सरगुजा में महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल: बिहान की ‘विद्युत सखियां’ अब बनीं ‘सोलर दीदी’, प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना को घर-घर पहुंचाएंगी महिलाएं
अंबिकापुर/सरगुजा: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में महिला सशक्तिकरण और नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना’ के जमीनी स्तर पर प्रभावी और सफल क्रियान्वयन के लिए जिला पंचायत सरगुजा के सभाकक्ष में एक वृहद एक दिवसीय कार्यशाला सह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत आयोजित किया गया था, जिसमें जिले भर की ग्रामीण महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
इस कार्यशाला की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली बिल और मीटर रीडिंग से जुड़ी जिम्मेदारी संभालने वाली ‘विद्युत सखी दीदियों’ को अब एक नई और बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब ये महिलाएं अपने-अपने क्षेत्रों में ‘सोलर दीदी’ के रूप में पहचानी जाएंगी। प्रशिक्षण के माध्यम से इन महिलाओं को सौर ऊर्जा तकनीकों, ऑनलाइन आवेदन प्रक्रियाओं और हितग्राही चयन के कड़े मापदंडों से पूरी तरह अवगत कराया गया है, जिससे वे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हरित ऊर्जा के इस अभियान को गति दे सकें।
सोलर दीदी के रूप में महिलाओं को मिलेगा स्वरोजगार और आर्थिक संबल
सरगुजा जिले में बिहान योजना के तहत गठित स्व-सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी ये महिलाएं अब केवल घरेलू कामकाज या पारंपरिक रोजगार तक सीमित नहीं रहेंगी। ‘सोलर दीदी’ के रूप में अपनी नई भूमिका में वे प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए एक सेतु का कार्य करेंगी। इस नई प्रशासनिक और सामाजिक पहल से जिले के ग्रामीण अंचलों में सौर ऊर्जा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
यह पहल केवल पर्यावरण संरक्षण या मुफ्त बिजली तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के लिए स्वरोजगार का एक शानदार नया अवसर लेकर आई है। कार्यशाला में आधिकारिक तौर पर घोषणा की गई कि इन सोलर दीदियों को केवल मानद स्वयंसेवक के रूप में काम नहीं करना होगा, बल्कि उनके आर्थिक हितों का भी पूरा ध्यान रखा गया है। प्रत्येक सफल सोलर इंस्टॉलेशन (सौर पैनल स्थापना) पर इन महिलाओं को विभाग की ओर से एक निर्धारित कमीशन प्रदान किया जाएगा। यह कमीशन सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर होगा, जिससे उनकी मासिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और वे अपने परिवारों की आर्थिक रीढ़ बन सकेंगी।
प्रशिक्षण कार्यक्रम: ऑनलाइन प्रणाली और 300 यूनिट का गणित
जिला पंचायत के सभाकक्ष में आयोजित इस गहन प्रशिक्षण सत्र के दौरान उपस्थित महिलाओं को मास्टर ट्रेनर्स और तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा योजना की बारिकियों से रूबरू कराया गया। प्रशिक्षण में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर केंद्रित विस्तृत जानकारी साझा की गई:
सोलर दीदियों के लिए कार्ययोजना और दिशा-निर्देश:
- संपूर्ण आवेदन प्रक्रिया: सोलर दीदियों को सिखाया गया कि किस प्रकार मोबाइल ऐप और आधिकारिक वेब पोर्टल के माध्यम से उपभोक्ताओं का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना है।
- पात्र हितग्राहियों की पहचान: दीदियों को अपने-अपने प्रभार वाले गांवों और कस्बों में जाकर ऐसे परिवारों का सर्वे करने को कहा गया है, जो इस योजना के दायरे में आ सकते हैं।
- 2,000 रुपये का मापदंड: विशेष रूप से उन परिवारों को लक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं, जिनका मासिक बिजली बिल औसतन 2,000 रुपये या उससे अधिक आता है।
- 300 यूनिट मुफ्त बिजली का लक्ष्य: ऐसे परिवार जिनकी मासिक विद्युत खपत 300 यूनिट तक है, उन्हें इस योजना से जोड़कर पूरी तरह से मुफ्त बिजली का लाभ दिलाया जाएगा।
इस डिजिटल प्रशिक्षण के बाद, ये सोलर दीदियां अब ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर न केवल उपभोक्ताओं के दस्तावेजों का सत्यापन करेंगी, बल्कि उनके घरों की छतों (रूफटॉप) की व्यवहार्यता की भी जांच करेंगी ताकि सोलर पैनल बिना किसी तकनीकी बाधा के स्थापित किए जा सकें।
‘लखपति दीदी’ अभियान को मिलेगी नई रफ्तार
कार्यशाला के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य देश के प्रधानमंत्री के विजन ‘लखपति दीदी अभियान’ को गति प्रदान करना है। सरकार का लक्ष्य है कि स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की वार्षिक आय कम से कम एक लाख रुपये या उससे अधिक की जा सके। विद्युत सखियों को सोलर दीदी में अपग्रेड करना इसी रणनीति का एक अहम हिस्सा है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाएं हमेशा से एक महत्वपूर्ण कड़ी रही हैं, लेकिन उन्हें तकनीकी और विपणन (मार्केटिंग) के क्षेत्रों में पर्याप्त अवसर नहीं मिलते थे। इस योजना के माध्यम से जब सोलर दीदियां घर-घर जाकर सौर ऊर्जा के फायदों के बारे में बताएंगी, तो उनका न केवल आत्मविश्वास बढ़ेगा बल्कि समाज में उनका निर्णय लेने का स्तर भी ऊंचा होगा। वे केवल प्रचार-प्रसार नहीं करेंगी, बल्कि उपभोक्ताओं को पारंपरिक और महंगी थर्मल बिजली को छोड़कर स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित (Motivate) भी करेंगी।
कार्यशाला में प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण और संवेदीकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में जिला प्रशासन और विद्युत विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई। अधिकारियों ने महिलाओं का मनोबल बढ़ाया और उन्हें हर संभव तकनीकी व प्रशासनिक सहायता देने का भरोसा दिलाया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित रहे अधिकारीगण:
- श्री मिथलेश पैकरा: अपर परियोजना अधिकारी (एपीओ), जिला पंचायत सरगुजा
- श्रीमती रश्मि तिर्की: सहायक अभियंता (एई), विद्युत विभाग
- श्री नीरज नामदेव: जिला मिशन प्रबंधक (डीएमएम), बिहान योजना
- श्री सुभाष मिश्रा: जिला परियोजना प्रबंधक (डीपीएम), बिहान
- श्री देवेन्द्र सिंह पटेल: परियोजना विशेषज्ञ एवं विभागीय अधिकारी
कार्यक्रम के अंत में, उपस्थित अधिकारियों ने सभी विद्युत सखियों और नव-नामित सोलर दीदियों को किट और मार्गदर्शिका का वितरण किया। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि सरगुजा जिला इस योजना के क्रियान्वयन में पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में एक रोल मॉडल (अनुकरणीय उदाहरण) बनकर उभरेगा, जहां महिलाएं सौर ऊर्जा क्रांति का नेतृत्व कर रही हैं।
कुल मिलाकर, सरगुजा जिला पंचायत की यह कार्यशाला आने वाले दिनों में जिले के ग्रामीण परिदृश्य को बदलने वाली साबित होगी। एक तरफ जहां ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को भारी-भरकम बिजली बिलों से हमेशा के लिए आजादी मिलेगी और 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का सपना साकार होगा; वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण महिलाएं ‘सोलर दीदी’ बनकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिखेंगी। यह कदम पर्यावरण संरक्षण, कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी और जमीनी स्तर पर आर्थिक सुदृढ़ीकरण का एक बेहतरीन उदाहरण है।












