कृषक कल्याण वर्ष 2026: MP के 13 जिलों में सिंचाई परियोजनाओं का होगा लोकार्पण, सीएम मोहन यादव ने दिए निर्देश






कृषक कल्याण वर्ष 2026: मध्य प्रदेश के 13 जिलों में सिंचाई परियोजनाओं का होगा लोकार्पण, सीएम मोहन यादव ने दिए निर्देश

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कृषक कल्याण वर्ष में सिंचाई का महा-विस्तार: मध्य प्रदेश के 13 जिलों में पूरी हुईं सिंचाई परियोजनाएं, आगामी 6 माह में 6 लाख हेक्टेयर में पहुंचेगा पानी

प्रदेश खबर नेटवर्क | अपडेटेड: जून 26, 2026

भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाए जाने के संकल्प के साथ ही प्रदेश में खेती-किसानी को समृद्ध बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कृषक कल्याण वर्ष में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। राज्य के 13 प्रमुख जिलों में जिन सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुके हैं, उनके भव्य लोकार्पण की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। आगामी 6 महीनों के भीतर इन सभी परियोजनाओं को जनता को समर्पित कर दिया जाएगा, जिससे राज्य के लगभग 6 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का सीधा विस्तार होगा।

मुख्य बिंदु: मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभागों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें अधोसंरचना विकास और नदी-जोड़ो अभियानों को समय सीमा में पूरा करने का खाका खींचा गया।

इन 13 जिलों के किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

समीक्षा बैठक में दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कृषक कल्याण वर्ष के तहत तैयार की गई सिंचाई परियोजनाओं से प्रदेश के मालवा, निमाड़, महाकौशल और बुंदेलखंड समेत कई अंचलों के किसानों की तकदीर बदलेगी। जिन 13 जिलों की सिंचाई परियोजनाओं का लोकार्पण होने जा रहा है, उनकी सूची इस प्रकार है:

  • मालवा-निमाड़ अंचल: बड़वानी, शाजापुर, देवास, झाबुआ, धार, खण्डवा, खरगोन और आलीराजपुर
  • मध्य और भोपाल अंचल: सीहोर और राजगढ़
  • महाकौशल अंचल: जबलपुर, कटनी और मण्डला

स्लीमानाबाद टनल का काम पूरा, उद्घाटन की तैयारी तेज

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नर्मदा की अमृत धारा को सोन नदी से जोड़ने वाली प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी और बहुप्रतीक्षित स्लीमानाबाद टनल के उद्घाटन के लिए आवश्यक तैयारियां युद्ध स्तर पर पूरी करने के निर्देश दिए हैं। बरगी व्यपवर्तन परियोजना के अंतर्गत जबलपुर स्थित बरगी बांध से निकलने वाली यह ट्रांस-वैली केनाल प्रदेश की सबसे बड़ी नहर प्रणाली का हिस्सा है।

स्लीमानाबाद टनल की तकनीकी विशेषताएं और प्रभाव:

  • डिस्चार्ज कैपेसिटी: इस मुख्य नहर की क्षमता प्रदेश में सबसे ज्यादा 227 क्यूमेक (डिस्चार्ज केअरिंग कैपेसिटी) है।
  • सिंचाई का वरदान: इस टनल के माध्यम से जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, रीवा और पन्ना जिलों के लगभग 1500 गांवों की करीब 2.5 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी।
  • लंबाई और क्षमता: दायीं तट मुख्य नहर के किलोमीटर 104 से 116 के बीच निर्मित इस टनल की कुल लंबाई 11.952 किलोमीटर है और इसकी जल प्रवाह क्षमता 152 क्यूमेक है।
  • व्यास (डायमीटर): टनल का व्यास 10.140 मीटर है, जिसका निर्माण कार्य पिछले लगभग डेढ़ दशक से चल रहा था और अब यह अंतिम चरण में पूर्ण हो चुका है।

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सिंहस्थ की तैयारियों को गति: 3 बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा

उज्जैन में आगामी सिंहस्थ के भव्य आयोजन को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने जल संसाधन विभाग की 3 महत्वपूर्ण परियोजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की:

परियोजना का नाम कार्य की वर्तमान प्रगति (%) मुख्य उद्देश्य / लाभ
सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना 82% कार्य पूर्ण जल संवर्धन और क्षेत्रीय जलापूर्ति सुदृढ़ीकरण
कान्ह डायवर्सन क्लोज्ड डक्ट परियोजना 66% प्रगति क्षिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त रखना और शुद्ध प्रवाह सुनिश्चित करना
क्षिप्रा तट घाट निर्माण (29 किमी) 60% प्रगति सिंहस्थ में करोड़ों श्रद्धालुओं के सुविधाजनक एवं सुरक्षित पुण्य स्नान हेतु आधुनिक घाटों का निर्माण

केन-मंदाकिनी लिंक अंतर प्रांतीय परियोजना: दिल्ली भेजा गया प्रस्ताव

बैठक में यह महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई कि केन-मंदाकिनी लिंक अंतर प्रांतीय सिंचाई परियोजना का विस्तृत प्रस्ताव भारत सरकार (केंद्र सरकार) को मंजूरी के लिए प्रेषित कर दिया गया है।

  • कुल अनुमानित लागत: 8,400 करोड़ रुपए से अधिक।
  • सिंचाई क्षमता: इस अंतर्राज्यीय परियोजना के लागू होने से 93 हजार 310 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता का विकास होगा।
  • विद्युत उत्पादन: परियोजना के माध्यम से 15.8 मेगावाट स्वच्छ जल-विद्युत का उत्पादन किया जा सकेगा।
  • विशेष अधोसंरचना: इस जटिल और आधुनिक परियोजना के अंतर्गत 20 किलोमीटर लंबी जल परिवहन टनल का निर्माण भी शामिल है।

केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चम्बल परियोजनाओं का बड़ा अपडेट

बुंदेलखंड और चंबल-मालवा क्षेत्रों के कायाकल्प के लिए चल रही बड़ी नदी-जोड़ो परियोजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई:

1. केन-बेतवा अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना: इस ऐतिहासिक परियोजना के माध्यम से बुंदेलखंड क्षेत्र के 10 जिलों में सालाना 8.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुनिश्चित होगी, साथ ही 130 मेगावाट पनबिजली का उत्पादन होगा। भू-अर्जन, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन के लिए विशेष पैकेज के तहत अवार्ड पारित कर प्रभावितों को 90 प्रतिशत से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। इसके साथ ही बीना कॉम्प्लेक्स बहुउद्देश्यीय परियोजना के तहत चकरपुर एवं मड़िया बांध का निर्माण कार्य शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है।

2. संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चम्बल परियोजना: इस अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना के जरिए मध्य प्रदेश के 13 जिलों के 6.16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सर्वसुलभ सिंचाई सुविधा प्रदान की जाएगी।

कारम बांध का पुनर्निर्माण पूरा, छिंदवाड़ा कॉम्प्लेक्स की समीक्षा

वर्ष 2022 में अप्रत्याशित रूप से क्षतिग्रस्त हुए धार जिले के प्रसिद्ध कारम बांध का पुनर्निर्माण कार्य, जो वर्ष 2024 में शुरू किया गया था, अब लगभग पूरी तरह से मुकम्मल हो चुका है। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चतुर्थ बांध परियोजना (छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्प्लेक्स) सहित राज्य की अन्य सभी लंबित और निर्माणाधीन सिंचाई योजनाओं की कार्यवार समीक्षा की और उन्हें समय पर पूरा करने के निर्देश दिए।

मध्य प्रदेश में सिंचित रकबे में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

राज्य सरकार के ठोस प्रयासों से मध्य प्रदेश में सिंचित क्षेत्र का ग्राफ लगातार ऊपर की ओर बढ़ रहा है। गत ढाई वर्षों की अल्पावधि में ही प्रदेश के सिंचाई क्षेत्र में लगभग 10 लाख हेक्टेयर की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

वर्तमान में निर्मित और निर्माणाधीन परियोजनाओं के पूर्ण होने पर निकट भविष्य में प्रदेश का कुल सिंचित क्षेत्र बढ़कर 95.45 लाख हेक्टेयर तक पहुंच जाएगा। इसके अलावा, प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त अन्य नई परियोजनाओं को भी यदि समाहित कर लिया जाए, तो मध्य प्रदेश का कुल संभावित सिंचित रकबा 108 लाख हेक्टेयर के सर्वकालिक उच्च स्तर को छू लेगा।

समीक्षा बैठक में गरिमामयी उपस्थिति: इस महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, मुख्यमंत्री कार्यालय के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, जल संसाधन एवं नर्मदा घाटी विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी सहित संबंधित विभागों के तमाम वरिष्ठ प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारी मौजूद थे।