‘Yoga for Healthy Ageing’ थीम पर सरगुजा विश्वविद्यालय में योग दिवस का भव्य आयोजन; NSS स्वयंसेवकों ने लिया हिस्सा






संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा में गरिमापूर्ण ढंग से संपन्न हुआ 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस; कुलपति राजेंद्र लाकपाले ने कहा- तनावमुक्त जीवन का मूल आधार है योग

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संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा में गरिमापूर्ण ढंग से संपन्न हुआ 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस; कुलपति राजेंद्र लाकपाले ने कहा- तनावमुक्त जीवन का मूल आधार है योग

ब्यूरो रिपोर्ट: प्रदेश खबर न्यूज नेटवर्क
स्थान: अम्बिकापुर (सरगुजा), छत्तीसगढ़
दिनांक: 21 जून, 2026

अम्बिकापुर। संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा (अम्बिकापुर) एवं राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के संयुक्त तत्वावधान में 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का भव्य आयोजन अत्यंत उत्साह, कड़े अनुशासन और गरिमापूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। विश्वविद्यालय के सिटी ऑफिस, दर्रीपारा, अम्बिकापुर परिसर में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारियों, प्राध्यापकों, संकायों के कर्मचारियों तथा राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों ने बड़ी संख्या में सक्रिय सहभागिता निभाते हुए समाज को निरोग रहने का संदेश दिया।

वैश्विक थीम “Yoga for Healthy Ageing” पर केंद्रित रहा आयोजन

इस वर्ष का अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस वैश्विक थीम “Yoga for Healthy Ageing” (स्वस्थ उम्र बढ़ाने के लिए योग) पर आधारित रहा। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य न केवल युवाओं को बल्कि समाज के बुजुर्गों और हर आयु वर्ग के लोगों को योग के माध्यम से शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाना था। प्रात:काल से ही विश्वविद्यालय का दर्रीपारा परिसर योगमय नजर आने लगा था, जहाँ श्वेत वस्त्रों में सजे प्रतिभागियों ने पूरी तन्मयता के साथ योग सत्र में हिस्सा लिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. राजेंद्र लाकपाले थे। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती और छत्तीसगढ़ महतारी के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके पश्चात कुलपति एवं अन्य अतिथियों का राष्ट्रीय सेवा योजना के पदाधिकारियों द्वारा औषधीय पौधे एवं सूत की माला भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया।

कुलपति प्रोफेसर डॉ. राजेंद्र लाकपाले का संदेश: योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, संपूर्ण विज्ञान है

अपने मुख्य अतिथि उद्बोधन में कुलपति प्रोफेसर डॉ. राजेंद्र लाकपाले ने योग के दार्शनिक और व्यावहारिक पक्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “योग को केवल शारीरिक व्यायाम या कुछ आसनों तक सीमित मान लेना भूल होगी। योग वास्तव में शरीर, मन और आत्मा को एकाग्र करने वाला एक संपूर्ण विज्ञान है। यह हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति की विश्व को दी गई वह अमूल्य धरोहर है, जिसे आज पूरी दुनिया अकाट्य सत्य के रूप में स्वीकार कर चुकी है।”

वर्तमान समय की व्यस्त और तनावपूर्ण जीवनशैली का जिक्र करते हुए उन्होंने आगे कहा कि आज के दौर में मानसिक अवसाद और शारीरिक बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में योग ही एकमात्र ऐसा साधन है जो बिना किसी खर्च के व्यक्ति को स्वस्थ एवं ऊर्जावान बनाए रख सकता है। इस वर्ष की थीम ‘स्वस्थ उम्र बढ़ाने के लिए योग’ को बेहद प्रासंगिक बताते हुए उन्होंने जोर दिया कि वृद्धावस्था में भी सक्रिय, आत्मनिर्भर और स्वस्थ जीवन जीने के लिए योग को हर नागरिक को अपनी दैनिक दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बनाना ही होगा।

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युवाओं के मानसिक और शारीरिक विकास में योग की भूमिका: कुलसचिव शारदा प्रसाद त्रिपाठी

विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. शारदा प्रसाद त्रिपाठी ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्राध्यापकों, कर्मचारियों और एनएसएस स्वयंसेवकों का स्वागत किया। उन्होंने युवा पीढ़ी, विशेषकर विद्यार्थियों से संवाद करते हुए आह्वान किया कि वे योग को किसी एक दिन के उत्सव के रूप में न लें, बल्कि इसे जीवन का स्थायी अंग बनाएं।

कुलसचिव ने कहा कि आज के विद्यार्थियों पर करियर और पढ़ाई का अत्यधिक मानसिक दबाव रहता है। नियमित योगाभ्यास और प्राणायाम से एकाग्रता बढ़ती है, स्मृति तीक्ष्ण होती है और निर्णय लेने की क्षमता में गुणात्मक सुधार होता है। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक परिसर के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों में भी स्वास्थ्य चेतना का प्रसार कर रहे हैं।

योग विशेषज्ञ ममता तिवारी ने सिखाए योगासन, वैज्ञानिक लाभों से कराया अवगत

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता एवं योग विशेषज्ञ के रूप में आमंत्रित श्रीमती ममता तिवारी ने उपस्थित जनसमुदाय को योग एवं प्राणायाम के वैज्ञानिक और व्यावहारिक लाभों की विस्तृत और प्रामाणिक जानकारी दी। उन्होंने स्वयं मंच से विभिन्न आसनों की सही विधियों और मुद्राओं का सजीव प्रदर्शन किया, जिसका अनुसरण परिसर में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने किया।

उन्होंने सूक्ष्म व्यायाम से शुरुआत करते हुए ग्रीवा चालन, स्कंध संचालन और कटि शक्ति विकासक क्रियाओं का अभ्यास कराया। इसके पश्चात खड़े होकर किए जाने वाले आसनों में ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्तासन और अर्धचक्रासन का अभ्यास कराया गया। बैठकर किए जाने वाले आसनों में भद्रासन, वज्रासन, उष्ट्रासन और शशकासन की सही तकनीकी बारीकियों को समझाया गया।

श्रीमती ममता तिवारी ने बताया कि किस तरह नियमित योगाभ्यास से रक्तचाप नियंत्रित रहता है, रीढ़ की हड्डी लचीली बनती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) का विकास होता है। उन्होंने मानसिक शांति और दीर्घायु प्राप्त करने के लिए प्राणायाम को संजीवनी बूटी के समान बताया।

सामाजिक और स्वास्थ्य चेतना के संवाहक हैं एनएसएस स्वयंसेवक: खेमकरण अहिरवार

राष्ट्रीय सेवा योजना के जिला संगठक खेमकरण अहिरवार ने कार्यक्रम का अत्यंत कुशल संचालन किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में युवाओं के भीतर सामाजिक चेतना के साथ-साथ स्वास्थ्य चेतना विकसित करने में योग की महती भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय सेवा योजना केवल श्रमदान या शिविरों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन स्तर में सुधार करना इसका मूल ध्येय है। हमारे स्वयंसेवक समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों तक योग के इस सकारात्मक और सुधारात्मक संदेश को पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।”

सामूहिक प्राणायाम, सूर्य नमस्कार और आसनों का हुआ अभ्यास

योग प्रशिक्षकों और विशेषज्ञ के सीधे मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय परिवार ने सामूहिक रूप से आयुष मंत्रालय द्वारा निर्धारित कॉमन योग प्रोटोकॉल के तहत अभ्यास किया। आसनों के उपरांत प्राणायाम के सत्र में कपालभाति, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और शीतली प्राणायाम का अभ्यास किया गया। अंत में ध्यान (मेडिटेशन) के माध्यम से सभी प्रतिभागियों ने मानसिक शून्यता और शांति का अनुभव किया। पूरे परिसर का वातावरण ‘ॐ’ की ध्वनि और वैदिक प्रार्थनाओं से गुंजायमान रहा।

विश्वविद्यालय परिवार की रही गौरवशाली उपस्थिति

इस ऐतिहासिक और अनुशासित योग शिविर के अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक और प्रशासनिक स्टाफ बड़ी संख्या में मौजूद रहे। कार्यक्रम में मुख्य रूप से निम्नलिखित गणमान्य जनों की सक्रिय उपस्थिति रही:

  • प्रोफेसर रोहिताश देशमुख
  • प्रोफेसर नीरज श्रीवास्तव
  • डॉ. रंजीत हरवंश
  • डॉ. हरिशंकर प्रसाद तोंडे
  • डॉ. रेशम प्रधान
  • डॉ. धीरज कुमार यादव
  • डॉ. अतुल कुमार वर्मा
  • श्री टैमन लाल देवांगन
  • श्री असीम
  • डॉ. समन नारायण उपाध्याय
  • डॉ. किशोर सिंह
  • डॉ. अमृता कुमारी पांडा
  • डॉ. प्रिया रॉय
  • विवेक कृष्णा, चैन सैय, भुवन एवं प्रकाशमणि

इनके अतिरिक्त विश्वविद्यालय के शिक्षण विभागों (UTD) के छात्र-छात्राएं, गैर-शिक्षण स्टाफ और एनएसएस के वरिष्ठ स्वयंसेवकों ने भी पंक्तिबद्ध होकर अनुशासित तरीके से योग क्रियाएं संपन्न कीं।

सामूहिक संकल्प और आभार प्रदर्शन के साथ समापन

कार्यक्रम का विधिवत समापन शांति पाठ के साथ हुआ। उपस्थित समस्त प्रतिभागियों, प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों ने समाज में योग के प्रति निरंतर जागरूकता बढ़ाने, स्वयं रोज योग करने तथा एक स्वस्थ जीवनशैली को सहर्ष अपनाने का सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में राष्ट्रीय सेवा योजना की ओर से जिला संगठक ने गरिमामयी उपस्थिति के लिए कुलपति, कुलसचिव, मुख्य वक्ता, सभी प्राध्यापकों, कर्मचारियों और पत्रकार बंधुओं के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।