सूरजपुर में उर्वरक माफियाओं पर प्रशासन का हंटर: 8 दुकानों के लाइसेंस 21 दिन के लिए निलंबित
सूरजपुर: जिले के किसानों को खरीफ मौसम 2026 में समय पर और उचित दर पर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। उर्वरक कालाबाजारी की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर एस. जयवर्धन के निर्देशन में कृषि विभाग के संयुक्त दल ने जिले के विभिन्न विकासखंडों में सघन छापेमारी की। इस दौरान भारी अनियमितता पाए जाने पर 08 उर्वरक विक्रय प्रतिष्ठानों के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से 21 दिनों के लिए निलंबित कर दिए गए हैं।
गंभीर अनियमितताएँ आईं सामने
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कई केंद्रों पर ‘उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985’ के नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही थीं। प्रमुख खामियाँ निम्नलिखित थीं:
- स्टॉक बोर्ड और मूल्य सूची (रेट लिस्ट) का प्रदर्शित न होना।
- बिल बुक, स्टॉक रजिस्टर और वितरण पंजी का संधारण नहीं किया जाना।
- भौतिक स्टॉक (Physical Stock) और पीओएस (POS) मशीन के आंकड़ों में भारी अंतर।
- गत वर्ष की तुलना में असामान्य रूप से अधिक मात्रा में बिक्री।
इन 08 संस्थानों पर हुई कार्यवाही (नामों की सूची):
प्रशासन ने निम्नलिखित प्रतिष्ठानों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए उनके विक्रय प्राधिकार पत्र को निलंबित कर दिया है:
- मेसर्स अनिल कृषि सेवा केन्द्र, चंदरपुर
- मेसर्स अजय कृषि सेवा केन्द्र, चंदरपुर
- मेसर्स महानंद राय अग्रवाल, सूरजपुर
- मेसर्स इराकी जनरल स्टोर, जयनगर
- मेसर्स तायल ट्रेडर्स, प्रतापपुर
- मेसर्स श्याम ट्रेडर्स, प्रतापपुर
- मेसर्स किसान सेवा केन्द्र, प्रतापपुर
- मेसर्स श्री राम कृषि सेवा केन्द्र, छिन्दपारा
उपरोक्त सभी संस्थानों को 07 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का समय दिया गया है। संतोषजनक उत्तर न मिलने की स्थिति में इनके स्थाई लाइसेंस निरस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कालाबाजारी और जमाखोरी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
किसानों से प्रशासन की अपील:
जिला प्रशासन ने किसानों से आग्रह किया है कि वे खाद या उर्वरक खरीदते समय विक्रेता से पक्का बिल अवश्य मांगें। यदि कोई विक्रेता निर्धारित मूल्य से अधिक की वसूली करता है या कालाबाजारी में संलिप्त पाया जाता है, तो इसकी सूचना तुरंत स्थानीय कृषि विभाग या उच्च अधिकारियों को दें।
इस कार्यवाही में जिला स्तरीय उर्वरक निरीक्षण दल, विकासखंड स्तरीय निरीक्षक और अन्य विभागीय अधिकारी शामिल थे। प्रशासन की इस कड़क कार्यवाही से खाद विक्रेताओं में हड़कंप मच गया है, वहीं किसानों ने राहत की सांस ली है कि उन्हें खरीफ सीजन के लिए खाद उचित मूल्य पर उपलब्ध हो सकेगी।











