बाबा केदार के जयघोष से गूंजी देवभूमि: केदारनाथ धाम के कपाट खुले, पीएम मोदी ने श्रद्धालुओं को लिखा भावुक पत्र
“चारधाम यात्रा हमारी आस्था, एकता और समृद्ध परंपराओं का दिव्य उत्सव है” – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
@narendramodi:
“देवभूमि उत्तराखंड की पवित्र धरती पर आज श्री केदारनाथ धाम के कपाट पूरे विधि-विधान के साथ हम सभी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। केदारनाथ धाम और चारधाम की यह यात्रा हमारी आस्था, एकता और समृद्ध परंपराओं का दिव्य उत्सव है…”
कपाट खुलने का भव्य समारोह
आज 22 अप्रैल 2026 को वैशाख शुक्ल पंचमी और अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर सुबह 8:00 बजे हिमालय की गोद में स्थित भगवान शिव के 11वें ज्योतिर्लिंग ‘श्री केदारनाथ धाम’ के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलने के साथ ही पूरा केदारनाथ धाम “बम-बम भोले” और “जय केदार” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। मुख्य पुजारी (रावल) और मंदिर समिति के पदाधिकारियों की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर के द्वार खोले गए।
प्रधानमंत्री का विशेष संदेश और पत्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर देशवासियों और श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए एक विशेष पत्र साझा किया है। पीएम ने अपने संदेश में कहा कि चारधाम यात्रा मात्र एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह भारत की सनातन संस्कृति और ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना का साक्षात दर्शन है।
पत्र के मुख्य अंश:
- आस्था और एकता: पीएम ने केदारनाथ धाम को हमारी प्राचीन संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक बताया।
- बुनियादी ढांचा विकास: प्रधानमंत्री ने केदारनाथ में चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों और बद्रीनाथ मास्टर प्लान का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
- सुविधाओं में विस्तार: पत्र में श्रद्धालुओं के लिए बढ़ी हुई बैठने की क्षमता, नए रास्तों का निर्माण, स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की जानकारी दी गई है।
- पर्यावरण संरक्षण की अपील: पीएम मोदी ने श्रद्धालुओं से देवभूमि की स्वच्छता बनाए रखने और प्लास्टिक कचरे से मुक्त रखने का आग्रह किया है।
यात्रा 2026: श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण जानकारी
इस वर्ष चारधाम यात्रा को लेकर रिकॉर्ड तोड़ उत्साह देखा जा रहा है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए कड़े प्रबंध किए हैं।
| प्रमुख बिंदु | विवरण |
|---|---|
| पंजीकरण (Registration) | उत्तराखंड पर्यटन पोर्टल पर ऑनलाइन अनिवार्य (नि:शुल्क) |
| ट्रेक की दूरी | गौरीकुंड से केदारनाथ – लगभग 16-18 किमी |
| हेलीकॉप्टर सेवा | फाटा, सिरसी और गुप्तकाशी से उपलब्ध (अग्रिम बुकिंग आवश्यक) |
| मौसम की स्थिति | तापमान 0°C से 15°C के बीच, भारी ऊनी कपड़े आवश्यक |
देवभूमि उत्तराखंड का आध्यात्मिक महत्व
बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री—ये चार धाम न केवल मोक्ष के द्वार माने जाते हैं, बल्कि ये हिमालय की दुर्गम पहाड़ियों में भारत की सांस्कृतिक अखंडता को भी जोड़ते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में केदारपुरी का जो नवनिर्माण हुआ है, वह आधुनिकता और आध्यात्मिकता का एक अनूठा संगम है। श्रद्धालुओं के लिए अब गौरीकुंड से केदारनाथ तक का सफर पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुगम बनाया गया है।
संपादकीय टिप्पणी (Pradesh Khabar):
केदारनाथ धाम के कपाट खुलना देश के करोड़ों शिव भक्तों के लिए एक भावुक क्षण है। प्रधानमंत्री का पत्र यह दर्शाता है कि केंद्र और राज्य सरकार के लिए यह यात्रा कितनी प्राथमिकता पर है। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने स्वास्थ्य की जांच कराकर और पंजीकरण कार्ड साथ लेकर ही यात्रा शुरू करें।












