
अम्बिकापुर: निजी स्कूलों की मनमानी पर जिला शिक्षा अधिकारी सख्त, पालकों से की बड़ी अपील
"अम्बिकापुर जिला शिक्षा अधिकारी ने निजी स्कूलों द्वारा विशेष दुकानों से किताब-यूनिफॉर्म खरीदने के दबाव पर सख्त चेतावनी दी है। अभिभावकों से शिकायत दर्ज कराने की अपील।"
सावधान! निजी स्कूल नहीं कर सकते किताब-यूनिफॉर्म के लिए मजबूर: अम्बिकापुर DEO की पालकों से सीधी अपील
अम्बिकापुर: नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम कसने के लिए सरगुजा जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) अम्बिकापुर ने जिले के निजी एवं अनुदान प्राप्त विद्यालयों के प्रबंधन को सख्त चेतावनी जारी की है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि कोई भी स्कूल संचालक अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से पाठ्यपुस्तकें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।
पालकों के आर्थिक हितों की सुरक्षा सर्वोपरि
अक्सर देखा गया है कि शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही निजी स्कूल प्रबंधन और पुस्तक विक्रेताओं के बीच साठगांठ की खबरें आती हैं। इससे पालकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता है। जिला शिक्षा अधिकारी ने अपनी अपील में कहा है कि शिक्षा का अधिकार और उपभोक्ता अधिकार दोनों ही पालकों को यह स्वतंत्रता देते हैं कि वे अपनी सुविधा और सामर्थ्य अनुसार बाजार से सामग्री का चयन करें।
शिकायत कैसे दर्ज करें?
अभिभावकों की सुविधा के लिए शिक्षा विभाग ने शिकायत प्रक्रिया को सरल बनाया है। यदि कोई स्कूल प्रबंधन अनुचित दबाव बनाता है, तो निम्नलिखित कदम उठाएं:
शिकायत प्रक्रिया के चरण:
- लिखित आवेदन: एक सादे कागज पर स्कूल का नाम और उन पर लगाए जा रहे दबाव का विवरण लिखें।
- दस्तावेज: यदि स्कूल द्वारा कोई पर्ची या मैसेज भेजा गया है, तो उसकी प्रति संलग्न करें।
- कार्यालय पहुंचें: लिखित सूचना तत्काल जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, अम्बिकापुर (सरगुजा) में जमा करें।
- गोपनीयता: विभाग ने आश्वासन दिया है कि शिकायत करने वाले पालकों की गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा जाएगा ताकि बच्चे को स्कूल में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
नियमों का उल्लंघन करने पर होगी FIR और मान्यता रद्द
शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, जो विद्यालय प्रबंधन शासन के निर्देशों की अवहेलना करते पाए जाएंगे, उनकी मान्यता रद्द करने तक की कार्यवाही की जा सकती है। इसके साथ ही, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत संबंधित पुस्तक विक्रेताओं और स्कूल संचालकों पर भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
यह कदम सरगुजा जिले में पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने और अभिभावकों को शोषण से बचाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।










