MP News: CM डॉ. मोहन यादव की अपील- नशामुक्त समाज बनाएं, स्कूलों में चलेगा जागरूकता अभियान






अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस पर सीएम डॉ. मोहन यादव की महा-अपील

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विशेष रिपोर्ट | मध्य प्रदेश

अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस: सीएम डॉ. मोहन यादव ने किया नशामुक्त समाज के निर्माण का आह्वान; स्कूली पाठ्यक्रमों में शामिल होंगे नशे के दुष्प्रभाव

द्वारा: स्टेट ब्यूरो, भोपाल
दिनांक: 26 जून, 2026
समय: 11:30 PM

भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस (International Day Against Drug Abuse) के अवसर पर प्रदेश और देशवासियों को एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील संदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय दिवस हमें आत्म-अवलोकन करने और समाज को अंदर से खोखला कर रही नशे की महामारी के खिलाफ एकजुट होने के लिए जागरूक करता है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे नशे के गंभीर दुष्प्रभावों के प्रति खुद भी सजग रहें और दूसरों को भी सचेत करते हुए एक स्वस्थ, सुरक्षित तथा सशक्त राष्ट्र के संकल्प को साकार करने में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं।

नशे की लत को केवल एक व्यक्ति की व्यक्तिगत समस्या न मानते हुए, सीएम डॉ. मोहन यादव ने इसे पारिवारिक विघटन, सामाजिक पतन और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में रेखांकित किया है। मुख्यमंत्री के इस संदेश के साथ ही मध्य प्रदेश सरकार ने जमीनी स्तर पर बड़े बदलावों की तैयारी शुरू कर दी है, जिसके तहत युवाओं और किशोरों को लक्षित कर कई ऐतिहासिक प्रशासनिक एवं शैक्षणिक निर्णय लिए गए हैं।

“अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस हमें जागरूक करता है कि नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सजग करते हुए नशामुक्त समाज के निर्माण में योगदान दें और स्वस्थ, सुरक्षित एवं सशक्त राष्ट्र के संकल्प को साकार करने में अपनी भागीदारी निभाएं।”

— डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश

सीएम डॉ. मोहन यादव का बड़ा फैसला: स्कूली और कॉलेज पाठ्यक्रमों में शामिल होगी जागरूकता सामग्री

अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में उन्होंने एक दूरगामी और ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए निर्देश दिए कि नशे के विरूद्ध वातावरण बनाने के उद्देश्य से स्कूली और महाविद्यालयीन स्तरों (Schools and Colleges) के पाठ्यक्रमों में नशे के दुष्प्रभावों पर केंद्रित विशेष अध्ययन सामग्री शामिल की जाए।

मुख्यमंत्री का मानना है कि किशोरों और युवाओं को सही उम्र में सही जानकारी देना सबसे अधिक प्रभावी साबित होता है। जब बच्चे अपनी पाठ्यपुस्तकों में पढ़ेंगे कि किस प्रकार मादक पदार्थ उनके मस्तिष्क, करियर और परिवार को तबाह कर सकते हैं, तो उनमें आंतरिक प्रतिरोध क्षमता (Internal Resistance) विकसित होगी।

समन्वित रणनीति से काम करेंगे सभी विभाग

बैठक के दौरान डॉ. यादव ने नशामुक्ति अभियान को किसी एक विभाग की जिम्मेदारी मानने से इनकार किया। उन्होंने गृह विभाग, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग और सामाजिक न्याय विभाग को एक संयुक्त और समन्वित तंत्र (Coordinated Mechanism) बनाकर काम करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस जहां एक तरफ ड्रग माफिया और अवैध नशीले पदार्थों के नेटवर्क पर कड़ा प्रहार करेगी, वहीं सामाजिक न्याय और स्वास्थ्य विभाग मिलकर नशे की लत से पीड़ित लोगों के पुनर्वास और उपचार की व्यवस्था को सुदृढ़ करेंगे।

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मध्य प्रदेश में ‘नशामुक्त भारत अभियान’ की वर्तमान स्थिति और सरकारी आंकड़े

मध्य प्रदेश में केंद्र सरकार के सहयोग से ‘नशामुक्त भारत अभियान’ को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकारी समीक्षा बैठक में साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने के लिए जमीनी स्तर पर एक मजबूत कार्यबल तैयार किया गया है।

अभियान/गतिविधि का नाम वर्तमान प्रगति / आंकड़े (वर्ष 2025-2026) मुख्य उद्देश्य व प्रभाव
सक्रिय वॉलिंटियर्स का नेटवर्क 12,000 से अधिक पंजीकृत वॉलिंटियर्स गांव-गांव और शहरों के वार्डों में जाकर जनसामान्य को नशे के खिलाफ जागरूक करना।
शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता 168 स्मार्ट क्लासेस (विशेष विद्यालयों में) डिजिटल माध्यम से बच्चों को संवेदनशीलता और नशे के खतरों के प्रति शिक्षित करना।
पुनर्वास एवं उपचार केंद्र प्रदेश के समस्त जिलों में विस्तारित नशे की गिरफ्त में आ चुके युवाओं की काउंसलिंग और उनकी मुख्यधारा में वापसी।
‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान राज्यव्यापी हस्ताक्षर एवं शपथ अभियान युवाओं को सीधे तौर पर संकल्प पत्र के माध्यम से अभियान से जोड़ना।

नशे के बहुआयामी दुष्प्रभाव: समाज और राष्ट्र पर संकट

चिकित्सकीय और सामाजिक विशेषज्ञों के अनुसार, मादक पदार्थों का सेवन केवल एक शारीरिक बीमारी नहीं है, बल्कि यह एक बहुआयामी संकट है जो समाज के हर स्तंभ को कमजोर करता है। मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप, इस समस्या को निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं के आधार पर समझा जा सकता है:

  • शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का क्षरण: सिंथेटिक ड्रग्स, गांजा, अफीम, अत्यधिक शराब और अन्य नशीली दवाएं सीधे तौर पर मानव के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System), यकृत (Liver), फेफड़ों और हृदय को स्थायी रूप से नष्ट कर देती हैं। इसके कारण युवाओं में डिप्रेशन, गंभीर चिंता (Anxiety) और आत्मघाती प्रवृत्तियां तेजी से बढ़ रही हैं।
  • आर्थिक तबाही और पारिवारिक विघटन: नशे का आदी व्यक्ति अपनी इस लत को पूरा करने के लिए घर की आर्थिक स्थिति को दांव पर लगा देता है। इससे परिवारों में घरेलू हिंसा, तलाक और बच्चों के भविष्य की अनदेखी जैसी गंभीर सामाजिक विसंगतियां पैदा होती हैं।
  • अपराध दर में वृद्धि: आंकड़ों से पता चलता है कि समाज में होने वाली अधिकांश चोरी, डकैती, सड़क दुर्घटनाएं और जघन्य अपराध कहीं न कहीं नशे की स्थिति में या नशे की सामग्री खरीदने के लिए पैसे जुटाने के प्रयास में किए जाते हैं।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा और जनसांख्यिकीय लाभांश को खतरा: भारत विश्व का सबसे युवा देश है। हमारी यह ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ (Demographic Dividend) तभी देश के काम आएगी जब हमारे युवा स्वस्थ और कुशल होंगे। यदि हमारी युवा ऊर्जा नशे की गर्त में समा जाएगी, तो एक सुरक्षित और सशक्त राष्ट्र का सपना कभी साकार नहीं हो सकेगा।

अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस का इतिहास और इसका वैश्विक महत्व

वैश्विक स्तर पर नशीली दवाओं के दुरुपयोग और इसके अवैध व्यापार के खिलाफ एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए हर साल 26 जून को ‘International Day Against Drug Abuse and Illicit Trafficking’ (अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध और अवैध तस्करी विरोधी दिवस) मनाया जाता है।

इस दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) द्वारा 7 सितंबर 1987 को पारित किए गए एक विशेष प्रस्ताव के माध्यम से हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय समाज का निर्माण करना था जो नशीली दवाओं के दुरुपयोग से पूरी तरह मुक्त हो। इसके बाद, पहली बार 26 जून 1989 को यह दिवस आधिकारिक तौर पर दुनिया भर में मनाया गया। तब से लेकर आज तक, प्रतिवर्ष यह दिन वैश्विक सरकारों, एनजीओ और नागरिक समाजों को अपनी नीतियों की समीक्षा करने और नए कड़े कदम उठाने के लिए प्रेरित करता है।

स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त मध्य प्रदेश के लिए नागरिक कर्तव्य

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संदेश के अंत में इस बात पर विशेष बल दिया कि सरकार अकेले कानून के बल पर नशामुक्त समाज का निर्माण नहीं कर सकती। इसके लिए एक व्यापक सामाजिक चेतना और जन-भागीदारी (Public Participation) की नितांत आवश्यकता है।

उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों के बदलते व्यवहार पर नजर रखें, उनके साथ मित्रवत व्यवहार करें और यदि उनमें किसी भी प्रकार के तनाव या नशे के लक्षण दिखाई दें, तो बिना किसी सामाजिक संकोच के तुरंत विशेषज्ञों और सरकारी परामर्श केंद्रों की मदद लें। मध्य प्रदेश सरकार प्रत्येक नागरिक को यह विश्वास दिलाती है कि नशे के खिलाफ इस महा-अभियान में राज्य का प्रशासनिक अमला हर कदम पर उनके साथ खड़ा है।

आइए, अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस के इस पावन अवसर पर हम सब मिलकर यह प्रतिज्ञा लें कि न केवल स्वयं मादक पदार्थों से दूर रहेंगे, बल्कि अपने आसपास के परिवेश को भी नशामुक्त बनाकर एक स्वस्थ, सुरक्षित, आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएंगे।