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40 साल बाद नॉर्वे में ऐतिहासिक क्षण: ओस्लो पहुंचे पीएम मोदी, एयरपोर्ट पर जोनास गहर स्टोर ने किया भव्य स्वागत | Pradesh Khabar






40 साल बाद ओस्लो में ऐतिहासिक क्षण: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे नॉर्वे, एयरपोर्ट पर पीएम जोनास गहर स्टोर ने किया भव्य स्वागत


अंतरराष्ट्रीय कूटनीति

4 दशक बाद नॉर्वे की धरती पर कोई भारतीय प्रधानमंत्री: ओस्लो पहुंचे नरेंद्र मोदी, एयरपोर्ट पर प्रोटोकॉल तोड़कर पीएम जोनास गहर स्टोर ने की अगवानी, द्विपक्षीय संबंधों में नए उत्साह का संचार

विशेष कवरेज: प्रदेश खबर नेटवर्क
दिनांक: 18 मई, 2026
स्थान: ओस्लो (नॉर्वे)

ओस्लो (नॉर्वे): भारत और नॉर्डिक देशों के बीच कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को एक नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पांच देशों की आधिकारिक विदेश यात्रा के अगले चरण के तहत नॉर्वे की राजधानी ओस्लो पहुंच चुके हैं। पिछले चार दशकों से भी अधिक समय में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नॉर्वे की यह पहली ऐतिहासिक यात्रा है। ओस्लो के हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री मोदी का अभूतपूर्व और गर्मजोशी से भरा स्वागत किया गया। नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर ने खुद एयरपोर्ट पर मौजूद रहकर प्रोटोकॉल के तहत प्रधानमंत्री मोदी की अगवानी की और उन्हें गले लगाकर स्वागत किया।

इस ऐतिहासिक यात्रा को लेकर दोनों देशों के कूटनीतिक गलियारों में भारी उत्साह है। विश्लेषकों का मानना है कि चार दशक बाद हो रहा यह शीर्ष स्तरीय दौरा भारत और नॉर्वे के बीच पारंपरिक रूप से मजबूत और मैत्रीपूर्ण संबंधों में एक नई ऊर्जा और गति का संचार करेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओस्लो पहुंचने के तुरंत बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा: “नॉर्वे के ओस्लो में लैंड कर चुका हूं। एयरपोर्ट पर गर्मजोशी से भरे स्वागत के लिए मैं प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर का बेहद आभारी हूं। पिछले चार दशकों से अधिक समय में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नॉर्वे की यह पहली यात्रा है। मुझे पूरा विश्वास है कि यह दौरा भारत-नॉर्वे की दोस्ती को और अधिक मजबूत और ऊर्जावान बनाएगा। अपनी इस यात्रा के दौरान मैं महामहिम राजा हेराल्ड पंचम और रानी सोंजा से मुलाकात करूंगा और प्रधानमंत्री स्टोर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करूंगा। कल, 19 मई को ओस्लो में ही तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है, जो मेरे नॉर्डिक समकक्षों के साथ मुलाकात करने और रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा करने का एक शानदार अवसर प्रदान करेगा।”

चार दशक बाद ऐतिहासिक दौरा: संबंधों को मिलेगी नई दिशा

भारत और नॉर्वे के बीच राजनयिक संबंधों के इतिहास पर नजर डालें तो यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण समय पर हो रहा है। पिछले 40 से अधिक वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक आदान-प्रदान तो बढ़ा है, लेकिन शीर्ष स्तर पर इस तरह की द्विपक्षीय यात्रा का लंबे समय से इंतजार था। प्रधानमंत्री मोदी के इस कदम से न केवल नॉर्वे बल्कि पूरे स्कैंडिनेवियाई और नॉर्डिक क्षेत्र में भारत की कूटनीतिक पहुंच और अधिक मजबूत होगी।

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ओस्लो में दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच होने वाली उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता का मुख्य एजेंडा समुद्री अर्थव्यवस्था (Blue Economy), हरित संक्रमण (Green Transition), अक्षय ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी, जलवायु परिवर्तन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific) की सुरक्षा रहने वाला है। नॉर्वे अपनी उन्नत समुद्री तकनीकों, गहरे समुद्र में खनन और पवन ऊर्जा के लिए दुनिया भर में जाना जाता है, जबकि भारत को एक विशाल और उभरते हुए बाजार के रूप में देखा जाता है। दोनों अर्थव्यवस्थाओं का यह आपसी तालमेल दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित होने वाला है।

ओस्लो में व्यस्त कार्यक्रम: राजपरिवार से मुलाकात और द्विपक्षीय वार्ता

अपनी इस संक्षिप्त लेकिन बेहद महत्वपूर्ण आधिकारिक यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कई व्यस्त और उच्च स्तरीय कार्यक्रम तय किए गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी नॉर्वे के शाही महल का दौरा करेंगे, जहां वे नॉर्वे के महामहिम राजा हेराल्ड पंचम (King Harald V) और रानी सोंजा (Queen Sonja) से मुलाकात करेंगे। इस शिष्टाचार मुलाकात के दौरान दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को याद किया जाएगा।

इसके तुरंत बाद, प्रधानमंत्री मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर के बीच एक विस्तृत प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता (Delegation-Level Talks) होगी। इस बैठक में दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की पूरी संभावना है, जिनमें मुख्य रूप से हरित हाइड्रोजन, महासागर प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा निवेश और विज्ञान व तकनीक के क्षेत्रों में सहयोग शामिल हैं।

कल होगा तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन (3rd India-Nordic Summit)

प्रधानमंत्री की इस यात्रा का एक और सबसे बड़ा मुख्य आकर्षण 19 मई को ओस्लो में ही आयोजित होने वाला ‘तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन’ (3rd India-Nordic Summit) है। इस महत्वपूर्ण बहुपक्षीय सम्मेलन में नॉर्वे के अलावा नॉर्डिक क्षेत्र के अन्य चार प्रमुख देशों—स्वीडन, फिनलैंड, डेनमार्क और आइसलैंड के प्रधानमंत्री भी हिस्सा लेंगे।

यह शिखर सम्मेलन भारत के लिए बेहद रणनीतिक महत्व रखता है, क्योंकि नॉर्डिक देश वैश्विक नवाचार, सतत विकास, हरित समाधान और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के वैश्विक लीडर हैं। इस सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी सभी नॉर्डिक देशों के प्रधानमंत्रियों के साथ सामूहिक और अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे।

शिखर सम्मेलन के मुख्य संभावित चर्चा के विषय:

  • जलवायु कार्रवाई और हरित भागीदारी: वैश्विक कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए नॉर्डिक देशों की उन्नत तकनीकों को भारत में लागू करने पर विचार।
  • डिजिटल नवाचार और एआई: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और सुरक्षित 5G/6G कनेक्टिविटी के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देना।
  • आर्कटिक अनुसंधान (Arctic Research): जलवायु परिवर्तन के वैश्विक प्रभावों का अध्ययन करने के लिए आर्कटिक क्षेत्र में वैज्ञानिक सहयोग को और गहरा करना।
  • पोस्ट-पैन्डेमिक आर्थिक सुधार: भारत और नॉर्डिक देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को दूर करना और द्विपक्षीय निवेश को बढ़ावा देना।
कार्यक्रम / घटनाक्रम स्थान और दिनांक मुख्य उद्देश्य / एजेंडा
ऐतिहासिक आगमन ओस्लो हवाई अड्डा, 18 मई 2026 प्रोटोकॉल तोड़कर पीएम जोनास गहर स्टोर द्वारा भव्य स्वागत।
शाही शिष्टाचार मुलाकात रॉयल पैलेस, ओस्लो राजा हेराल्ड पंचम और रानी सोंजा के साथ ऐतिहासिक संबंधों पर चर्चा।
द्विपक्षीय वार्ता ओस्लो, 18 मई 2026 समुद्री अर्थव्यवस्था, क्लीन एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर समझौतों की उम्मीद।
तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन ओस्लो, 19 मई 2026 5 नॉर्डिक देशों के राष्ट्रप्रमुखों के साथ नवाचार और हरित विकास पर मंथन।

वैश्विक मंच पर भारत-नॉर्वे की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी

हाल के वर्षों में वैश्विक भू-राजनीति में आए बदलावों के बीच भारत और नॉर्वे ने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक जैसा रुख अपनाया है। विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र (UN) के सुधारों, समुद्री सुरक्षा और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था (Rules-based International Order) को बनाए रखने के लिए दोनों देश लगातार प्रतिबद्ध रहे हैं। नॉर्वे के पेंशन फंड्स ने भारत के बुनियादी ढांचे और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश किया है, जिसे इस यात्रा के बाद और अधिक विस्तार मिलने की पूरी उम्मीद है।

ओस्लो की यह ऐतिहासिक यात्रा न केवल चार दशकों के कूटनीतिक शून्य को समाप्त कर रही है, बल्कि यह बदलते हुए वैश्विक परिदृश्य में भारत की बहु-आयामी और सक्रिय विदेश नीति की एक और बड़ी सफलता को दर्शाती है।


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