भोपाल के चंदनपुरा में टाइगर का खौफ: मॉर्निंग वॉक पर निकले दंपती के सामने आया बाघ, महिला की सूझबूझ और शोर से टला बड़ा हादसा
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के पॉश और वन क्षेत्र से सटे चंदनपुरा इलाके में शुक्रवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों के सामने अचानक एक पूर्ण विकसित बाघ (टाइगर) आ गया। इस दौरान वहां टहल रहे एक दंपती का सामना बाघ से बेहद करीब से हुआ। संकट के उस क्षण में महिला ने गजब की सूझबूझ दिखाई और जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया। महिला की तेज आवाज सुनकर बाघ रास्ते से हटकर घनी झाड़ियों की तरफ चला गया, जिससे एक बहुत बड़ा हादसा होते-होते टल गया। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम भारी दलबल के साथ मौके पर पहुंची और इलाके की घेराबंदी कर सर्चिंग ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
महिला की आपबीती: “पहले लगा कि कोई आवारा कुत्ता है, जब धारियां देखीं तो थम गईं सांसें”
शुक्रवार की सुबह अन्य दिनों की तरह ही सामान्य थी। चंदनपुरा मार्ग पर कई स्थानीय नागरिक और पर्यावरण प्रेमी सैर कर रहे थे। सुबह करीब 6:30 बजे के आसपास अचानक रास्ते के किनारे लगी जाली के पास एक वन्यजीव की हलचल हुई। मॉर्निंग वॉक पर निकली महिला ने बताया कि वह और उनके पति सड़क पर कुछ दूरी के फासले पर टहल रहे थे।
तभी उनके बिल्कुल नजदीक झाड़ियों से निकलकर एक भारी-भरकम जानवर सामने आ गया। महिला ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया, “सुबह के धुंधलके और सामान्य रोशनी में मुझे पहली नजर में लगा कि कोई बड़ा कुत्ता घूम रहा है। लेकिन जैसे ही वह जानवर सड़क की लाइट और स्पष्ट रोशनी के दायरे में आया, मुझे उसकी पीठ पर साफ तौर पर धारियां दिखाई दीं। वह एक विशाल बाघ था। उसे इतनी नजदीकी पर देखकर मेरी सांसें थम गईं। मेरे पति मुझसे कुछ मीटर आगे चल रहे थे। मैंने अपनी पूरी ताकत से चिल्लाकर उन्हें आवाज दी और शोर मचाना शुरू किया। मेरी चीख सुनकर बाघ कुछ पल के लिए रुका और फिर तुरंत मुड़कर घने जंगलों और झाड़ियों की तरफ लौट गया।”
दहाड़ सुनकर मची भगदड़, लोगों ने सुरक्षित दूरी से बनाए वीडियो
इस सनसनीखेज घटना के दौरान आसपास के क्षेत्र में दर्जनों अन्य लोग भी मॉर्निंग वॉक और साइकिलिंग कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला के चिल्लाने के बाद बाघ के वापस जाने के दौरान कुछ लोगों ने उसकी भारी दहाड़ भी सुनी। रिहायशी इलाके के इतने करीब बाघ की दहाड़ सुनते ही मॉर्निंग वॉक कर रहे नागरिकों में अफरा-तफरी मच गई।
जान बचाने के लिए लोग सुरक्षित स्थानों और अपनी गाड़ियों की तरफ भागने लगे। हालांकि, कुछ युवाओं और साहसी नागरिकों ने सुरक्षित दूरी पर रहते हुए अपने मोबाइल कैमरों से बाघ की चहलकदमी का वीडियो भी रिकॉर्ड किया। वीडियो में बाघ की मजबूत कद-काठी और उसकी सामान्य आवाजाही को देखा जा सकता है, जो बाद में सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल होने लगा।
निजी फार्महाउस की बाउंड्री में दाखिल हुआ बाघ, 9 बजे पहुंची वन विभाग की टीम
चंदनपुरा क्षेत्र के चश्मदीदों ने बताया कि सड़क से हटने के बाद बाघ ने वहां स्थित एक निजी फार्महाउस की ऊंची बाउंड्री वॉल के खुले हिस्से का रुख किया और उसके भीतर दाखिल हो गया। चूंकि चंदनपुरा में कई बड़े फार्महाउस और निजी संपत्तियां हैं, जिनकी सीमाएं सीधे कलियासोत और केरवा के जंगलों से मिलती हैं, इसलिए बाघ को छिपने के लिए वहां पर्याप्त घना कवर मिल गया।
घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने इसकी लिखित और मौखिक सूचना वन विभाग के कंट्रोल रूम को दी। सूचना मिलने के लगभग दो घंटे बाद, सुबह करीब 9:00 बजे वन विभाग की रेस्क्यू और गश्ती टीम पिंजरे, ट्रैकर और आवश्यक सुरक्षा उपकरणों के साथ मौके पर पहुंची। टीम ने तुरंत फार्महाउस और उसके आसपास के पैच को चारों तरफ से घेरकर पगमार्क (बाघ के पैरों के निशान) खंगालने और सर्चिंग का काम शुरू कर दिया है।
वन्यजीव विशेषज्ञ की चेतावनी: टूटती जाली और बढ़ता मानवीय हस्तक्षेप मुख्य कारण
भोपाल के वरिष्ठ वन्यजीव विशेषज्ञ राशिद नूर ने इस पूरी घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसके तकनीकी और पारिस्थितिक कारणों पर प्रकाश डाला है। उन्होंने बताया कि चंदनपुरा और कलियासोत का यह पूरा इलाका बाघों के प्राकृतिक कॉरिडोर (आवाजाही के रास्ते) के बेहद नजदीक है। वन विभाग ने जंगली क्षेत्र और इंसानी आबादी को अलग करने के लिए इलाके में एक बहुत बड़ी और मजबूत लोहे की जाली (Fencing) लगाई हुई है।
विशेषज्ञ राशिद नूर के मुताबिक, “इस सुरक्षा जाली का एक बड़ा हिस्सा पिछले कुछ समय से क्षतिग्रस्त या खुला हुआ है। पूरी संभावना है कि बाघ इसी खुले हुए रास्ते का इस्तेमाल कर बार-बार मुख्य सड़क और फार्महाउसों की तरफ आ रहे हैं।” इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इलाके में वन विभाग की कोई स्थायी गश्ती चौकी या नाका नहीं है, जिसके कारण वन्यजीवों के मूवमेंट पर रियल-टाइम निगरानी नहीं हो पाती। लगातार हो रहे अवैध-वैध निर्माण कार्यों, नए फार्महाउसों के विकास और जंगल के रास्तों के कटने के कारण बाघ मजबूरन इंसानी बस्तियों के मुहाने पर पहुंच रहे हैं। यदि इन गलियारों को सुरक्षित नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में मानव-बाघ संघर्ष (Human-Tiger Conflict) की एक बड़ी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
🚨 वन विभाग की आवश्यक एडवायजरी और अपील:
चंदनपुरा और कलियासोत क्षेत्र में सर्चिंग ऑपरेशन चला रहे वन अधिकारियों ने आम जनता और शहरवासियों से बेहद महत्वपूर्ण अपील की है:
- जब तक वन विभाग का यह विशेष सर्चिंग और ट्रैकिंग अभियान पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, तब तक चंदनपुरा, केरवा डैम रोड और कलियासोत से लगे जंगलों की तरफ जाने से पूरी तरह बचें।
- विशेषकर सुबह (5:00 से 8:00 बजे) और शाम (6:00 बजे के बाद) के समय इन संवेदनशील रास्तों पर मॉर्निंग वॉक, इवनिंग वॉक या साइकिलिंग के लिए बिल्कुल न निकलें।
- यदि किसी भी नागरिक को बाघ या किसी अन्य हिंसक वन्यजीव की हलचल दिखाई देती है, तो उसके करीब जाने या वीडियो बनाने की कोशिश कतई न करें। तुरंत इसकी सूचना वन विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर दें।
फिलहाल, वन विभाग के आला अधिकारी और मैदानी कर्मचारी चंदनपुरा के उस निजी फार्महाउस के आसपास डेरा डाले हुए हैं। थर्मल कैमरों और पगमार्क ट्रैकिंग के जरिए बाघ की सटीक लोकेशन ट्रेस की जा रही है, ताकि उसे बिना किसी नुकसान के सुरक्षित रूप से कोर फॉरेस्ट एरिया (घने जंगल) की ओर खदेड़ा जा सके। प्रशासन ने स्थानीय निवासियों को घरों में रहने और सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
Praveen
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