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‘Pax Silica’ पर राज्यसभा में उठे सवाल: डेटा सुरक्षा और डिजिटल संप्रभुता पर कांग्रेस का केंद्र से जवाब तलब

‘Pax Silica’ पर राज्यसभा में उठे सवाल: डेटा सुरक्षा और डिजिटल संप्रभुता पर कांग्रेस का केंद्र से जवाब तलब

नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट

भारत के हाल ही में अंतरराष्ट्रीय टेक्नोलॉजी गठबंधन ‘Pax Silica’ में शामिल होने को लेकर राज्यसभा में सियासी बहस तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने इस मुद्दे को उठाते हुए केंद्र सरकार से कई अहम सवाल पूछे और डेटा सुरक्षा, डिजिटल संप्रभुता तथा नीति स्वतंत्रता को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त कीं।

उन्होंने कहा कि यह गठबंधन भले ही तकनीकी सहयोग और नवाचार के अवसर प्रदान करता हो, लेकिन इसके दीर्घकालिक प्रभावों पर व्यापक चर्चा और पारदर्शिता आवश्यक है।

Pax Silica क्या है?

Pax Silica एक अंतरराष्ट्रीय तकनीकी गठबंधन है, जिसमें प्रमुख भूमिका अमेरिका की मानी जा रही है। इस गठबंधन का उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में साझा मानक और सहयोग विकसित करना है।

हालांकि, इस पहल को लेकर यह भी आशंका जताई जा रही है कि इससे सदस्य देशों की तकनीकी नीतियों पर बाहरी प्रभाव बढ़ सकता है।

डेटा सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा में कहा कि यदि भारत इस गठबंधन के तहत साझा मानकों और सिस्टम के साथ जुड़ता है, तो यह संभावना बनती है कि भारतीय नागरिकों का डेटा विदेशी प्लेटफॉर्म या फ्रेमवर्क के माध्यम से प्रोसेस या नियंत्रित हो सकता है।

यह स्थिति देश के डेटा संरक्षण कानूनों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती है।

DPDP Act 2023 की प्रभावशीलता पर सवाल

उन्होंने पूछा कि क्या इस नई व्यवस्था के तहत भारतीय नागरिकों का निजी डेटा डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के अंतर्गत सुरक्षित रह पाएगा?

उन्होंने आशंका जताई कि यदि डेटा का नियंत्रण विदेशी ढांचे के माध्यम से होगा, तो इस कानून को लागू करना और उसकी निगरानी करना कठिन हो सकता है।

नीति स्वतंत्रता पर खतरा?

कांग्रेस नेता ने कहा कि Pax Silica में शामिल होने से भारत की दीर्घकालिक नीति स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।

विशेष रूप से निम्न क्षेत्रों में:

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  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) विकास
  • सेमीकंडक्टर रणनीति
  • डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर

उन्होंने कहा कि यदि इन क्षेत्रों में बाहरी मानकों और निगरानी का प्रभाव बढ़ता है, तो भारत की स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता सीमित हो सकती है।

सरकार से मांगी गई स्पष्ट जानकारी

दिग्विजय सिंह ने केंद्र सरकार से निम्नलिखित बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की:

  • Pax Silica में भारत की भागीदारी के नियम और शर्तें क्या हैं?
  • भारतीय नागरिकों के डेटा की सुरक्षा और संप्रभुता सुनिश्चित करने के लिए क्या उपाय किए गए हैं?
  • क्या यह समझौता भारत की स्वतंत्र नीति निर्माण क्षमता को प्रभावित करता है?
  • सरकार इस विषय पर पूरी पारदर्शिता के साथ सदन के सामने तथ्य रखे

‘डेटा नया तेल है’ – राहुल गांधी का संदर्भ

उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि 21वीं सदी के एआई युग में डेटा की भूमिका कच्चे तेल के समान है।

ऐसे में, बिना पर्याप्त शर्तों के किसी अंतरराष्ट्रीय समझौते में शामिल होना ‘डिजिटल उपनिवेशवाद’ (Digital Colonialism) की दिशा में कदम हो सकता है।

डिजिटल संप्रभुता पर बहस

यह मुद्दा अब केवल तकनीकी नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक संप्रभुता से भी जुड़ गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा आज के समय में सबसे महत्वपूर्ण संसाधन बन चुका है और इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना किसी भी देश के लिए प्राथमिकता होनी चाहिए।

विशेषज्ञों की राय

टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही डेटा लोकलाइजेशन, साइबर सुरक्षा और नीति स्वतंत्रता को भी सुनिश्चित करना चाहिए।

उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को किसी भी वैश्विक गठबंधन में शामिल होने से पहले अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखना चाहिए।

राज्यसभा में उठाया गया यह मुद्दा भारत के डिजिटल भविष्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय है। जहां एक ओर Pax Silica जैसे गठबंधन तकनीकी प्रगति के नए अवसर प्रदान कर सकते हैं, वहीं दूसरी ओर यह देश की डेटा सुरक्षा और नीति स्वतंत्रता के लिए चुनौतियां भी खड़ी कर सकते हैं।

अब यह देखना अहम होगा कि केंद्र सरकार इन चिंताओं का किस तरह जवाब देती है और क्या इस मुद्दे पर व्यापक बहस और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती है।

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