन राज्यों को आवंटित राशि पूरी तरह से जारी नहीं की जा रही है, जिससे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर असर पड़ रहा है।

केरल के आंकड़ों को लेकर सवाल

लोकसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, केरल राज्य को वर्ष 2021-22 में लगभग 22,559 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था। हालांकि, वर्ष 2025-26 तक यह राशि घटकर लगभग 3,332 करोड़ रुपये रह गई है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस आवंटित राशि में से भी केवल लगभग 1,064 करोड़ रुपये ही वास्तव में जारी किए गए हैं। कांग्रेस ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए सरकार से जवाब मांगा है।

प्रमुख क्षेत्रों पर असर

कांग्रेस के अनुसार, इस कमी का असर कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर पड़ रहा है:

  • शहरी स्थानीय निकाय
  • स्वास्थ्य सेवाएं
  • आपदा प्रबंधन

इन क्षेत्रों में या तो आंशिक रूप से फंड जारी किए गए हैं या फिर बिल्कुल भी राशि नहीं दी गई है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

तमिलनाडु ने भी जताई चिंता

तमिलनाडु राज्य ने भी केंद्र सरकार के फंड ट्रांसफर को लेकर लगातार चिंता व्यक्त की है। राज्य का कहना है कि केंद्र से मिलने वाली राशि में कमी आई है और साथ ही कई शर्तें भी सख्त कर दी गई हैं।

राज्य सरकार का यह भी आरोप है कि वित्तीय सहायता के लिए जो शर्तें तय की गई हैं, वे विकास कार्यों में बाधा बन रही हैं।

कांग्रेस का सीधा सवाल

सांसद मणिकम टैगोर ने लोकसभा में सरकार से सीधा सवाल किया कि क्या केंद्र सरकार राज्यों को फंड जारी करने में जानबूझकर देरी कर रही है या फिर विभिन्न शर्तों के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से फंड को सीमित किया जा रहा है।

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उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसा नहीं है, तो सरकार को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि आवंटित राशि पूरी तरह से जारी क्यों नहीं की जा रही है।

केंद्र-राज्य संबंधों पर असर

यह मुद्दा केवल वित्तीय नहीं बल्कि संघीय ढांचे से भी जुड़ा हुआ है। भारत में केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है।

यदि राज्यों को समय पर पर्याप्त फंड नहीं मिलता है, तो इससे उनके विकास कार्यों पर असर पड़ सकता है और जनता को भी इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।

सरकार की संभावित स्थिति

हालांकि सरकार की ओर से इस मुद्दे पर विस्तृत जवाब का इंतजार है, लेकिन संभावना है कि सरकार फंड जारी करने की प्रक्रिया, शर्तों और प्राथमिकताओं को लेकर स्पष्टीकरण दे सकती है।

सरकार यह भी बता सकती है कि फंड रिलीज में देरी के पीछे तकनीकी या प्रशासनिक कारण हो सकते हैं।

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि फंड आवंटन और रिलीज के बीच अंतर कई कारणों से हो सकता है, जैसे कि परियोजनाओं की प्रगति, रिपोर्टिंग में देरी या शर्तों का पालन न होना।

हालांकि, लगातार बढ़ते अंतर से यह सवाल जरूर उठता है कि क्या प्रणाली में सुधार की जरूरत है।

राज्यों के विकास पर प्रभाव

यदि राज्यों को समय पर फंड नहीं मिलता है, तो बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर सीधा असर पड़ता है। इससे आम जनता को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

कांग्रेस का कहना है कि इस स्थिति को तुरंत सुधारने की आवश्यकता है ताकि राज्यों को उनका पूरा अधिकार मिल सके।

लोकसभा में उठाया गया यह मुद्दा केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संबंधों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब सभी की नजरें सरकार के जवाब पर टिकी हैं कि वह इन आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण देती है।

यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले समय में सरकार किस तरह से फंड वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाती है।

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