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डिजिटल सुशासन: अब ‘सेवा-सेतु केंद्र’ कहलाएंगे लोक सेवा केंद्र, एक ही मंच पर मिलेंगी 442 सेवाएं | Pradesh Khabar






डिजिटल सुशासन: अब ‘सेवा-सेतु केंद्र’ कहलाएंगे लोक सेवा केंद्र, नागरिकों को मिलेंगी 442 प्रकार की डिजिटल सेवाएं | Pradesh Khabar


सुशासन एवं ई-गवर्नेंस

लोक सेवा केंद्रों का कायाकल्प: अब ‘सेवा-सेतु केंद्र’ के एकीकृत मंच पर मिलेंगी 442 प्रकार की डिजिटल नागरिक सेवाएं, राज्य शासन का बड़ा फैसला

राज्य ब्यूरो: प्रदेश खबर नेटवर्क
दिनांक: 19 मई, 2026

राज्य ब्यूरो: राज्य शासन ने नागरिकों को डिजिटल सेवाएं देने की व्यवस्था को बड़ा विस्तार देते हुए एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रदेश में संचालित सभी लोक सेवा केंद्रों (Lok Seva Kendras) को उन्नत कर अब ‘सेवा-सेतु केंद्र’ के रूप में संचालित करने का निर्णय लिया गया है। इस बड़े बदलाव के साथ ही अब नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं के दायरे में व्यापक बढ़ोतरी होगी। अब आम जनता को केवल 73 की जगह 442 प्रकार की डिजिटल नागरिक सेवाएं एक ही एकीकृत मंच पर आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी।

बड़ा बदलाव: पहले लोक सेवा केंद्रों के माध्यम से केवल 73 सेवाएं मिलती थीं, लेकिन अब उन्नयन के बाद सेवा-सेतु केंद्रों पर यह संख्या बढ़कर 442 हो गई है।

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73 से 442 तक पहुंचा सेवा विस्तार

पहले लोक सेवा केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को विभिन्न प्रमाण पत्र, पंजीयन, आवेदन और शासकीय योजनाओं से जुड़ी सीमित 73 सेवाएं ही प्रदान की जाती थीं। शासन के इस नए फैसले और तकनीकी उन्नयन के बाद सेवा-सेतु केंद्रों पर सेवाओं का यह ग्राफ सीधे 442 तक पहुंच गया है। इस व्यवस्था के लागू होने से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के नागरिकों को विभिन्न सरकारी विभागों की चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी और सभी आवश्यक सेवाएं एक ही मंच पर त्वरित, सुलभ और पारदर्शी तरीके से मिल सकेंगी।

पूरे प्रदेश में एक समान पहचान और ब्रांडिंग

व्यवस्था को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए राज्य शासन ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी सेवा-सेतु केंद्रों की पहचान एक समान (यूनिफॉर्म ब्रांडिंग) होनी चाहिए। इसके तहत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं:

  • हर केंद्र के मुख्य द्वार पर नया बोर्ड और नाम पट्टिका (नेम प्लेट) लगाई जाएगी।
  • सभी प्रकार की प्रचार सामग्री, शासकीय पोर्टल और नागरिकों को मिलने वाली पावती (रसीद) पर अब “लोक सेवा केंद्र” के स्थान पर “सेवा-सेतु केंद्र” शब्द का प्रयोग किया जाएगा।
  • केंद्रों की नई पहचान के लिए निर्धारित लोगो (Logo) का उपयोग करना अनिवार्य होगा।

सेवा प्रदाताओं को मिला “सेवा-सेतु प्रबंधक” का पदनाम

इस नई प्रशासनिक और डिजिटल व्यवस्था को अधिक संस्थागत पहचान और स्पष्टता देने के लिए पदों के नाम में भी बदलाव किया गया है। पोर्टल संचालन के लिए अधिकृत सेवा प्रदाताओं को अब से “सेवा-सेतु प्रबंधक” के नए पदनाम से जाना जाएगा।

पुरानी व्यवस्था नई उन्नत व्यवस्था (सेवा-सेतु)
केंद्र का नाम: लोक सेवा केंद्र नया नाम: सेवा-सेतु केंद्र
कुल उपलब्ध नागरिक सेवाएं: 73 कुल उपलब्ध नागरिक सेवाएं: 442
पदनाम: अधिकृत सेवा प्रदाता नया पदनाम: सेवा-सेतु प्रबंधक

15 दिन में मांगी गई कार्यवाही रिपोर्ट

राज्य शासन ने इस निर्णय को जमीनी स्तर पर जल्द से जल्द लागू करने के लिए सभी जिलों के प्रशासन को कड़े निर्देश दिए हैं। सभी जिलों को निर्देशित किया गया है कि 15 दिवस के भीतर केंद्रों के परिवर्तित स्वरूप, नए बोर्ड, नाम पट्टिका और अन्य आवश्यक सुधारों की कार्यवाही पूरी कर ली जाए और इसकी फोटोग्राफ सहित विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजी जाए। इसके साथ ही, जिला ई-गवर्नेंस सोसायटी को स्थानीय स्तर पर इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने और जिला वेबसाइटों पर इस नई सूचना को प्रसारित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

डिजिटल सुशासन को मिलेगा नया बल

राज्य शासन का मानना है कि यह दूरगामी कदम प्रदेश में ई-गवर्नेंस की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा और इसे नई ऊंचाई देगा। ‘सेवा-सेतु केंद्र’ केवल एक नाम परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह नागरिक सुविधाओं के वास्तविक विस्तार, तकनीकी सशक्तिकरण और सुशासन की एक नई कार्य संस्कृति की शुरुआत है। इससे केंद्र और राज्य सरकार की “डिजिटल इंडिया” की अवधारणा जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत व प्रभावी होकर उभरेगी।


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