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लोकसभा में अटकी हाउसिंग परियोजनाओं का मुद्दा: NBCC और स्वामी फंड पर सरकार से जवाब की मांग

लोकसभा में अटकी हाउसिंग परियोजनाओं का मुद्दा: NBCC और स्वामी फंड पर सरकार से जवाब की मांग

नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट

लोकसभा में देशभर में वर्षों से अटकी पड़ी हाउसिंग परियोजनाओं का मुद्दा एक बार फिर जोर-शोर से उठा। कांग्रेस पार्टी की ओर से सांसद रविंद्र चव्हाण ने इस विषय को उठाते हुए केंद्र सरकार से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि इन अधूरी परियोजनाओं के कारण लाखों आम नागरिकों को गंभीर आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सांसद ने विशेष रूप से यह मुद्दा उठाया कि घर खरीदने के लिए लोगों ने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी निवेश कर दी, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी उन्हें घर नहीं मिला। इसके चलते वे एक ओर ईएमआई भर रहे हैं और दूसरी ओर किराए के मकान में रहने को मजबूर हैं।

आम लोगों की दोहरी मार

अधूरी हाउसिंग परियोजनाओं का सबसे बड़ा असर मध्यम वर्ग और आम नागरिकों पर पड़ा है। लोग बैंक से लोन लेकर घर खरीदते हैं, लेकिन परियोजनाएं समय पर पूरी न होने के कारण उन्हें भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है।

इस स्थिति में खरीदारों को एक साथ कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है:

  • बैंक की ईएमआई का भुगतान
  • किराए के मकान का खर्च
  • मानसिक तनाव और असुरक्षा

NBCC की भूमिका पर सवाल

सांसद रविंद्र चव्हाण ने कहा कि सरकारी उपक्रम NBCC (नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन) को स्वामी फंड के माध्यम से कई अटकी परियोजनाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी दी गई थी।

हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि इन परियोजनाओं को भी RERA (रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा नहीं किया जा सका है।

ऐसे में उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या NBCC की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जाएगी और इसमें सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

स्वामी फंड क्या है?

स्वामी फंड (SWAMIH Fund) एक विशेष कोष है जिसे केंद्र सरकार ने उन हाउसिंग परियोजनाओं को पूरा करने के लिए बनाया है जो बीच में अटक गई हैं। इसका उद्देश्य है कि खरीदारों को उनका घर समय पर मिल सके।

यह फंड विशेष रूप से उन परियोजनाओं के लिए है जो आर्थिक रूप से फंसी हुई हैं लेकिन तकनीकी रूप से पूरी की जा सकती हैं।

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लोकसभा में पूछे गए प्रमुख सवाल

रविंद्र चव्हाण ने लोकसभा में सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल रखे:

  • स्वामी फंड के तहत परियोजनाओं के चयन के लिए क्या मापदंड निर्धारित किए गए हैं?
  • महाराष्ट्र के नांदेड में स्वामी फंड जारी न किए जाने के पीछे क्या कारण हैं?
  • चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?

RERA की समय सीमा पर सवाल

सांसद ने यह भी कहा कि जब परियोजनाएं RERA के तहत पंजीकृत होती हैं, तो उनके लिए समय सीमा तय होती है। लेकिन NBCC द्वारा संभाली गई परियोजनाएं भी समय पर पूरी नहीं हो पा रही हैं, जिससे खरीदारों की समस्याएं और बढ़ गई हैं।

इससे यह सवाल उठता है कि क्या वर्तमान व्यवस्था पर्याप्त प्रभावी है या इसमें सुधार की आवश्यकता है।

सरकार से राहत की मांग

कांग्रेस ने सरकार से मांग की कि ऐसे प्रभावित खरीदारों को राहत प्रदान की जाए। विशेष रूप से:

  • ब्याज में छूट या राहत
  • परियोजनाओं को जल्द पूरा करने के लिए ठोस योजना
  • खरीदारों के हितों की सुरक्षा के लिए सख्त कदम

रियल एस्टेट सेक्टर पर असर

अटकी हुई परियोजनाओं का असर केवल खरीदारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरे रियल एस्टेट सेक्टर पर पड़ता है। इससे निवेशकों का भरोसा कम होता है और नए निवेश में कमी आती है।

इसके अलावा, इससे बैंकिंग सेक्टर पर भी दबाव बढ़ता है क्योंकि लोन की वसूली प्रभावित होती है।

विशेषज्ञों की राय

रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि स्वामी फंड एक अच्छा कदम है, लेकिन इसकी कार्यप्रणाली में और सुधार की जरूरत है। परियोजनाओं के चयन और फंड के वितरण में पारदर्शिता बढ़ाने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

इसके अलावा, परियोजनाओं की निगरानी और समयबद्ध क्रियान्वयन पर भी विशेष ध्यान देना होगा।

लोकसभा में उठाया गया यह मुद्दा लाखों घर खरीदारों की पीड़ा को उजागर करता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन सवालों का क्या जवाब देती है और क्या प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।

यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक संकट का रूप भी ले सकता है।

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