खंडहर विद्यालय में पढ़ने हेतु बच्चे मजबूर जिला प्रशासन का ध्यान अपेक्षित

खंडहर विद्यालय में पढ़ने हेतु बच्चे मजबूर जिला प्रशासन का ध्यान अपेक्षित

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नगर पंचायत बिश्रामपुर परिषर स्थित विद्यालय मतदान केंद्र के रूप में भी काम आता हैअपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है

गोपाल सिंह विद्रोही प्रदेश खबर प्रमुख छत्तीसगढ़/बिश्रामपुर- काल के गाल में समा कर शिक्षा अध्ययन करने को मजबूर है के मासूम व देश का भविष्य ।जिस पर शिक्षा विभाग व प्रशासन की नजर नहीं है या है भी तो इस और उन्हें देखने की फुर्सत नहीं है। केवल शिक्षा का स्तर में सुधार की दुहाई या बड़ी बड़ी बाते कर ढोंग किया जा रहा है कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी ।
जानकारी के अनुसार नगर पंचायत बिश्रामपुर के परिसर में कॉलरी कर्मचारियों के बच्चों के शिक्षा का ध्यान में रखते हुए तत्कालीन सरपंच श्रीमती सरला सुदेवन ने 1982 में शासकीय आदिम जाति कन्या प्राथमिक शाला चोपड़ा विद्यालय के भवन हेतु दो कक्ष का निर्माण कराया था ।
जो अब 35 वर्ष पूर्ण हो चुका हैं जर्जर अवस्था होने के कारण 2001 में छत से पानी टपकने के कारण विद्यालय भवन का मरम्मत भी कराया गया था, परंतु एसईसीएल बिश्रामपुर ओसीएम खदान में ब्लास्टिक होने के कारण धरती कंपन से छत पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है ।भवन का पूरा छत का क्षत-विक्षत हो गया है।

बच्चों के लिए अध्ययन के लिए कोई भवन में सुरक्षित कमरा नहीं है। बच्चों के भविष्य व सुरक्षा का ध्यान रखते हुए विद्यालय के प्रधान पाठक ने 6 सितंबर 2017 में ही सूरजपुर जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर विद्यालय की जर्जर भवन एवं कमरे बरामदे का छत का प्लास्टर का जिक्र करते हुए इसे मरम्मत की मांग की थी।

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परंतु शिक्षा का बढ़ावा का दुहाई देने वाला जिला प्रशासन इस ओर अब तक ध्यान न देकर यहां अध्ययन कर रहे मासूम बच्चे जो देश के भविष्य है उनके साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। विद्यालय का भवन कभी भी यहां अध्ययन कर रहे हैं 38 विद्यार्थियों को अपने आगोश में ले सकता है ।

विद्यालय भवन पूरी तरह जर्जर हो चुकी है ।
जर्जर विद्यालय भवन में मनाया जाता है लोकतंत्र का पर्व यहां यह बताना आवश्यक है कि इस जर्जर विद्यालय भवन में लोकसभा, विधानसभा एवं नगरीय निकाय चुनाव का मतदान केंद्र क्रमांक 201 भी बनाया जाता है जहां लोकतंत्र का उत्सव मनाया जाता है।

वर्तमान में यहां 38 विद्यार्थी भवन के अभाव में विद्यालय मंच के छत के नीचे अध्ययन करने हेतु मजबूर है। इस विद्यालय की दयनीय अवस्था देख कर इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि सुदूर व पहुंच बिहिन ग्रामों के विद्यालय भवन एवं शिक्षा की हालत क्या होती होगी क्योंकि सूरजपुर जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर की दूरी स्थित विद्यालय नगर पंचायत विश्रामपुर कार्यालय परिसर के अंदर ही मौजूद है।
जहां आए दिन मुख्यालय से अधिकारियों का आवाजाही लगी रहती है ।जिनका ध्यान कभी नहीं जाता। यदि विद्यालय इसी तरह उपेक्षित रहा तो कुछ ही दिनों में विद्यालय एक बड़े हादसे के रूप में बैठ सकता है।