साप्ताहिक हिंदू पंचांग
दिनांक: 22 जून 2026 से 28 जून 2026
1. पंचांग क्या है? (विस्तृत परिचय)
सनातन परंपरा में समय की गणना करने की पद्धति को पंचांग कहा जाता है। पंचांग का अर्थ है ‘पांच अंग’। ये पांच अंग मिलकर काल (समय) की प्रत्येक सूक्ष्म इकाई का निर्धारण करते हैं। किसी भी शुभ कार्य, संस्कार, व्रत, और त्योहार को मनाने के लिए पंचांग की गणना अनिवार्य है। ये पांच मुख्य अंग निम्नलिखित हैं:
- तिथि (Tithi): चंद्रमा और सूर्य के बीच की कोणीय दूरी के आधार पर तिथि का निर्धारण होता है। एक पक्ष में 15 तिथियां होती हैं।
- वार (Var): सूर्योदय से लेकर अगले सूर्योदय तक की अवधि को एक वार माना जाता है। सप्ताह में सात वार होते हैं।
- नक्षत्र (Nakshatra): आकाशमंडल को 27 समान भागों में विभाजित किया गया है, जिन्हें नक्षत्र कहते हैं। चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र से गुजरता है।
- योग (Yoga): सूर्य और चंद्रमा के देशांतर के योग से बनने वाली स्थिति को योग कहते हैं। इनकी कुल संख्या 27 है।
- करण (Karana): एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। कुल 11 करण होते हैं, जिनमें 4 स्थिर और 7 चर होते हैं।
2. साप्ताहिक पंचांग: दैनिक विस्तृत विवरण
📅 22 जून 2026, सोमवार (Monday)
- तिथि: शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि दोपहर 03:39 बजे तक, उसके बाद नवमी तिथि प्रारंभ।
- विशेष पर्व: मां धूмаवती जयंती (दस महाविद्याओं में से एक)। आज के दिन गुप्त शक्तियों और तंत्र साधना का विशेष महत्व होता है।
- नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र सुबह 10:22 बजे तक, इसके बाद हस्त नक्षत्र प्रारंभ।
- योग: व्यतिपात योग सुबह 10:31 बजे तक, इसके बाद वरीयान योग।
- करण: बव करण दोपहर 03:39 बजे तक, उसके बाद बालव करण।
- चंद्र राशि: कन्या राशि (दिन-रात)।
- सूर्य राशि: मिथुन राशि।
- सूर्योदय: सुबह 05:24 बजे | सूर्यास्त: शाम 07:22 बजे।
- शुभ मुहूर्त (अभिजित मुहूर्त): सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक।
- अशुब समय (राहुकाल): सुबह 07:15 बजे से सुबह 08:55 बजे तक।
- दिशाशूल: पूर्व दिशा (यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो दर्पण देखकर या दूध पीकर प्रस्थान करें)।
📅 23 जून 2026, मंगलवार (Tuesday)
- तिथि: शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि दोपहर 02:15 बजे तक, उसके बाद दशमी तिथि प्रारंभ।
- विशेष: महेश नवमी / माँ दुर्गा पूजन। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त आराधना से पारिवारिक क्लेश दूर होते हैं।
- नक्षत्र: हस्त नक्षत्र सुबह 09:10 बजे तक, इसके बाद चित्रा नक्षत्र प्रारंभ।
- योग: वरीयान योग सुबह 08:45 बजे तक, इसके बाद परिघ योग।
- करण: कौलव करण दोपहर 02:15 बजे तक, उसके बाद तैतिल करण।
- चंद्र राशि: कन्या राशि रात 09:40 बजे तक, उसके बाद तुला राशि।
- सूर्य राशि: मिथुन राशि।
- सूर्योदय: सुबह 05:25 बजे | सूर्यास्त: शाम 07:22 बजे।
- शुभ मुहूर्त (अभिजित मुहूर्त): सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक।
- अशुभ समय (राहुकाल): दोपहर 03:45 बजे से शाम 05:25 बजे तक।
- दिशाशूल: उत्तर दिशा (गुड़ खाकर यात्रा की शुरुआत करें)।
📅 24 जून 2026, बुधवार (Wednesday)
- तिथि: शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि दोपहर 12:40 बजे तक, उसके बाद एकादशी तिथि प्रारंभ।
- विशेष: गंगा दशहरा (पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन माँ गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था)। पवित्र नदियों में स्नान और दान का महापुण्य काल।
- नक्षत्र: चित्रा नक्षत्र सुबह 07:45 बजे तक, इसके बाद स्वाति नक्षत्र प्रारंभ।
- योग: परिघ योग सुबह 06:30 बजे तक, इसके बाद शिव योग।
- करण: गर करण दोपहर 12:40 बजे तक, उसके बाद वणिज करण।
- चंद्र राशि: तुला राशि (दिन-रात)।
- सूर्य राशि: मिथुन राशि।
- सूर्योदय: सुबह 05:25 बजे | सूर्यास्त: शाम 07:23 बजे।
- शुभ मुहूर्त (अभिजित मुहूर्त): बुधवार को अभिजित मुहूर्त ग्राह्य नहीं माना जाता है।
- अशुभ समय (राहुकाल): दोपहर 12:15 बजे से दोपहर 01:55 बजे तक।
- दिशाशूल: उत्तर दिशा (धनिया खाकर यात्रा करें)।
📅 25 जून 2026, गुरुवार (Thursday)
- तिथि: शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि सुबह 10:55 बजे तक, उसके बाद द्वादशी तिथि प्रारंभ।
- विशेष: निर्जला एकादशी व्रत (भीमसेनी एकादशी)। बिना जल ग्रहण किए रखा जाने वाला यह महाव्रत सभी पापों का नाश करता है और मोक्ष प्रदान करता है।
- नक्षत्र: स्वाति नक्षत्र सुबह 06:10 बजे तक, इसके बाद विशाखा नक्षत्र प्रारंभ।
- योग: शिव योग सुबह 04:10 बजे तक (अगले दिन), इसके बाद सिद्ध योग।
- करण: विष्टि (भद्रा) सुबह 10:55 बजे तक, उसके बाद बव करण।
- चंद्र राशि: तुला राशि रात 11:15 बजे तक, उसके बाद वृश्चिक राशि।
- सूर्य राशि: मिथुन राशि।
- सूर्योदय: सुबह 05:25 बजे | सूर्यास्त: शाम 07:23 बजे।
- शुभ मुहूर्त (अभिजित मुहूर्त): सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक।
- अशुभ समय (राहुकाल): दोपहर 01:55 बजे से दोपहर 03:35 बजे तक।
- दिशाशूल: दक्षिण दिशा (जीरा या दही खाकर यात्रा करें)।
📅 26 जून 2026, शुक्रवार (Friday)
- तिथि: शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि सुबह 09:10 बजे तक, उसके बाद त्रयोदशी तिथि प्रारंभ।
- विशेष: प्रदोष व्रत (शुक्र प्रदोष)। इस दिन संध्याकाल में भगवान भोलेनाथ की पूजा करने से सुख, समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
- नक्षत्र: विशाखा नक्षत्र सुबह 04:30 बजे तक, उसके बाद अनुराधा नक्षत्र।
- योग: सिद्ध योग रात 01:50 बजे तक, इसके बाद साध्य योग।
- करण: बालव करण सुबह 09:10 बजे तक, उसके बाद कौलव करण।
- चंद्र राशि: वृश्चिक राशि (दिन-रात)।
- सूर्य राशि: मिथुन राशि।
- सूर्योदय: सुबह 05:26 बजे | सूर्यास्त: शाम 07:23 बजे।
- शुभ मुहूर्त (अभिजित मुहूर्त): सुबह 11:47 बजे से दोपहर 12:42 बजे तक।
- अशुभ समय (राहुकाल): सुबह 10:35 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक।
- दिशाशूल: पश्चिम दिशा (जौ खाकर यात्रा की शुरुआत करें)।
📅 27 जून 2026, शनिवार (Saturday)
- तिथि: शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि सुबह 07:15 बजे तक, उसके बाद चतुर्दशी तिथि प्रारंभ।
- विशेष: चम्पक चतुर्दशी। भगवान कृष्ण और राधा रानी की विशेष पुष्प पूजा का विधान।
- नक्षत्र: अनुराधा नक्षत्र रात 02:45 बजे तक, उसके बाद ज्येष्ठा नक्षत्र।
- योग: साध्य योग रात 11:20 बजे तक, इसके बाद शुभ योग.
- करण: तैतिल करण सुबह 07:15 बजे तक, उसके बाद गर करण शाम 06:40 बजे तक।
- चंद्र राशि: वृश्चिक राशि (दिन-रात)।
- सूर्य राशि: मिथुन राशि।
- सूर्योदय: सुबह 05:26 बजे | सूर्यास्त: शाम 07:23 बजे।
- शुभ मुहूर्त (अभिजित मुहूर्त): सुबह 11:47 बजे से दोपहर 12:42 बजे तक।
- अशुभ समय (राहुकाल): सुबह 08:55 बजे से सुबह 10:35 बजे तक।
- दिशाशूल: पूर्व दिशा (अदरक या घी खाकर यात्रा करें)।
📅 28 जून 2026, रविवार (Sunday)
- तिथि: शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि सुबह 05:20 बजे तक, उसके बाद पूर्णिमा तिथि प्रारंभ।
- विशेष: ज्येष्ठ पूर्णिमा, पूर्णिमा व्रत, वट सावित्री व्रत (पूर्णिमांत परंपरा के अनुसार)। इस दिन सत्यनारायण कथा और दीपदान का विशेष महत्व है।
- नक्षत्र: ज्येष्ठा नक्षत्र रात 12:55 बजे तक, उसके बाद मूल नक्षत्र प्रारंभ।
- योग: शुभ योग रात 08:50 बजे तक, इसके बाद शुक्ल योग।
- करण: वणिज करण सुबह 05:20 बजे तक, उसके बाद विष्टि (भद्रा) शाम 04:45 बजे तक।
- चंद्र राशि: वृश्चिक राशि रात 12:55 बजे तक, उसके बाद धनु राशि।
- सूर्य राशि: मिथुन राशि।
- सूर्योदय: सुबह 05:27 बजे | सूर्यास्त: शाम 07:23 बजे।
- शुभ मुहूर्त (अभिजित मुहूर्त): सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:43 बजे तक।
- अशुभ समय (राहुकाल): शाम 05:25 बजे से शाम 07:05 बजे तक।
- दिशाशूल: पश्चिम दिशा (पान या दलिया खाकर यात्रा करें)।
3. इस सप्ताह के मुख्य पर्व, व्रत और त्योहार
इस सप्ताह हिंदू धर्म के कई अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र व्रत-त्योहार आ रहे हैं:
- धूमावती जयंती (22 जून): माता पार्वती के उग्र रूप धूमावती की साधना का दिन। यह जीवन से दरिद्रता, रोग और संकटों का नाश करने के लिए उत्तम माना जाता है।
- गंगा दशहरा (24 जून): ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को माँ गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। इस दिन किसी भी पवित्र नदी या घर के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करने से दस प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं।
- निर्जला एकादशी (25 जून): साल की सभी 24 एकादशियों में यह सबसे कठिन और फलदायी मानी जाती है। मान्यता है कि केवल इस एक एकादशी का पूर्ण व्रत रखने से पूरे वर्ष की एकादशियों का पुण्य मिल जाता है।
- ज्येष्ठ पूर्णिमा (28 जून): इस दिन पवित्र जलाशयों में स्नान और दान की परंपरा है। विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए वट वृक्ष (बरगद) की पूजा और परिक्रमा करती हैं।
4. चौघड़िया मुहूर्त तालिका (सप्ताह के श्रेष्ठ समय)
अचानक यात्रा या किसी आवश्यक कार्य के संपादन के लिए चौघड़िया मुहूर्त का उपयोग किया जाता है। दिन के मुख्य शुभ चौघड़िया इस प्रकार हैं:
| वार | मुख्य शुभ चौघड़िया समय (भारतीय मानक समयानुसार) |
|---|---|
| सोमवार | अमृत (सुबह 05:24 – 07:04), शुभ (सुबह 08:44 – 10:24) |
| मंगलवार | लाभ (सुबह 10:24 – 12:04), अमृत (दोपहर 12:04 – 01:44) |
| बुधवार | चर (सुबह 05:25 – 07:05), लाभ (शाम 05:23 – 07:03) |
| गुरुवार | शुभ (सुबह 05:25 – 07:05), अमृत (दोपहर 01:44 – 03:24) |
| शुक्रवार | चर (शाम 05:23 – 07:03), लाभ (सुबह 07:05 – 08:45) |
| शनिवार | शुभ (सुबह 07:05 – 08:45), अमृत (दोपहर 03:24 – 05:04) |
| रविवार | लाभ (सुबह 08:45 – 10:25), शुभ (दोपहर 01:45 – 03:25) |
5. ग्रहों की गोचर स्थिति (Weekly Planetary Transits)
इस सप्ताह मुख्य ग्रहों का गोचर ब्रह्मांड में इस प्रकार रहेगा, जो सभी राशियों को प्रभावित करेगा:
- सूर्य: मिथुन राशि में स्थित रहकर बुधादित्य योग का निर्माण करेंगे।
- चंद्रमा: सप्ताह की शुरुआत कन्या राशि से करेंगे और क्रमशः तुला, वृश्चिक होते हुए धनु राशि में प्रवेश करेंगे।
- मंगल: अपनी उच्च या मित्र राशि में संचरण करते हुए जातकों में पराक्रम और ऊर्जा का संचार करेंगे।
- बुध: मिथुन राशि में स्वग्रही होकर बौद्धिक कार्यों और व्यापार को गति देंगे।
- गुरु (बृहस्पति): वृषभ राशि में रहकर ज्ञान, धन और वैवाहिक जीवन में स्थिरता प्रदान करेंगे।
- शुक्र: मिथुन राशि में सूर्य और बुध के साथ युति करेंगे, जिससे कलात्मक क्षेत्रों में प्रगति होगी।
- शनि: कुंभ राशि में वक्री/मार्गी अवस्था में रहकर न्याय और कर्म के अनुसार फल देंगे।
6. शुभ कार्यों के लिए वर्जित समय (अशुभ काल)
सनातन पद्धति में शुभ कार्यों को शुरू करने से पहले अशुभ काल को टालना अनिवार्य माना गया है:
- राहुकाल: प्रतिदिन लगभग 1.5 घंटे का यह समय राहु ग्रह के प्रभाव में होता है। इस समय कोई भी नया व्यवसाय, गृह प्रवेश, या सोने-चांदी की खरीदारी नहीं करनी चाहिए।
- भद्रा (विष्टि करण): इस सप्ताह 25 जून (सुबह) और 28 जून (दोपहर बाद) भद्रा का साया रहेगा। भद्रा काल में मांगलिक कार्य पूर्णतः वर्जित होते हैं।
- गंडमूल नक्षत्र: 28 जून को रात के समय चंद्रमा के ज्येष्ठा से मूल नक्षत्र में प्रवेश के कारण गंडमूल दोष लगेगा। इस समय जन्मे बच्चों की नक्षत्र शांति पूजा करानी आवश्यक होती है।
💡 पंचांग के अनुसार अचूक उपाय और जीवन प्रबंधन
- दरिद्रता नाश के लिए: 22 जून (धूमावती जयंती) के दिन काले तिल और कपूर का दान करें।
- पुण्य अर्जन के लिए: 24 जून (गंगा दशहरा) को मिट्टी के घड़े में पानी भरकर, उसमें थोड़ा गंगाजल और चीनी मिलाकर किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान करें।
- मानसिक शांति के लिए: चूंकि चंद्रमा सप्ताह के मध्य में वृश्चिक (नीच राशि) में गोचर करेगा, इसलिए प्रतिदिन “ॐ नमः शिवाय” का जप करें और शिवलिंग पर कच्चा दूध अर्पित करें।









