सरस्वती शिशु मंदिर दर्री में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 का भव्य आयोजन






अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026: सरस्वती शिशु मंदिर एच.टी.पी.पी. दर्री में योग कार्यक्रम का भव्य आयोजन

WhatsApp Image 2026-03-12 at 6.47.26 PM (1)
file_000000009a407207b6d77d3c5cd41ab0


सरस्वती शिशु मंदिर एच.टी.पी.पी. दर्री में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस का भव्य आयोजन: योगमय हुआ विद्यालय परिसर

📍 स्थान: सरस्वती शिशु मंदिर, एच.टी.पी.पी. परिसर, दर्री (कोरबा, छत्तीसगढ़)

📅 दिनांक: 21 जून 2026

📰 समाचार श्रेणी: शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य समाचार (News Update)

🎯 मुख्य उद्देश्य: विद्यार्थियों एवं आम जनमानस को स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली के प्रति जागरूक करना

दर्री/कोरबा: “योगः कर्मसु कौशलम्” अर्थात् कर्मों में कुशलता ही योग है, इसी शाश्वत संदेश को आत्मसात करते हुए दिनांक 21 जून 2026 को अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के पावन अवसर पर सरस्वती शिशु मंदिर एच.टी.पी.पी. दर्री में एक वृहद एवं अत्यंत सफल योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस गौरवमयी कार्यक्रम में विद्यालय के सैंकड़ों विद्यार्थियों, शिक्षक-शिक्षिकाओं, गणमान्य नागरिकों तथा अभिभावकों ने पूरी ऊर्जा, उत्साह और कड़े अनुशासन के साथ सहभागिता दर्ज की।

कार्यक्रम का मूल उद्देश्य नई पीढ़ी यानी विद्यार्थियों और समाज के हर वर्ग को योग के माध्यम से एक स्वस्थ, तनावमुक्त और संतुलित जीवनशैली अपनाने के प्रति जागरूक करना रहा। आधुनिक युग की भागदौड़ और मानसिक तनाव के बीच योग किस प्रकार हमारे शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य के लिए एक सुरक्षा कवच बन सकता है, इस सत्र में इसका सजीव प्रदर्शन और अभ्यास किया गया।

“योग केवल एक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह स्वयं के माध्यम से, स्वयं की स्वयं तक की यात्रा है। आज सरस्वती शिशु मंदिर दर्री के प्रांगण में बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी ने जिस एकाग्रता का परिचय दिया, वह इस बात का प्रमाण है कि हमारी संस्कृति की जड़ें आज भी योग और प्राणायाम से सिंचित हैं।”

1. कार्यक्रम का गरिमामयी शुभारंभ और अतिथि सत्कार

अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के इस विशेष सत्र की शुरुआत प्रातः कालीन सुरम्य बेला में हुई। भारतीय परंपरा के अनुरूप कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के तैलचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन और ‘सरस्वती वंदना’ के साथ हुआ। विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती सुषमा बारस्कर ने उपस्थित मुख्य अतिथियों, योग शिक्षिकाओं और प्रबुद्ध जनों का आत्मीय स्वागत किया।

इस अवसर पर विद्यालय प्रांगण को विशेष रूप से सुसज्जित किया गया था, जहां चारों ओर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह महसूस किया जा सकता था। योग सत्र की शुरुआत से पहले उपस्थित जनसमूह को योग के इतिहास और वैश्विक स्तर पर इसके बढ़ते महत्व के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गई।

2. पतंजलि महिला समिति का तकनीकी एवं व्यावहारिक मार्गदर्शन

इस वर्ष के योग कार्यक्रम को तकनीकी रूप से सुदृढ़ और प्रामाणिक बनाने के लिए पतंजलि महिला समिति की वरिष्ठ एवं अनुभवी योग शिक्षिकाओं को आमंत्रित किया गया था। समिति की प्रसिद्ध योग विशेषज्ञ श्रीमती ललिता केंवट एवं श्रीमती इंदु रजक ने मुख्य प्रशिक्षक की भूमिका निभाई।

श्रीमती ललिता केंवट द्वारा विभिन्न योगासनों का अभ्यास:

योग शिक्षिका श्रीमती ललिता केंवट ने विद्यार्थियों की शारीरिक संरचना और मानसिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए क्रमिक रूप से योगासनों का अभ्यास कराया। उन्होंने निम्नलिखित आसनों को अत्यंत सरल और वैज्ञानिक तरीके से सिखाया:

  • ताड़ासन और वृक्षासन: बच्चों की लंबाई बढ़ाने, रीढ़ की हड्डी को सीधा रखने और शारीरिक संतुलन को बेहतर बनाने के लिए इन आसनों का अभ्यास कराया गया।
  • सूर्यनमस्कार: 12 कड़ियों वाले इस संपूर्ण व्यायाम का अभ्यास कराते हुए उन्होंने बताया कि किस प्रकार यह पूरे शरीर की मांसपेशियों को सक्रिय करता है और रक्त संचार को दुरुस्त रखता है।
  • वज्रासन और शशांकासन: पाचन क्रिया को मजबूत करने और मानसिक तनाव को तुरंत शांत करने के लिए इन आसनों के लाभों को रेखांकित किया गया।

श्रीमती इंदु रजक द्वारा प्राणायाम और श्वसन क्रिया का विज्ञान:

आसनों के पश्चात योग शिक्षिका श्रीमती इंदु रजक ने श्वसन तंत्र को मजबूत बनाने के लिए प्राणायाम का सत्र लिया। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सही तरीके से सांस लेना और छोड़ना हमारे फेफड़ों और मस्तिष्क के लिए कितना आवश्यक है:

66071dc5-2d9e-4236-bea3-b3073018714b
hotal trinetra
gaytri hospital
WhatsApp Image 2026-05-10 at 2.46.41 PM (1)
  • कपालभाति प्राणायाम: शरीर के आंतरिक विषैले तत्वों (Toxins) को बाहर निकालने और चेहरे पर प्राकृतिक चमक लाने के लिए इसका अभ्यास कराया गया।
  • अनुलोम-विलोम: मस्तिष्क के दोनों हिस्सों (Left and Right Brain) में संतुलन स्थापित करने, एकाग्रता बढ़ाने और परीक्षा के दिनों में विद्यार्थियों के मानसिक तनाव को कम करने के लिए इसे अचूक उपाय बताया गया।
  • भ्रामरी और उद्गीथ प्राणायाम: भ्रामरी प्राणायाम के मधुर गुंजन से पूरा विद्यालय परिसर गुंजायमान हो उठा, जिससे उपस्थित जनों को अद्भुत मानसिक शांति का अनुभव हुआ।

3. मुख्य योगासनों की रूपरेखा और उनके स्वास्थ्य लाभ

कार्यक्रम के दौरान अभ्यास किए गए मुख्य आसनों और उनके वैज्ञानिक लाभों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है, जिसका संदेश विद्यालय के सूचना पटल पर भी प्रसारित किया गया:

क्रमांक योगासन / प्राणायाम का नाम लक्षित शारीरिक अंग मुख्य स्वास्थ्य लाभ (विद्यार्थियों के विशेष संदर्भ में)
1 ताड़ासन (Tadasana) रीढ़ की हड्डी, पैर और कंधे शारीरिक लंबाई में वृद्धि और बॉडी पोस्चर में सुधार।
2 वृक्षासन (Vrikshasana) पैरों की मांसपेशियां, तंत्रिका तंत्र मानसिक एकाग्रता और संतुलन क्षमता का विकास।
3 सूर्यनमस्कार (Surya Namaskar) सर्वांग शरीर (Full Body) लचीलापन बढ़ाना, वजन नियंत्रित करना और ऊर्जा का संचार।
4 अनुलोम-विलोम (Anulom Vilom) श्वसन तंत्र, मस्तिष्क तनाव से मुक्ति, फेफड़ों की क्षमता में वृद्धि और याददाश्त तेज होना।
5 भ्रामरी प्राणायाम (Bhramari) मस्तिष्क और तंत्रिकाएं क्रोध पर नियंत्रण, अनिद्रा की समस्या का अंत और गहन शांति।

4. श्रीमती भावना देवांगन द्वारा ‘ध्यान साधना’ और मानसिक पुनर्जीवन

योगासन और प्राणायाम के माध्यम से जब शरीर और श्वासों का तालमेल बैठ गया, तब कार्यक्रम के अगले और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव की शुरुआत हुई। सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक साधिका श्रीमती भावना देवांगन द्वारा उपस्थित जनसमूह को ‘ध्यान साधना’ (Meditation Session) कराई गई।

श्रीमती भावना देवांगन ने अत्यंत मधुर और शांत स्वर में ध्यान के विभिन्न चरणों के माध्यम से लोगों को अपने अंतर्मन से जुड़ना सिखाया। लगभग 15 से 20 मिनट के इस ध्यान सत्र के दौरान पूरा प्रांगण पूरी तरह मौन और ध्यानमग्न था। उन्होंने बताया कि किस प्रकार नियमित रूप से केवल 10 मिनट का ध्यान हमारे मस्तिष्क की कार्यक्षमता (Cognitive Skills) को कई गुना बढ़ा सकता है।

ध्यान सत्र की समाप्ति पर उपस्थित विद्यार्थियों और अभिभावकों ने साझा किया कि उन्होंने एक ऐसी अद्वितीय मानसिक शांति, अलौकिक आनंद और एकाग्रता का अनुभव किया, जो उन्होंने पहले कभी महसूस नहीं की थी।

5. प्राचार्य श्रीमती सुषमा बारस्कर का प्रेरक उद्बोधन और आभार प्रदर्शन

कार्यक्रम के समापन के अवसर पर विद्यालय की ऊर्जावान और आदरणीया प्राचार्य श्रीमती सुषमा बारस्कर ने मंच से उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने अपने भाषण में योग को केवल एक दिन का उत्सव न मानकर उसे अपनी चौबीस घंटे की दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

प्राचार्य महोदया ने अपने वक्तव्य में कहा:

“आज मोबाइल, इंटरनेट और आधुनिकता की अंधी दौड़ में हमारे बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर हो रहे हैं। ऐसे समय में योग ही एकमात्र ऐसा साधन है जो हमारे बच्चों को भटकाव से बचाकर उन्हें संस्कारवान, स्वस्थ और मेधावी बना सकता है। हमारे विद्यालय का यह निरंतर प्रयास रहेगा कि हम विद्यार्थियों के दैनिक जीवन में योग को शामिल रखें।”

भाषण के अंत में प्राचार्य श्रीमती सुषमा बारस्कर ने पतंजलि महिला समिति से पधारीं योग शिक्षिकाओं श्रीमती ललिता केंवट एवं श्रीमती इंदु रजक, ध्यान साधिका श्रीमती भावना देवांगन, प्रबंधन समिति के सदस्यों, पत्रकार बंधुओं, शिक्षक शिक्षिकाओं तथा प्रिय छात्र-छात्राओं के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी के उज्ज्वल और निरोगी भविष्य की कामना की।

6. विद्यालय परिवार की सक्रिय सहभागिता एवं अनुशासन की मिसाल

इस पूरे कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसका त्रुटिहीन प्रबंधन और कड़ा अनुशासन रहा। छोटे-छोटे बच्चों से लेकर वरिष्ठ शिक्षकों तक, सभी श्वेत परिधान में योग मैट पर कतारबद्ध होकर बैठे थे। संस्था के आचार्य संघ ने व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

विद्यार्थियों के चेहरे पर थकान की जगह एक अनोखा ओज और उत्साह दिखाई दे रहा था। कार्यक्रम के अंत में सभी को सात्विक स्वल्पाहार (अंकुरित अनाज और फल) का वितरण किया गया, जो स्वस्थ खान-पान की आदत को बढ़ावा देने का एक छोटा मगर सार्थक प्रयास था। शांति पाठ और राष्ट्रगान के साथ इस ऐतिहासिक योग दिवस कार्यक्रम का आधिकारिक समापन हुआ।