3 साल की उम्र में कमाल! भोपाल की सान्वी और समन्वी बनीं विश्व की सबसे युवा ड्रमर






भोपाल की जुड़वां बहनों सान्वी और समन्वी नाहर ने ड्रम बजाकर बनाया विश्व रिकॉर्ड, ब्रिटिश संसद में हुईं सम्मानित

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अद्भुत प्रतिभा: भोपाल की मासूम जुड़वां बहनों ने ड्रम बजाकर रचा इतिहास, ब्रिटिश संसद के हाउस ऑफ कॉमंस में मिला वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स का सम्मान

विशेष रिपोर्ट: प्रदेश खबर नेटवर्क |
स्थान: भोपाल/अम्बिकापुर |
अपडेटेड: 2026

भोपाल/नई दिल्ली। जिस उम्र में नौनिहाल ठीक से हाथ में पेंसिल पकड़ना और कागज पर लकीरें खींचना सीखते हैं, उस उम्र में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की दो सगी जुड़वां बहनों ने पूरी दुनिया में भारत का डंका बजा दिया है। भोपाल की रहने वाली मासूम बहनों सान्वी नाहर और समन्वी नाहर ने ड्रम सेट पर अपनी जादुई थाप और सटीक जुगलबंदी से एक ऐसा विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया है, जिसे देखकर बड़े-बड़े दिग्गज संगीतकार और कला प्रेमी दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो गए हैं।

महज 3 वर्ष 9 माह की अत्यंत अल्पायु में इन दोनों बहनों ने दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित रिकॉर्ड संस्थाओं में से एक ‘वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन (यूके)’ में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा लिया है। उन्हें आधिकारिक तौर पर विश्व की ‘यंगेस्ट फीमेल ड्रमर’ (सबसे कम उम्र की महिला ड्रमर) का खिताब दिया गया है। इस ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए दोनों बच्चियों को ब्रिटेन की राजधानी लंदन स्थित ब्रिटिश संसद के ऐतिहासिक भवन ‘हाउस ऑफ कॉमंस’ में आयोजित एक बेहद गरिमामयी और भव्य अंतरराष्ट्रीय समारोह में विशेष रूप से सम्मानित किया गया है।

“सान्वी और समन्वी ने 21 मार्च 2026 को ड्रम सेट पर एक बेहद कठिन और निर्धारित म्यूजिकल ट्रैक को बिना रुके लगातार 1 मिनट 20 सेकंड तक पूरी सटीकता के साथ बजाकर यह विश्व कीर्तिमान अपने नाम किया।”

लंदन की संसद में गूंजा भारत का नाम, प्रमाण-पत्र और मेडल से हुईं नवाजीं

इस अद्भुत रिकॉर्ड की पुष्टि होने के बाद वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स संस्था द्वारा दोनों नन्हे कलाकारों को आधिकारिक प्रमाण-पत्र, चमचमाती ट्रॉफी और प्रतिष्ठित मेडल प्रदान किए गए हैं। इसके साथ ही उनकी इस अभूतपूर्व सफलता को संस्था के वैश्विक और आधिकारिक वार्षिक प्रकाशनों सहित उनके तमाम डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी प्रमुखता से स्थान दिया गया है। ब्रिटिश संसद में जब इन दोनों बच्चियों को सम्मानित किया जा रहा था, तब वहां उपस्थित वैश्विक प्रतिनिधियों और ब्रिटिश सांसदों ने खड़े होकर इन दोनों भारतीय बेटियों की प्रतिभा की सराहना की और तालियों से पूरा सदन गूंज उठा।

ड्रमिंग: संगीत की सबसे जटिल और कठिन विधाओं में से एक

संगीत के जानकारों और विश्लेषकों की मानें तो वाद्य यंत्रों की दुनिया में ड्रम सेट को सबसे जटिल और शारीरिक व मानसिक समन्वय (कोआर्डिनेशन) की मांग करने वाला यंत्र माना जाता है। ड्रम बजाने के लिए एक साथ दोनों हाथों की कलाइयों, उंगलियों और दोनों पैरों का अलग-अलग गति व ताल में संचालन करना होता है। इसके लिए दिमाग का बेहद तेज और एकाग्र होना अनिवार्य है। यही कारण है कि दुनिया भर के संगीत विद्यालयों में बच्चों को सामान्यतः पांच वर्ष की आयु पूरी होने के बाद ही ड्रम स्टिक्स (ड्रम बजाने वाली छड़ी) थामने की सलाह और प्रशिक्षण दिया जाता है।

लेकिन सान्वी और समन्वी ने इस स्थापित धारणा को अपनी असीम प्रतिभा से पूरी तरह बदल कर रख दिया। दोनों बहनों ने महज सवा तीन साल (3 वर्ष 3 माह) की उम्र से ही ड्रम सीखने की जिद पकड़ ली थी। उनकी मां दंत चिकित्सक निकिता नाहर ने बताया कि यह सफर बेहद चुनौतीपूर्ण था। शुरुआत में इतनी छोटी बच्चियों की कोमल उंगलियों और पैरों को ड्रम के पैडल और सिम्बल के साथ तालमेल बिठाते देखना असंभव सा लगता था, लेकिन उनके भीतर संगीत को लेकर जो स्वाभाविक आकर्षण था, उसने हर बाधा को पीछे छोड़ दिया। दोनों बहनों के नियमित और कड़े अभ्यास के बल पर ही आज यह विश्व रिकॉर्ड भारत की झोली में आ सका है।

रिकॉर्ड के पीछे की महत्वपूर्ण जानकारियां

विवरण महत्वपूर्ण तथ्य
रिकॉर्ड धारी नाम सान्वी नाहर एवं समन्वी नाहर (जुड़वां बहनें)
निवासी भोपाल, मध्य प्रदेश (भारत)
आधिकारिक खिताब यंगेस्ट फीमेल ड्रमर (Youngest Female Drummer)
रिकॉर्ड की आयु 3 वर्ष 9 माह
प्रशिक्षण की शुरुआत 3 वर्ष 3 माह की उम्र से
सफलता की तिथि 21 मार्च 2026
ट्रैक का समय 1 मिनट 20 सेकंड (लगातार प्रस्तुति)
प्रमाणित संस्था वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन (UK)
मुख्य ड्रम प्रशिक्षक युग नामदेव ‘योगी’ (योगी म्यूजिक वैली एकेडमी)

कई दिग्गजों ने किया था इनकार, एक सच्चे गुरु ने स्वीकार की चुनौती

सान्वी और समन्वी के माता-पिता जब अपनी इन नन्हीं बेटियों के भीतर ड्रम के प्रति छिपी रुचि को पहचानकर उन्हें औपचारिक शिक्षा दिलाना चाहते थे, तब उन्हें शुरुआती दौर में काफी निराशा हाथ लगी थी। वे भोपाल के कई नामी-गिरामी संगीत शिक्षकों, संगीत विद्यालयों और दिग्गजों के पास पहुंचे। लेकिन लगभग सभी शिक्षकों ने बच्चियों की कोमल उम्र को देखते हुए उन्हें सिखाने से साफ तौर पर यह कहते हुए मना कर दिया कि इस उम्र में ड्रम की हैवी बीट्स और शारीरिक तालमेल को समझना और संभालना किसी भी बच्चे के लिए व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। कई लोगों ने तो यहां तक कहा कि अभी इनके खेलने-कूदने के दिन हैं, इन्हें इस कठिन विधा में न धकेला जाए।

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निराशा के इन क्षणों के बीच उनका संपर्क भोपाल की मशहूर ‘योगी म्यूजिक वैली एकेडमी’ के संचालक और अनुभवी ड्रम प्रशिक्षक युग नामदेव ‘योगी’ से हुआ। युग नामदेव ने बच्चियों के उत्साह और उनकी आंखों में छिपी चमक को देखा और इसे एक साधारण ट्यूशन के रूप में नहीं, बल्कि एक महान चुनौती के रूप में सहर्ष स्वीकार किया।

प्रशिक्षक युग नामदेव ने बच्चियों की मनोवैज्ञानिक स्थिति और शारीरिक क्षमता को ध्यान में रखते हुए बिल्कुल बुनियादी (रूट लेवल) स्तर से पाठ्यक्रम तैयार किया और उन्हें बेहद लाड-प्यार के साथ धीरे-धीरे ड्रम की थ्योरी और बीट्स को समझाना शुरू किया। गुरु की मेहनत और शिष्याओं के समर्पण का ही नतीजा था कि महज दो महीने के भीतर ही सान्वी और समन्वी ने ड्रम की मूल बीट्स (Basic Beats) पर एक मजबूत और अचूक पकड़ बना ली। इसके बाद एक स्थानीय स्कूल के वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम में जब इन दोनों बहनों ने मंच पर आकर पहली बार लाइव ड्रम बजाया, तो वहां मौजूद सैकड़ों दर्शक, शिक्षक और मुख्य अतिथि आश्चर्यचकित रह गए। इसी कार्यक्रम का एक लाइव वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जो घूमते-घूमते वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की टीम तक पहुंचा। संस्था ने वीडियो की प्रामाणिकता देखकर स्वतः ही रिकॉर्ड की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू करने के लिए परिवार से संपर्क साधा।

एक महीने की कठोर तपस्या: प्रतिदिन एक ही ट्रैक पर सटीक साधना

वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन के कड़े नियमों और शर्तों के मुताबिक, रिकॉर्ड को मान्यता मिलने के लिए यह अनिवार्य था कि बच्चियों को बिना किसी मानवीय सहयोग या बैकग्राउंड सपोर्ट के, एक निर्धारित और जटिल म्यूजिकल ट्रैक पर लगातार 1 मिनट 20 सेकंड तक बिना रुके, बिना अपनी लय भटके पूरी ऊर्जा के साथ लाइव ड्रम बजाना था। सामान्यतः इतनी छोटी उम्र के बच्चों का ध्यान कुछ ही सेकंड में भटक जाता है, ऐसे में सवा मिनट से ज्यादा समय तक एक ही गति और एकाग्रता को बनाए रखना लोहे के चने चबाने जैसा था।

इस चुनौती को पार करने के लिए प्रशिक्षक युग नामदेव के कुशल मार्गदर्शन में दोनों बहनों ने लगातार एक महीने तक हर दिन कई-कई घंटों तक उसी निर्धारित ट्रैक पर कड़ा अभ्यास किया। नन्हीं हथेलियों में छाले पड़ने की परवाह किए बिना दोनों बहनें रोज सुबह-शाम ड्रम सेट पर बैठ जाती थीं। अंततः उनकी इस निरंतर मेहनत और अटूट लगन का मीठा परिणाम सामने आया। फाइनल रिकॉर्डिंग के दिन उन्होंने बिना एक भी चूक किए निर्धारित समय सीमा में अपनी पूरी प्रस्तुति को बेहद खूबसूरती से कैमरे और ऑडियो में दर्ज कर लिया। जब इस रिकॉर्डिंग के साथ सभी आवश्यक तकनीकी दस्तावेज, आयु प्रमाण पत्र और गवाहों के हलफनामे लंदन मुख्यालय भेजे गए, तो वहां की जूरी ने इसे पहली ही बार में बिना किसी आपत्ति के सर्वसम्मति से अपनी मंजूरी दे दी।

भोपाल के प्रतिष्ठित डॉक्टर परिवार का नाम किया रोशन

सान्वी और समन्वी का ताल्लुक भोपाल के एक बेहद प्रतिष्ठित और शिक्षित चिकित्सक (डॉक्टर) परिवार से है। चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे इस परिवार में अब कला और संगीत का यह नया और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। इन दोनों बेटियों के दादा अक्षय नाहर शहर के जाने-माने ऑर्थोपेडिक सर्जन (हड्डी रोग विशेषज्ञ) हैं, जबकि उनके पिता सक्षम नाहर एक प्रतिष्ठित सर्जन हैं। वहीं बच्चियों की माता निकिता नाहर दंत चिकित्सक (डेंटिस्ट) के रूप में समाज की सेवा कर रही हैं।

पारिवारिक पृष्ठभूमि पूरी तरह से चिकित्सा विज्ञान से जुड़े होने के बावजूद, परिवार ने कभी भी अपनी इच्छाएं बच्चों पर नहीं थोपीं। डॉ. निकिता नाहर और डॉ. सक्षम नाहर का मानना है कि हर बच्चे के भीतर ईश्वर एक विशेष प्रतिभा देकर उसे इस धरती पर भेजता है। माता-पिता और अभिभावकों का यह परम कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों की रुचि को बहुत ही शुरुआती और सही समय पर पहचानें। यदि सही समय पर बच्चों को उचित मार्गदर्शन, एक सकारात्मक व अनुकूल वातावरण और निरंतर प्रोत्साहन दिया जाए, तो वे दुनिया का कोई भी कठिन से कठिन और असंभव लगने वाला मुकाम बेहद छोटी उम्र में भी हंसते-खेलते हासिल कर सकते हैं। आज उनकी बेटियों ने जो गौरव हासिल किया है, वह सिर्फ उनके परिवार का नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतवर्ष का सम्मान है।

भारत की पहली ‘ट्विन यंगेस्ट फीमेल ड्रमर’: देश के बच्चों के लिए प्रेरणा

मासूम सान्वी और समन्वी की इस अद्भुत सफलता पर उनके मुख्य प्रशिक्षक युग नामदेव ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि भारत के इतिहास में इतनी कम उम्र में एक साथ ड्रम सेट जैसे विशाल और भारी वाद्य यंत्र पर ऐसा शानदार नियंत्रण और जुगलबंदी प्रदर्शित कर विश्व रिकॉर्ड बनाने वाली ये दोनों जुड़वां बच्चियां देश की पहली ‘ट्विन यंगेस्ट फीमेल ड्रमर’ बन गई हैं। इससे पहले देश या विदेश में इस आयु वर्ग में ऐसा कोई दूसरा उदाहरण देखने को नहीं मिलता है।

युग नामदेव ने आगे कहा कि मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में पहले शास्त्रीय संगीत या पारंपरिक वाद्य यंत्रों को लेकर तो जागरूकता थी, लेकिन ड्रमिंग जैसी पाश्चात्य और आधुनिक विधा को लेकर बच्चों और अभिभावकों में इतना अधिक उत्साह पहले कभी नहीं देखा गया था। लेकिन अब सान्वी और समन्वी नाहर की इस वैश्विक और ऐतिहासिक उपलब्धि ने पूरे परिदृश्य को बदल दिया है। यह सफलता निश्चित रूप से देश के लाखों दूसरे बच्चों, उनके माता-पिता और अभिभावकों के लिए एक महान प्रेरणा स्रोत का काम करेगी। इसने यह साबित कर दिया है कि किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल करने के लिए उम्र का कोई बंधन नहीं होता; सफलता की असली और एकमात्र पहचान केवल आपकी सच्ची प्रतिभा, आपका कड़ा अभ्यास, आपका अटूट समर्पण और आपको मिलने वाला सही व योग्य मार्गदर्शन है।