सशक्त उद्यमी, समृद्ध मध्यप्रदेश: विश्व एमएसएमई दिवस पर सीएम मोहन यादव ने उद्योग क्षेत्र को दी ₹1500 करोड़ की सौगात






सशक्त उद्यमी, समृद्ध मध्यप्रदेश: विश्व एमएसएमई दिवस पर सीएम मोहन यादव ने बांटे ₹1500 करोड़, 2027 में भोपाल में होगी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट

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सशक्त उद्यमी, समृद्ध मध्यप्रदेश: विश्व एमएसएमई दिवस पर सीएम मोहन यादव ने उद्योग क्षेत्र को दी ₹1500 करोड़ की सौगात, वर्ष 2027 में भोपाल में होगी ‘ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट’

भोपाल: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के मामले में मध्यप्रदेश पूरे देश में सबसे आगे है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश का एमएसएमई (MSME) सेक्टर भारत को वैश्विक स्तर पर एक ‘ग्लोबल चैम्पियन’ के रूप में स्थापित कर रहा है। उद्योग और व्यवसाय केवल धन कमाने का जरिया नहीं हैं, बल्कि ये समाज के दूसरे लोगों के जीवन को सुखद और सुगम बनाने का एक पवित्र माध्यम हैं। हमारे देश के उद्यमी कर्म को ही पूजा और श्रम को ही वास्तविक साधना मानते हैं। आने वाले समय में देश के विकास में औद्योगिक क्षेत्र की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने जा रही है, जिससे विकास और समृद्धि का एक नया सूरज निकलेगा।

मुख्यमंत्री मोहन यादव शनिवार को राजधानी भोपाल के रवीन्द्र भवन में आयोजित “विश्व एमएसएमई दिवस” के अवसर पर “सशक्त उद्यमी : समृद्ध मध्यप्रदेश” समिट को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस भव्य राज्य स्तरीय समारोह में उन्होंने प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य को बदलने के लिए कई बड़ी घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने एलान किया कि भोपाल में आगामी वर्ष 2027 में ‘ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट’ (Global Investors Summit) का विशाल आयोजन किया जाएगा। इस ऐतिहासिक समिट में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को विशेष रूप से आमंत्रित करने का निर्णय राज्य सरकार द्वारा लिया गया है।

“मध्यप्रदेश देश का एकमात्र ऐसा राज्य बन गया है, जिसने मई 2026 तक की अपने सभी उद्यमियों की समस्त देनदारियों और निवेश सहायता राशि का शत-प्रतिशत भुगतान समय से पहले ही क्लियर कर दिया है। यह हमारी सरकार की उद्योगों और निवेशकों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का सबसे बड़ा प्रमाण है।” – मुख्यमंत्री मोहन यादव

एक सिंगल क्लिक से ₹1500 करोड़ की राशि का डिजिटल ट्रांसफर

सशक्त उद्यमी से समृद्ध मध्यप्रदेश के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कार्यक्रम के दौरान रिमोट का बटन दबाकर एक सिंगल क्लिक के माध्यम से एमएसएमई इकाइयों के साथ-साथ प्रदेश के वृहद और बड़े उद्योगों के लिए भी करोड़ों रुपए की प्रोत्साहन राशि सीधे उनके खातों में अंतरित की। राज्य सरकार द्वारा इस समिट के माध्यम से उद्योग क्षेत्र को कुल 1500 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि प्रदान की गई है।

इस वित्तीय सहायता का वर्गीकरण इस प्रकार है:

  • एमएसएमई इकाइयाँ: प्रदेश की विभिन्न सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम इकाइयों को प्रोत्साहन के रूप में 225 करोड़ 19 लाख रुपए की राशि जारी की गई।
  • स्टार्ट-अप्स के लिए सहायता: प्रदेश के उभरते हुए विभिन्न स्टार्ट-अप को प्रोत्साहित करने के लिए लगभग 39 लाख रुपए की राशि प्रदान की गई।
  • वृहद एवं बड़े उद्योग: मध्यप्रदेश निवेश प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत बड़े उद्योगों को आकर्षित करने और उनके विस्तार के लिए 1274 करोड़ रुपए की राशि डिजिटल माध्यम से अंतरित की गई।

मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था का मुख्य इंजन है एमएसएमई सेक्टर

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के आर्थिक विकास के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्तमान में पूरे देश में लगभग 7 करोड़ एमएसएमई इकाइयां संचालित हो रही हैं, जिनमें से अकेले मध्यप्रदेश में 25 लाख इकाइयां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। ये इकाइयां प्रदेश के विकास की रीढ़ हैं।

क्षेत्र / सूचकांक मध्यप्रदेश एमएसएमई का योगदान / आंकड़े
कुल सक्रिय इकाइयाँ 25 लाख (देश की कुल 7 करोड़ में से)
रोजगार सृजन लगभग 1.5 करोड़ (डेढ़ करोड़) लोगों को रोजगार
जीडीपी (GDP) में हिस्सेदारी 31 प्रतिशत योगदान
विनिर्माण उत्पादन (Manufacturing) में योगदान 35 प्रतिशत भागीदारी
कुल निर्यात (Exports) में योगदान 49 प्रतिशत की ऐतिहासिक हिस्सेदारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन आंकड़ों से साफ है कि एमएसएमई सेक्टर हमारी अर्थव्यवस्था के मुख्य इंजन के रूप में कार्य कर रहा है। मध्यप्रदेश का यह सेक्टर केवल व्यापार का साधन नहीं बल्कि जनकल्याण और गरीबी उन्मूलन का सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरा है।

कपास पर मंडी शुल्क आधा: किसानों और उद्यमियों ने जताया आभार

राज्य सरकार द्वारा हाल ही में कपास पर मंडी शुल्क को आधा करने का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस ऐतिहासिक निर्णय का सीधा लाभ प्रदेश के लाखों कपास उत्पादक किसानों और वस्त्र उद्योग (टेक्सटाइल सेक्टर) से जुड़े उद्यमियों को एक साथ प्राप्त होगा। इस कल्याणकारी नीति के लिए बुरहानपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए व्यापारिक और कृषक प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव का भव्य स्वागत और अभिनंदन किया। विधायक अर्चना चिटनिस के नेतृत्व में ‘मध्यांचल कॉटन एंड जिंजर ट्रेडर्स एसोसिएशन’ के प्रतिनिधियों ने कपास पर मंडी शुल्क आधा करने के इस निर्णय की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री को एक विशाल गजमाला पहनाकर उनका धन्यवाद ज्ञापित किया।

वैश्विक स्तर पर बढ़ रहा आकर्षण: विदेशी निवेश में भारी उछाल

मध्यप्रदेश की पारदर्शी और उद्योग-अनुकूल नीतियों की वजह से अब केवल देश के ही नहीं, बल्कि दुनिया के बड़े-बड़े विकसित देश भी मध्यप्रदेश की ओर आकर्षित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि कनाडा, यूके (यूनाइटेड किंगडम), अमेरिका, जापान, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे अग्रणी देशों से मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश आ रहा है। यह निवेश मुख्य रूप से कृषि, खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग), और मेडिकल डिवाइस जैसे आधुनिक और उच्च तकनीकी क्षेत्रों में हो रहा है।

उन्होंने यह भी साझा किया कि भोपाल में वर्ष 2025 में आयोजित की गई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। उस समिट के बाद से अब तक 9 हजार 300 करोड़ रुपए का वास्तविक निवेश धरातल पर पूरी तरह से उतर चुका है, जिससे हजारों नए रोजगार पैदा हुए हैं।

2 वर्ष में बनीं 18 नई नीतियां, नारी शक्ति का प्रतिनिधित्व 67% बढ़ा

औद्योगिक सुधारों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले 2 वर्षों के भीतर राज्य सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों के विकास के लिए 18 नई नीतियां और नियम बनाए हैं, जो आज उद्योग जगत के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो रहे हैं। एक जिला-एक उत्पाद (ODOP) योजना के तहत प्रदेश के हर जिले के पारंपरिक शिल्पों को वैश्विक बाजार मिल रहा है। वर्ष 2025-26 की अवधि में मध्यप्रदेश ने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और भौगोलिक विशेषताओं के बल पर रिकॉर्ड 20 जीआई टैग (GI Tag) प्राप्त किए हैं।

महिला सशक्तिकरण की मिसाल पेश करते हुए उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में 4 लाख 41 हजार से अधिक एमएसएमई यूनिट्स का पूरा जिम्मा हमारी माताओं और बहनों के हाथों में है। पिछले वर्षों की तुलना में वर्ष 2024 से 2026 के बीच एमएसएमई क्षेत्र में नारी शक्ति का प्रतिनिधित्व 67 प्रतिशत तक बढ़ा है, जो एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। औद्योगिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने प्रदेश में 16 नए क्लस्टर्स का निर्माण पूरा कर लिया है, जबकि 14 अन्य नए क्लस्टर्स पर तेजी से काम चल रहा है।

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वर्ष 2026 ‘कृषक कल्याण वर्ष’ और 2027 होगा ‘युवा वर्ष’

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य सरकार के दूरगामी विजन को साझा करते हुए बताया कि सरकार समाज के हर वर्ग के सर्वांगीण विकास के लिए एक रोडमैप के तहत काम कर रही है। इसके तहत राज्य सरकार ने अलग-अलग वर्षों को विशेष थीम पर समर्पित किया है:

  • वर्ष 2024: गरीब कल्याण वर्ष के रूप में मनाया गया।
  • वर्ष 2025: उद्योग एवं रोजगार वर्ष के रूप में मनाया गया।
  • वर्ष 2026: वर्तमान वर्ष को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है, जिसमें एग्रीकल्चर सेक्टर को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से नई ऊंचाइयों पर ले जाया जाएगा।
  • वर्ष 2027: आने वाले आगामी वर्ष 2027 को पूरे प्रदेश में ‘युवा वर्ष’ की थीम पर बेहद भव्य तरीके से मनाया जाएगा।

किसानों के लिए कर्ज चुकाने की 31 मार्च की बाध्यता खत्म

कृषक कल्याण वर्ष के तहत किसानों को एक बड़ी सौगात देते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अब किसानों को शून्य प्रतिशत (0%) ब्याज दर पर कृषि ऋण दिया जा रहा है। इसके साथ ही, ऋण चुकाने के पारंपरिक और तनावपूर्ण नियम को बदलते हुए 31 मार्च की समय-सीमा की बाध्यता को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। अब किसान भाई जिस तारीख को बैंक से ऋण लेंगे, उन्हें उस तारीख से पूरे 12 महीने (एक वर्ष) की अवधि ऋण चुकाने के लिए मिलेगी, जिससे उन पर आर्थिक दबाव नहीं रहेगा।

औद्योगिक सुधार लागू करने में मध्यप्रदेश देश का ‘टॉप अचीवर’

भारत सरकार द्वारा देश में व्यापार को सुगम बनाने के उद्देश्य से तय किए गए 23 प्रमुख औद्योगिक सुधारों (Industrial Reforms) को शत-प्रतिशत धरातल पर लागू करने के मामले में मध्यप्रदेश पूरे देश में ‘टॉप अचीवर’ बनकर उभरा है। समिट के मंच से मुख्यमंत्री ने प्रदेश के 13 विभिन्न जिलों में बने 14 नए औद्योगिक केंद्रों और प्रशासनिक भवनों का रिमोट के जरिए लोकार्पण और भूमि-पूजन किया। इसके साथ ही स्थापित किए जा रहे 7 नए औद्योगिक क्षेत्र प्रदेश के इंडस्ट्री सेक्टर को एक नया आधुनिक आकार प्रदान करेंगे। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्टार्ट-अप योजना और क्लस्टर्स स्कीम का लाभ उठाकर एमपी के उद्यमी पूंजी, प्रशिक्षण और वैश्विक बाजार से निरंतर सीधे जुड़ रहे हैं।

एमएसएमई का बजट 1100 करोड़ से बढ़ाकर हुआ 3100 करोड़: चेतन्य कुमार काश्यप

समिट को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश के एमएसएमई मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप ने कहा कि आज राज्य में उद्योगों के विकास का एक नया और सकारात्मक वातावरण निर्मित हुआ है। यह सब मुख्यमंत्री मोहन यादव के गतिशील, विजनरी और प्रबल इच्छाशक्ति वाले नेतृत्व के कारण ही संभव हो सका है। पिछले 2 वर्षों की छोटी अवधि में ही मुख्यमंत्री ने विभाग के बजट को 1100 करोड़ रुपए से सीधे तीन गुना बढ़ाकर 3100 करोड़ रुपए तक पहुंचा दिया है।

मंत्री काश्यप ने आगे बताया कि नई एमएसएमई और स्टार्ट-अप पॉलिसी 2025 से उद्यमियों को बेहतर बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ लगभग 1100 करोड़ रुपए का प्रत्यक्ष वित्तीय प्रोत्साहन मिला है। सरकार के प्रयासों का ही नतीजा है कि पिछले 2 सालों में योग्य उद्यमियों को 1200 औद्योगिक भूखंड (Industrial Plots) आवंटित किए जा चुके हैं, और आने वाले वर्षों में 3000 नए भूखंड उपलब्ध करवाए जाएंगे। वर्तमान में प्रदेश भर में 34 नए औद्योगिक क्षेत्रों का तेजी से विकास किया जा रहा है।

रोजगार देने में देश में 14वें से 11वें स्थान पर पहुंचा मध्यप्रदेश: मुख्य सचिव

मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने अपने संबोधन में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की वैश्विक महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के कुल मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन में एमएसएमई का योगदान 45 प्रतिशत और कुल निर्यात में 49 प्रतिशत होना एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व घटना है। इसी सशक्त आधार के कारण मध्यप्रदेश ने युवाओं को रोजगार देने के मामले में देश भर में छलांग लगाई है। हमारा राज्य मात्र एक वर्ष के भीतर देश में रोजगार सृजन के सूचकांक में 14वें स्थान से उठकर सीधे 11वें स्थान पर पहुंच गया है।

मुख्य सचिव ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) के तहत किए गए प्रशासनिक सुधारों की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य को उद्योग अनुकूल बनाने के लिए सैकड़ों पुराने और जटिल कानूनों को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। लगभग 100 से अधिक ऐसे कानून थे जिनमें मामूली तकनीकी चूक पर भी जेल भेजने जैसी कठोर सजा का प्रावधान था, उन्हें संशोधित कर अब केवल ‘अर्थ दंड’ (जुर्माना) लगाने के प्रावधान में बदल दिया गया है। इसके अलावा बैंकों से वित्तीय संसाधन आसान किए गए हैं, जिसके तहत कुल कमर्शियल क्रेडिट वित्त में से 1 लाख 45 हजार करोड़ रुपए (यानी कुल वित्त का 11 प्रतिशत) सीधे एमएसएमई को उपलब्ध करवाया गया है। उन्होंने उद्यमियों से फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में आगे आकर नेतृत्व करने का आह्वान किया।

प्रदर्शनी रविवार 28 जून को भी आम जनता के लिए खुली रहेगी

सशक्त उद्यमी समृद्ध मध्यप्रदेश समिट के हिस्से के रूप में रवीन्द्र भवन परिसर में प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए उद्यमियों, शिल्पकारों और स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित विभिन्न उत्पादों और उत्कृष्ट कला शिल्पों की एक विशाल प्रदर्शनी लगाई गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्वयं इस प्रदर्शनी का गहन अवलोकन किया और स्थानीय कारीगरों के हुनर की सराहना की। प्रशासन द्वारा जानकारी दी गई है कि यह प्रदर्शनी रविवार 28 जून को भी पूरे दिन आम जनता और खरीदारों के लिए निःशुल्क खुली रहेगी, जहां लोग सीधे उत्पाद खरीद सकेंगे। इस समिट में देश-प्रदेश के लगभग 2000 उद्यमियों, निवेशकों, नीति निर्माताओं और स्व-सहायता समूहों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

समिट की मुख्य हाइलाइट्स और प्रमुख गतिविधियां

इस एक दिवसीय उच्च स्तरीय “सशक्त उद्यमी : समृद्ध मध्यप्रदेश” समिट के दौरान निम्नलिखित प्रमुख कार्य और उपलब्धियां दर्ज की गईं:

  1. डिजिटल प्रोत्साहन वितरण: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सिंगल क्लिक से प्रदेश की 750 से अधिक औद्योगिक इकाइयों को सीधे बैंक खातों में प्रोत्साहन राशि का वितरण किया।
  2. लघु फिल्म का प्रदर्शन: मध्यप्रदेश के स्थानीय और सफल उद्यमियों की प्रेरणादायक संघर्ष और सफलता की विकास गाथा पर केंद्रित एक विशेष लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया।
  3. स्टार्ट-अप्स को बूस्टर डोज: प्रदेश के 137 होनहार स्टार्ट-अप्स को आगे बढ़ने के लिए कुल 1.5 करोड़ रुपए की सहायता राशि डिजिटल रूप से अंतरित की गई।
  4. वृहद उद्योगों को संबल: मध्यप्रदेश निवेश प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत बड़े और भारी उद्योगों को राज्य में बने रहने और विस्तार के लिए 1274 करोड़ रुपए की भारी वित्तीय सहायता दी गई।
  5. भूमि आवंटन पत्र वितरण: मुख्यमंत्री ने नए उद्योग स्थापित करने के इच्छुक उद्यमियों को उद्योग स्थापना के लिए ‘भूमि आवंटन आशय पत्र’ (Letter of Intent) एवं बैंक लोन स्वीकृति-पत्रों का वितरण किया। इसमें विशेष रूप से विदिशा और मंदसौर जिले की तीन-तीन औद्योगिक इकाइयां शामिल हैं।
  6. रणनीतिक एमओयू (MoU): स्टार्ट-अप्स को तकनीकी और व्यावहारिक रूप से प्रोत्साहित करने के लिए ‘प्ले एंड प्लग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ और मध्यप्रदेश शासन के ‘एमएसएमई विभाग’ के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
  7. मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना: इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत कटनी, खरगोन और रायसेन जिले के 4 चयनित हितग्राहियों को अपने व्यवसाय का विस्तार करने के लिए कुल 1 करोड़ 57 लाख रुपए की ऋण राशि के चेक प्रदान किए गए।
  8. नारी शक्ति को सहयोग: ‘मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप नीति 2025’ के अंतर्गत एक ऐसी महिला उद्यमी इकाई को विशेष आर्थिक सहायता राशि प्रदान की गई जो प्रत्यक्ष रूप से 30 से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार प्रदान कर रही है।

समिट के समापन सत्र में देश के जाने-माने उद्यमी डॉ. पीयूष कुमार सिंह ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश अब सिर्फ उद्योग स्थापित करने वाला राज्य नहीं रहा, बल्कि स्थापित उद्योगों को अपनी पारदर्शी और ईमानदार नीतियों से लगातार आगे बढ़ाने वाला देश का सबसे बेहतरीन राज्य बन चुका है। उनकी कंपनी पहले ही एमपी में 200 करोड़ रुपए का निवेश कर चुकी है और आने वाले दो वर्षों में मेडिसिन रिसर्च (दवा अनुसंधान) के क्षेत्र में 50 करोड़ रुपए का नया निवेश करने जा रही है, जिससे मध्यप्रदेश फार्मा सेक्टर के एक ग्लोबल हब के रूप में स्थापित होगा। कार्यक्रम में लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष सत्येंद्र भूषण सिंह, उद्योग आयुक्त दिलीप कुमार सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारी और हजारों निवेशक उपस्थित थे।