राज्यसभा में बिहार के औद्योगिक पिछड़ेपन का मुद्दा: इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से विकास की उम्मीद

राज्यसभा में बिहार के औद्योगिक पिछड़ेपन का मुद्दा: इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से विकास की उम्मीद

नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट

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राज्यसभा में बिहार के औद्योगिक विकास की धीमी गति और इसके आर्थिक प्रभावों को लेकर गंभीर चर्चा देखने को मिली। कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने सदन में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि बिहार देश के विकास में अपनी क्षमता के अनुरूप योगदान नहीं दे पा रहा है, जिसका मुख्य कारण राज्य में औद्योगिक ढांचे की कमी है।

उन्होंने कहा कि बिहार की आर्थिक स्थिति और औद्योगिक विकास के बीच गहरा असंतुलन है, जिसे दूर करने के लिए केंद्र और राज्य दोनों को मिलकर ठोस कदम उठाने होंगे।

GDP में योगदान बेहद कम

अखिलेश प्रसाद सिंह ने अपने भाषण में बताया कि बिहार देश की लगभग 9 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करता है, लेकिन देश की कुल जीडीपी में उसका योगदान मात्र 3 प्रतिशत के आसपास है।

यह आंकड़ा राज्य के आर्थिक पिछड़ेपन को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

फैक्ट्रियों की संख्या में भारी कमी

उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में देश की कुल फैक्ट्रियों का केवल लगभग 1.30 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि तमिलनाडु और गुजरात जैसे राज्यों में यह संख्या 10 गुना अधिक है।

इससे यह स्पष्ट होता है कि औद्योगिक निवेश और उत्पादन के मामले में बिहार काफी पीछे है।

प्रति व्यक्ति आय में बड़ा अंतर

बिहार की प्रति व्यक्ति आय भी राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। जहां राष्ट्रीय औसत 2 लाख रुपये से अधिक है, वहीं बिहार में यह आंकड़ा लगभग 66 हजार रुपये के आसपास है।

यह अंतर राज्य के लोगों की आर्थिक स्थिति को दर्शाता है।

रोजगार के लिए पलायन

राज्य में रोजगार के अवसरों की कमी के कारण हर साल 20 लाख से अधिक लोग काम की तलाश में अन्य राज्यों की ओर पलायन करते हैं। यह स्थिति न केवल सामाजिक बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी चिंता का विषय है।

युवाओं का यह पलायन राज्य के विकास को और धीमा कर देता है।

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इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से उम्मीद

अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि अमृतसर-दिल्ली-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बिहार के लिए एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है। इस परियोजना के तहत राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है।

उन्होंने सुझाव दिया कि इस कॉरिडोर के तहत बिहार में आधुनिक टाउनशिप विकसित की जानी चाहिए, जिससे उद्योगों को आकर्षित किया जा सके।

टाउनशिप विकास की जरूरत

उन्होंने कहा कि यदि बिहार में औद्योगिक टाउनशिप विकसित की जाती हैं, तो इससे न केवल निवेश बढ़ेगा बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

इससे राज्य के युवाओं को अपने ही राज्य में काम मिलने की संभावना बढ़ेगी।

पूर्वी भारत के विकास पर जोर

कांग्रेस सांसद ने कहा कि देश के समग्र विकास के लिए पूर्वी भारत का संतुलित विकास बेहद जरूरी है। यदि बिहार जैसे राज्य पीछे रह जाते हैं, तो इसका असर पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

इसलिए सरकार को पूर्वी राज्यों के विकास पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

सरकार से मांग

अखिलेश प्रसाद सिंह ने सरकार से मांग की कि बिहार के औद्योगिक विकास के लिए विशेष पैकेज और योजनाएं लागू की जाएं।

  • इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को तेजी से लागू किया जाए
  • निवेश आकर्षित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए जाएं
  • बुनियादी ढांचे का विकास किया जाए

विशेषज्ञों की राय

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि बिहार में औद्योगिक विकास के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजली, परिवहन और नीति सुधार की आवश्यकता है।

इसके अलावा, कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देकर युवाओं को रोजगार के लिए तैयार किया जाना चाहिए।

राज्यसभा में उठाया गया यह मुद्दा बिहार के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। यदि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाती है, तो आने वाले समय में बिहार देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या निर्णय लेती है और क्या बिहार को औद्योगिक विकास की नई दिशा मिल पाती है।