डायल-112 हीरोज: नरसिंहपुर के करेली में पुलिस जवानों की संवेदनशीलता, सड़क हादसे में घायल तीन लोगों को दिया जीवनदान
नरसिंहपुर जिले के करेली थाना क्षेत्र से इंसानियत और पुलिस की तत्परता की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आपातकालीन परिस्थितियों में ‘डायल-112’ सेवा आम जनता के लिए किसी फरिश्ते से कम नहीं है। 26 जून को एक भीषण सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल एक महिला और दो पुरुषों को डायल-112 के सजग जवानों ने न केवल मौके पर पहुंचकर संभाला, बल्कि ‘गोल्डन ऑवर’ (दुर्घटना के बाद का पहला अनमोल घंटा) के भीतर अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान सुरक्षित की।
घटना का पूरा विवरण: नरसिंहपुर-करेली मार्ग पर हुआ हादसा
घटना 26 जून की है। रोज़मर्रा की तरह नरसिंहपुर–करेली मार्ग पर वाहनों की आवाजाही जारी थी। इसी दौरान थाना करेली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कठौतिया गांव के पास एक तेज रफ्तार अज्ञात फोर व्हीलर (चार पहिया वाहन) ने एक मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि मोटरसाइकिल पर सवार तीनों लोग—जिनमें एक महिला और दो पुरुष शामिल थे—सड़क पर दूर जा गिरे।
अज्ञात वाहन चालक टक्कर मारने के बाद मौके से तेजी से फरार हो गया। दुर्घटना के तुरंत बाद आसपास के क्षेत्र में चीख-पुकार मच गई। तीनों घायल सड़क पर लहूलुहान अवस्था में पड़े थे और उन्हें तत्काल चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता थी। ग्रामीण और राहगीर मौके पर एकत्र तो हुए, लेकिन गंभीर चोटों को देखते हुए हर कोई तुरंत कदम उठाने में झिझक रहा था। ऐसे समय में किसी सजग नागरिक ने तुरंत अपने मोबाइल से मध्यप्रदेश पुलिस के आपातकालीन नंबर पर कॉल किया।
भोपाल कंट्रोल रूम से नरसिंहपुर की सड़कों तक: मिनटों का लाइव एक्शन
जैसे ही नागरिक का कॉल भोपाल स्थित राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 में गूंजा, वहां तैनात कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के ऑपरेटर तुरंत एक्टिव मोड में आ गए। सूचना मिलते ही कि “थाना करेली क्षेत्र के कठौतिया के पास अज्ञात वाहन की टक्कर से एक महिला और दो पुरुष गंभीर रूप से घायल हैं और तड़प रहे हैं”, भोपाल कंट्रोल रूम ने बिना एक सेकंड गंवाए जीपीएस (Global Positioning System) ट्रैकर के जरिए घटनास्थल के सबसे नजदीक मौजूद एफआरव्ही (First Response Vehicle) को लोकेट किया।
भोपाल से नरसिंहपुर जिले के करेली थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना होने के निर्देश (डिस्पैच) जारी किए गए। वायरलेस सेट पर सूचना मिलते ही करेली क्षेत्र में तैनात डायल-112 का स्टाफ अलर्ट हो गया।
सराहनीय भूमिका: ये हैं हमारे डायल-112 के असली हीरोज
- आरक्षक (कॉन्स्टेबल): श्री सोहेब खान (थाना करेली, नरसिंहपुर पुलिस)
- पायलट (चालक): श्री बिष्णु नेमा
- मिशन: सड़क हादसे के शिकार तीन नागरिकों को ‘गोल्डन ऑवर’ में जीवनदान देना।
जांबाजों की जांबाजी: मौके पर प्राथमिक उपचार और त्वरित निर्णय
सूचना मिलने के महज कुछ ही मिनटों के भीतर आरक्षक श्री सोहेब खान और पायलट श्री बिष्णु नेमा अपनी एफआरव्ही गाड़ी सायरन बजाते हुए घटनास्थल पर पहुंच गए। मौके पर स्थिति अत्यंत संवेदनशील थी। तीनों घायल दर्द से कराह रहे थे और अत्यधिक रक्तस्राव (Bleeding) के कारण उनकी हालत लगातार बिगड़ रही थी। एम्बुलेंस का इंतजार करने में समय लग सकता था, जो इन घायलों के लिए जानलेवा साबित हो सकता था।
यहाँ पर आरक्षक सोहेब खान और पायलट बिष्णु नेमा ने अद्भुत प्रशासनिक सूझबूझ और मानवीय संवेदनशीलता का परिचय दिया। उन्होंने समय न गंवाते हुए तुरंत राहगीरों की मदद से तीनों घायलों को उठाया। मौके पर ही उन्हें जो संभव प्राथमिक सहायता (First Aid) दी जा सकती थी, वह प्रदान की गई ताकि खून का बहना कम हो सके। इसके बाद, उन्होंने घायलों को अपनी ही डायल-112 एफआरव्ही गाड़ी में सुरक्षित रूप से बैठाया और लिटाया।
पायलट बिष्णु नेमा ने अत्यंत कुशलता से गाड़ी चलाते हुए बिना समय गंवाए नरसिंहपुर जिला चिकित्सालय की ओर रुख किया। आरक्षक सोहेब खान रास्ते भर घायलों को ढांढस बंधाते रहे और जिला अस्पताल के डॉक्टरों को भी अग्रिम रूप से सूचित किया गया ताकि मरीज के पहुंचते ही इलाज शुरू हो सके।
– श्री सोहेब खान, आरक्षक, डायल-112 (थाना करेली)
जिला अस्पताल नरसिंहपुर में समय पर मिला उपचार
डायल-112 वाहन के जिला चिकित्सालय, नरसिंहपुर पहुंचते ही वहां तैनात मेडिकल स्टाफ तुरंत हरकत में आ गया। चूंकि पुलिस कर्मियों ने पहले ही स्थिति से अवगत करा दिया था, इसलिए डॉक्टरों की टीम इमरजेंसी वार्ड में तैयार थी। घायलों को तुरंत स्ट्रेचर के माध्यम से अंदर ले जाया गया और उनका सघन उपचार (Intensive Treatment) शुरू किया गया।
चिकित्सकों के अनुसार, यदि घायलों को अस्पताल लाने में थोड़ी भी और देरी हो जाती, तो अत्यधिक खून बह जाने के कारण स्थिति बेहद नाजुक और जानलेवा हो सकती थी। डायल-112 की इस त्वरित और समर्पित कार्रवाई के कारण ही तीनों घायलों को समय पर चिकित्सा मिल सकी, जिससे अब उनकी हालत स्थिर और खतरे से बाहर बताई जा रही है। घायलों के परिजनों ने अस्पताल पहुंचकर मध्यप्रदेश पुलिस और विशेष रूप से डायल-112 के दोनों जवानों का हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया है।
‘डायल-112 हीरोज’ श्रृंखला: खाकी के मानवीय चेहरे की अनकही कहानियां
मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय द्वारा संचालित ‘डायल-112 हीरोज’ श्रृंखला का उद्देश्य पुलिस के इसी मानवीय, संवेदनशील और रक्षक वाले स्वरूप को जनता के सामने लाना है। अक्सर फिल्मों या आम चर्चाओं में पुलिस की एक सख्त और नकारात्मक छवि पेश की जाती है, लेकिन हकीकत में जमीन पर काम करने वाले आरक्षक और पायलट अपनी जान जोखिम में डालकर चौबीसों घंटे नागरिकों की सुरक्षा और सेवा में तत्पर रहते हैं।
कठौतिया (करेली) की यह घटना ‘डायल-112 हीरोज’ श्रृंखला में एक स्वर्णिम अध्याय की तरह जुड़ गई है। यह घटना दर्शाती है कि आपात परिस्थितियों में त्वरित राहत, चिकित्सा सहायता एवं मानवीय सहयोग प्रदान करने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा सदैव सजग, संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।
मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा: एक नजर में
मध्यप्रदेश में पहले पुलिस सहायता के लिए 100 नंबर, एम्बुलेंस के लिए 108 और फायर ब्रिगेड के लिए 101 जैसे अलग-अलग नंबर हुआ करते थे। लेकिन भारत सरकार की ‘एक राष्ट्र, एक आपातकालीन नंबर’ (ERSS – Emergency Response Support System) की परिकल्पना के तहत मध्यप्रदेश में भी डायल-112 सेवा को एकीकृत और अत्याधुनिक बनाया गया है। अब नागरिक किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में सिर्फ 112 डायल कर पुलिस, फायर और मेडिकल सहायता एक साथ पा सकते हैं।
डायल-112 की कार्यप्रणाली कैसे काम करती है?
जब कोई पीड़ित या चश्मदीद 112 नंबर पर कॉल करता है, तो प्रक्रिया कुछ इस प्रकार चरणों में पूरी होती है:
- कॉल रिसीविंग (भोपाल सेंट्रलाइज्ड कमांड सेंटर): राज्य के किसी भी कोने से किया गया कॉल सीधे भोपाल स्थित अत्याधुनिक कंट्रोल रूम में लैंड करता है।
- लोकेशन ट्रैकिंग: एडवांस्ड मैपिंग सॉफ्टवेयर के जरिए कॉल करने वाले की सटीक लोकेशन का पता लगाया जाता है।
- डिस्पैचिंग: कंप्यूटर एडेड डिस्पैच (CAD) सिस्टम के माध्यम से संबंधित जिले के उस थाना क्षेत्र में तैनात सबसे नजदीकी एफआरव्ही (FRV) गाड़ी को डिजिटल रूप से घटना की जानकारी और लोकेशन भेजी जाती है।
- एक्शन (ऑन-स्पॉट रिस्पॉन्स): गाड़ी में मौजूद पुलिस स्टाफ मोबाइल डेटा टर्मिनल (MDT) के जरिए रूट मैप देखते हुए कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंच जाता है।
सड़क दुर्घटनाओं में ‘गोल्डन ऑवर’ का महत्व और पुलिस की भूमिका
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी सड़क हादसे के बाद का पहला 1 घंटा ‘गोल्डन ऑवर’ कहलाता है। इस एक घंटे के भीतर यदि घायल व्यक्ति को प्राथमिक उपचार मिलकर अस्पताल में डॉक्टरों की देखरेख मिल जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना 80 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।
नरसिंहपुर के इस मामले में आरक्षक सोहेब खान और पायलट बिष्णु नेमा ने इसी ‘गोल्डन ऑवर’ के सिद्धांत का पालन किया। उन्होंने औपचारिकताओं या एम्बुलेंस के इंतजार में वक्त बर्बाद न करते हुए अपनी गाड़ी को ही जीवन रक्षक वाहन बना दिया। मध्यप्रदेश पुलिस अपने जवानों को इसके लिए विशेष रूप से ‘फर्स्ट रेस्पॉन्डर’ की ट्रेनिंग भी दे रही है, ताकि वे दुर्घटनास्थल पर प्राथमिक चिकित्सा दे सकें।
जनता से अपील: संकट के समय घबराएं नहीं, डायल-112 पर भरोसा करें
नरसिंहपुर पुलिस और पुलिस मुख्यालय भोपाल ने इस सफल रेस्क्यू के बाद आम जनता से अपील की है कि वे सड़क दुर्घटनाओं को देखकर मूकदर्शक न बनें। केंद्र सरकार के ‘गुड समैरिटन’ (नेक फरिश्ता) कानून के तहत अब किसी भी सड़क दुर्घटना में घायलों की मदद करने वाले नागरिक को पुलिस या कोर्ट के चक्कर काटने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और न ही अस्पताल उनसे जबरन पैसे मांग सकता है।
यदि आप मध्यप्रदेश में कहीं भी किसी को संकट में देखते हैं—चाहे वह सड़क दुर्घटना हो, घरेलू हिंसा हो, चोरी-डकैती हो या कोई अन्य आपात स्थिति—बिना डरे तुरंत 112 नंबर पर कॉल करें। आपकी एक सजगता और पुलिस की तत्परता मिलकर किसी का उजड़ता हुआ परिवार बचा सकती है।
निष्कर्ष: सजगता और सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण
नरसिंहपुर के थाना करेली क्षेत्र की यह घटना केवल एक समाचार नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज और व्यवस्था के बीच बढ़ते विश्वास का प्रतीक है। आरक्षक श्री सोहेब खान और पायलट श्री बिष्णु नेमा जैसे जमीनी नायकों की बदौलत ही आज आम नागरिक आधी रात को भी सड़कों पर खुद को सुरक्षित महसूस करता है। मध्यप्रदेश पुलिस की यह सजगता, संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता वास्तव में वंदनीय है। ‘डायल-112 हीरोज’ के इन जवानों को पूरे प्रदेश की जनता सलाम करती है।











