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ग्वालियर जल संकट: गूगल मैप पर 18+ स्विमिंग पूल लाइव, पर अफसरों को नहीं मिल रहे!






ग्वालियर जल संकट 2026: गूगल मैप पर दर्जनों स्विमिंग पूल, लेकिन अफसरों की आँखों पर पट्टी – विशेष खोजी रिपोर्ट


विशेष खोजी रिपोर्ट (Ground Report)

जल संकट की मार, कमर्शियल मौज अपार: ग्वालियर में गूगल मैप पर दिख रहे 18+ स्विमिंग पूल और वाटर पार्क, पर ‘अंधे’ प्रशासनिक तंत्र को नहीं मिल रहे!

द्वारा: विशेष ब्यूरो, ग्वालियर |
अपडेटेड: जून 2026 |
स्थान: ग्वालियर, मध्य प्रदेश
ग्वालियर। जब पूरा शहर भीषण गर्मी में बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहा है, जब नगर निगम के टैंकरों के पीछे महिलाएं और बच्चे कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं, ठीक उसी वक्त ग्वालियर में रसूख और व्यापार का एक ऐसा खेल चल रहा है जो सीधे तौर पर शहर के भविष्य यानी ‘भूजल’ (Groundwater) की बली चढ़ा रहा है। शहर में बिना किसी वैध अनुमति के धड़ल्ले से 18 से अधिक बड़े कमर्शियल स्विमिंग पूल और वाटर पार्क संचालित हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि ये तमाम लोकेशंस ‘गूगल मैप’ पर एक क्लिक में आम जनता को मिल रहे हैं, लेकिन नगर निगम और जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों को यह दिखाई ही नहीं दे रहे हैं।

तपती धरती, प्यासा ग्वालियर और पानी पर ‘मनोरंजन’ का डाका

ग्वालियर में गर्मी का पारा लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। तिघरा डैम और अन्य पारंपरिक जल स्रोतों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। शहर के कई इलाकों में अल्टरनेट डे (एक दिन छोड़कर) पानी की सप्लाई हो रही है, तो वहीं कई उपनगरीय और नई कॉलोनियों में तो लोग पूरी तरह से निजी वाटर टैंकरों के भरोसे हैं। इस भीषण जल संकट के बीच प्रशासन कागजों पर ‘जल संरक्षण’ की बड़ी-बड़ी चिंताएं जता रहा है, लेकिन हकीकत के धरातल पर उसकी निष्क्रियता डराने वाली है।

शहर के कोने-कोने में, खासकर हाईवे के किनारों, मैरिज गार्डनों, होटलों और निजी क्लबों में बिना किसी वैध एनओसी (No Objection Certificate) और पंजीकरण के स्विमिंग पूल और वाटर पार्क चल रहे हैं। इनमें रोजाना लाखों लीटर पानी सिर्फ इसलिए बहा दिया जाता है ताकि कुछ रसूखदार मोटी कमाई कर सकें और लोग मनोरंजन के नाम पर पानी को बर्बाद कर सकें।

₹50 से ₹100 की टिकट पर भूजल की खुली डकैती

इन अवैध स्विमिंग पूलों में प्रवेश के लिए आम जनता से ₹50 से लेकर ₹100 या उससे अधिक का शुल्क वसूला जा रहा है। रोज़ाना सुबह से लेकर देर शाम तक यहाँ सैकड़ों युवाओं और बच्चों की भीड़ उमड़ती है। हैरानी की बात यह है कि सुरक्षा और रिकॉर्ड के नाम पर महज़ एक रजिस्टर में औपचारिकता के लिए नाम-पता लिख लिया जाता है, बाकि कोई पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था या सरकारी नियमों का पालन यहाँ नहीं होता।

गूगल मैप पर ‘लाइव’ लेकिन प्रशासनिक फाइलों में ‘लापता’

तकनीक के इस दौर में जहाँ पूरी दुनिया एक क्लिक पर सिमट गई है, ग्वालियर का प्रशासनिक तंत्र आज भी शुतुरमुर्ग की तरह रेत में सिर छुपाए बैठा है। यदि आप आज गूगल मैप पर जाकर “Swimming Pools in Gwalior” या “Water Parks near me” सर्च करेंगे, तो आपको 18 से अधिक सक्रिय कमर्शियल पूल्स की पूरी लिस्ट, उनकी तस्वीरें, रिव्यू और लोकेशन मिल जाएगी।

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लेकिन जब इस संबंध में नगर निगम के जलप्रदाय विभाग और खेल अधिकारियों से जानकारी मांगी जाती है, तो उनके पास वैध रूप से पंजीकृत पूलों की संख्या उंगलियों पर गिनने लायक भी नहीं होती। अधिकारियों का यह दावा कि “हमें जानकारी नहीं है कि अवैध पूल कहाँ चल रहे हैं”, यह साफ दर्शाता है कि या तो अधिकारियों की मिलीभगत है या फिर वे जानबूझकर अपनी आंखें मूंद कर बैठे हैं।

पानी की बर्बादी का गणित: एक नजर में

एक औसत आकार के कमर्शियल स्विमिंग पूल को भरने के लिए कितने पानी की आवश्यकता होती है और ग्वालियर में इसके जरिए किस पैमाने पर भूजल का दोहन हो रहा है, उसे इस तालिका से समझा जा सकता है:

पैरामीटर / विवरण अनुमानित आंकड़े (प्रति पूल) कुल अनुमानित बर्बादी (18+ पूल्स में)
एक बार पूल भरने में लगा पानी लगभग 80,000 से 1,50,000 लीटर लगभग 20 से 25 लाख लीटर
दैनिक वाष्पीकरण और स्पिल ओवर लॉस लगभग 3,000 से 5,000 लीटर लगभग 80,000+ लीटर प्रतिदिन
साप्ताहिक पानी का बदलाव (बिना फिल्टरेशन) पूरी क्षमता का 50% से 100% लाखों लीटर प्रति सप्ताह
पानी का मुख्य स्रोत अवैध रूप से स्थापित हाई-पावर बोरवेल भूजल स्तर (Water Table) का भारी पतन
“शहर के कई हिस्सों में ग्राउंड वाटर लेवल 400 से 500 फीट से भी नीचे चला गया है। बोरिंग सूख रहे हैं। ऐसी स्थिति में कमर्शियल उद्देश्यों के लिए बिना अनुमति हजारों-लाखों लीटर भूजल खींचना एक गंभीर पर्यावरणीय अपराध है।”
– जल संरक्षण विशेषज्ञ, ग्वालियर

सुरक्षा और स्वच्छता ताक पर: पिछले हादसों से भी नहीं लिया सबक

यह केवल पानी की बर्बादी का मामला नहीं है, बल्कि यह आम नागरिकों और खासकर बच्चों की जान के साथ सरेआम खिलवाड़ भी है। इन अवैध स्विमिंग पूलों में सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी की जाती है। हाल ही में ग्वालियर के होटलों और पूलों में सुरक्षा खामियों के कारण बच्चों के डूबने और क्लोरीन की अधिक मात्रा के कारण तबीयत बिगड़ने के गंभीर मामले सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक अमला तब तक नहीं जागता जब तक कि कोई बड़ा हादसा न हो जाए।

  • लाइफगार्ड्स का अभाव: अधिकांश निजी पूलों में कोई प्रमाणित लाइफगार्ड (Lifeguard) तैनात नहीं होता।
  • दूषित पानी और केमिकल का खतरा: पानी को बार-बार बदलने के खर्च से बचने के लिए भारी मात्रा में ब्लीचिंग और क्लोरीन का अंधाधुंध इस्तेमाल किया जाता है, जिससे बच्चों को त्वचा और आंखों की बीमारियां हो रही हैं।
  • फिल्टरेशन प्लांट बंद: कई पूलों में फिल्टरेशन प्लांट या तो हैं ही नहीं, या बिजली बचाने के चक्कर में उन्हें चलाया नहीं जाता।

निगमायुक्त की दोटूक: “शीघ्र होगी जांच, खेल और जलप्रदाय अधिकारियों को निर्देश”

इस पूरे मामले की गूंज जब नगर निगम के गलियारों तक पहुंची, तो प्रशासनिक अमले में थोड़ी हलचल जरूर दिखाई दी है। इस संबंध में ग्वालियर नगर निगमायुक्त संघ प्रिय ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि इस तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

निगमायुक्त संघ प्रिय ने आधिकारिक बयान में कहा:

“शहर में जल संकट के समय पानी की एक-एक बूंद की कीमत है। बिना अनुमति और बिना वैध पंजीकरण के चल रहे सभी स्विमिंग पूलों और वाटर पार्कों की शीघ्र ही सघन जांच कराई जाएगी। खेल अधिकारी और जलप्रदाय विभाग के अमले को इसके संबंध में स्पष्ट निर्देश दे दिए गए हैं। जो भी पूल अवैध रूप से भूजल का दोहन करते पाए जाएंगे, उन्हें तुरंत सील किया जाएगा और संचालकों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।”

जनता पूछ रही सवाल: कब थमेगी रसूखदारों की यह ‘पूल पार्टी’?

निगमायुक्त के आश्वासन के बाद अब देखना यह होगा कि क्या जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या फिर हर बार की तरह यह मामला भी केवल ‘जांच के आदेश’ और ‘नोटिस जारी करने’ तक ही सीमित रह जाएगा। ग्वालियर की जनता इस समय पानी के संकट से त्रस्त है। जनता का साफ कहना है कि जब आम आदमी को एक बाल्टी पानी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है, तो रसूखदारों को अपने कमर्शियल स्विमिंग पूलों को भरने के लिए लाखों लीटर पानी की खुली छूट क्यों दी जा रही है?

प्रशासन को चाहिए कि वह तत्काल प्रभाव से एक संयुक्त टीम (नगर निगम, राजस्व और पुलिस) का गठन करे, गूगल मैप पर मौजूद सभी लोकेशंस को वेरिफाई करे और बिना अनुमति चल रहे बोरवेलों और पूल्स को तुरंत बंद कराए। यदि समय रहते इन जल चोरों पर नकेल नहीं कसी गई, तो ग्वालियर आने वाले दिनों में और भी भयानक जल संकट की ओर बढ़ जाएगा।


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