मध्यप्रदेश: उपभोक्ता आयोग के 34 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को मिला ‘स्थायी कर्मी’ का दर्जा





मध्यप्रदेश सरकार का ऐतिहासिक निर्णय: उपभोक्ता आयोग के कर्मचारियों को मिला स्थायी कर्मी का दर्जा

file_000000000ae07206b6dd6cb6073112cd
WhatsApp Image 2026-03-12 at 6.47.26 PM (1)
file_000000009a407207b6d77d3c5cd41ab0


मध्यप्रदेश: उपभोक्ता आयोग के 34 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को मिला ‘स्थायी कर्मी’ का दर्जा, सरकार का ऐतिहासिक निर्णय

भोपाल: मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार ने अपने सुशासन के संकल्प को दोहराते हुए कर्मचारी कल्याण की दिशा में एक अत्यंत संवेदनशील और ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने राज्य एवं जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोगों में बरसों से कार्यरत 34 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को ‘स्थायी कर्मी’ का दर्जा देने का निर्णय लिया है। यह निर्णय उन कर्मचारियों के लिए एक नई सुबह लेकर आया है, जो लंबे समय से भविष्य की अनिश्चितताओं के बीच अपनी सेवाएं दे रहे थे।

मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के विशेष प्रयास

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने इस पूरे मामले में व्यक्तिगत रुचि लेते हुए इसे प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया। विभाग द्वारा की गई विशेष पैरवी और मुख्यमंत्री के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण के कारण यह संभव हो सका। मंत्री श्री राजपूत ने स्पष्ट किया कि सरकार उन सभी लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है जो वर्षों से सरकारी तंत्र का अभिन्न अंग बने हुए हैं।

“सरकार की प्रतिबद्धता केवल योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उन हाथों को मजबूती देना भी है जो सरकारी सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। यह निर्णय हमारी संवेदनशीलता का प्रमाण है।” – श्री गोविंद सिंह राजपूत, खाद्य मंत्री।

निर्णय का विस्तृत विवरण और लाभान्वित कर्मचारी

विभाग द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस निर्णय से कुल 34 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी लाभान्वित होंगे। इसमें 29 कर्मचारी चतुर्थ श्रेणी के हैं, जबकि 5 कर्मचारी ऑफिस मोहर्रिर-सह-डिस्पेचर के पदों पर कार्यरत हैं। ये कर्मचारी राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग और विभिन्न जिला आयोगों में अपनी सेवाएं दे रहे थे।

स्थायी कर्मी का दर्जा मिलने से इन्हें निम्नलिखित लाभ प्राप्त होंगे:

66071dc5-2d9e-4236-bea3-b3073018714b
hotal trinetra
gaytri hospital
WhatsApp Image 2026-05-10 at 2.46.41 PM (1)
  • सेवा सुरक्षा: अब इन कर्मचारियों के रोजगार पर अनिश्चितता का संकट नहीं रहेगा।
  • वेतन निर्धारण: स्थायी कर्मी का दर्जा मिलने के बाद इन्हें नियमानुसार वेतनमान और अन्य वित्तीय भत्ते प्राप्त होंगे।
  • सामाजिक सुरक्षा: भविष्य निधि (PF) और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की सुरक्षा का रास्ता साफ हो गया है।
  • कार्य में उत्साह: आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिलने से कर्मचारियों की कार्यक्षमता और संस्था के प्रति उनके समर्पण में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।

‘वन टाइम रिलेक्सेशन’: शासन की विशेष उदारता

इस निर्णय के पीछे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ‘वन टाइम रिलेक्सेशन’ (एकमुश्त छूट) है। सामान्य प्रशासन विभाग के 2016 के परिपत्र के अनुसार, 16 मई 2007 के बाद नियुक्त दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को स्थायी कर्मी का लाभ देने के लिए राज्य शासन की पूर्व अनुमति आवश्यक थी। इस तकनीकी बाधा को दूर करते हुए, मध्यप्रदेश सरकार ने इसे विशेष परिस्थितियों वाला मामला मानते हुए सहानुभूतिपूर्वक विचार किया। यह उदारता दर्शाती है कि नियम और प्रक्रियाओं के बीच मानवीय संवेदनाओं के लिए भी सरकार के दरवाजे खुले हैं।

मंत्रि-परिषद की मुहर

इस पूरे प्रस्ताव को 9 जून 2026 को आयोजित हुई राज्य मंत्रि-परिषद की बैठक में अंतिम स्वीकृति प्रदान की गई थी। इसके उपरांत, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने बिना किसी देरी के प्रशासनिक प्रक्रिया को पूर्ण करते हुए विधिवत आदेश जारी किए। यह त्वरित निर्णय प्रक्रिया शासन की कार्यकुशलता को भी प्रदर्शित करती है।

कर्मचारी वर्ग में हर्ष और उम्मीद

इस समाचार के सामने आने के बाद राज्य भर के उपभोक्ता आयोग कार्यालयों में खुशी का माहौल है। दशकों से अपनी मेहनत के बावजूद ‘दैनिक वेतनभोगी’ की श्रेणी में रह रहे ये कर्मचारी अब सम्मान के साथ कह सकेंगे कि वे राज्य सरकार के ‘स्थायी कर्मी’ हैं। यह कदम केवल 34 परिवारों की आर्थिक स्थिति को बेहतर नहीं बनाएगा, बल्कि उनके बच्चों के भविष्य और सामाजिक प्रतिष्ठा में भी एक बड़ा सुधार लाएगा।

सुशासन की दिशा में एक और कदम

मध्यप्रदेश सरकार का यह कदम स्पष्ट रूप से संकेत देता है कि वर्तमान सरकार कर्मचारी हितों को सर्वोपरि रखती है। डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार न केवल विकास की नई परियोजनाओं पर कार्य कर रही है, बल्कि शासन के छोटे-से-छोटे अंग को भी मजबूत करने की दिशा में अग्रसर है। निश्चित रूप से, यह निर्णय कर्मचारी कल्याण और सुशासन की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध होगा।