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मप्र में ग्रीन एनर्जी क्रांति: सीएम मोहन यादव ने किया नीमच सोलर पार्क और ₹11,470 करोड़ के पम्प स्टोरेज प्रोजेक्ट का एरियल सर्वे






मध्यप्रदेश में हरित ऊर्जा क्रांति: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया नीमच सोलर पार्क और ग्रीनको पम्प स्टोरेज परियोजना का एरियल सर्वे


मध्यप्रदेश में हरित ऊर्जा क्रांति: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया नीमच सोलर पार्क और ग्रीनको पम्प स्टोरेज परियोजना का एरियल सर्वे, 11,470 करोड़ की योजना से बदलेगी तस्वीर

प्रदेश खबर नेटवर्क | अपडेटेड: 30 जून 2026 | स्थान: नीमच/भोपाल

नीमच। मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी ग्रीन एनर्जी हब बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को नीमच जिले का दौरा कर यहाँ स्थापित किए जा रहे 500 मेगावाट क्षमता के भव्य सोलर पार्क तथा ग्राम खिमला में निर्माणाधीन ग्रीनको पम्प स्टोरेज परियोजना का एरियल सर्वे (हवाई सर्वेक्षण) किया। इस हवाई निरीक्षण के माध्यम से मुख्यमंत्री ने धरातल पर चल रहे निर्माण कार्यों की गति और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। सर्वे संपन्न होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों और परियोजना के तकनीकी विशेषज्ञों ने मुख्यमंत्री के समक्ष एक विस्तृत पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन (PPT) प्रस्तुत किया, जिसके जरिए परियोजना की वर्तमान प्रगति, इसकी अनूठी तकनीकी विशेषताओं तथा आगामी समय में होने वाली ऊर्जा उत्पादन क्षमता के हर पहलू की बारीकी से जानकारी दी गई।

इस बेहद महत्वपूर्ण अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ केंद्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री जोशी, मध्यप्रदेश के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, ग्रीनको ग्रुप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मौर्या, क्षेत्रीय सांसद सुधीर गुप्ता तथा स्थानीय विधायक माधव मारू विशेष रूप से मौजूद रहे। इसके अलावा प्रशासनिक अमले से अपर मुख्य सचिव नवकरणीय ऊर्जा मनु श्रीवास्तव, नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, तकनीकी विशेषज्ञ और प्रशासनिक अधिकारी भी इस ऐतिहासिक समीक्षा बैठक का हिस्सा बने।

परियोजना की मुख्य विशेषताएं एक नज़र में:

  • कुल निवेश बजट: लगभग 11,470 करोड़ रुपये
  • ग्रीनको पम्प स्टोरेज क्षमता: 1,920 मेगावाट
  • ऊर्जा भंडारण क्षमता: 10,326 मेगावाट प्रति घंटा
  • नीमच सोलर पार्क क्षमता: 500 मेगावाट
  • दैनिक रोजगार सृजन: 3,000 से अधिक स्थानीय श्रमिकों को काम
  • तकनीक: 9 द्वि-दिशात्मक टर्बाइन इकाइयों से होगा बिजली उत्पादन

देश के सबसे बड़े ऊर्जा भंडारण प्रोजेक्ट्स में शामिल है गांधीसागर परियोजना

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस हवाई सर्वेक्षण और समीक्षा बैठक के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए इसे मध्यप्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक युगांतकारी और अभूतपूर्व उपलब्धि बताया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ग्रीनको ग्रुप द्वारा विकसित की जा रही यह 1920 मेगावाट क्षमता की गांधीसागर पम्प स्टोरेज परियोजना सिर्फ प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश की अपनी तरह की सबसे विशाल और आधुनिकतम परियोजनाओं में शुमार है। इस मेगा प्रोजेक्ट के पूर्ण रूप से चालू होने के बाद न केवल मध्यप्रदेश की आंतरिक ऊर्जा सुरक्षा को एक नया और अभेद्य सुरक्षा कवच मिलेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर हरित और स्वच्छ ऊर्जा (क्लीन एनर्जी) को बढ़ावा देने के भारत के संकल्प को भी मजबूती मिलेगी।

परियोजना की आर्थिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि ग्रीनको ग्रुप द्वारा इस पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार करने में लगभग 11,470 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि का निवेश किया जा रहा है। सबसे खास बात यह है कि इस प्लांट की कुल ऊर्जा भंडारण क्षमता 10,326 मेगावाट प्रति घंटा (MWh) होने का अनुमान है, जो ग्रिड स्थिरता बनाए रखने और पीक डिमांड (बिजली की अत्यधिक मांग वाले समय) के दौरान बिना किसी बाधा के बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने में गेम-चेंजर साबित होगी।

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जानिए क्या है पम्प स्टोरेज तकनीक और यह कैसे करेगी काम?

इस आधुनिक परियोजना के तहत इंजीनियरिंग के एक बेहतरीन प्रतिमान का उपयोग किया जा रहा है। इसमें पहले से मौजूद गांधीसागर जलाशय को निचले पूल (Lower Reservoir) के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा, जबकि नीमच जिले के खिमला ग्राम में एक नए ऊपरी जलाशय (Upper Reservoir) का निर्माण तीव्र गति से किया जा रहा है। पम्प स्टोरेज तकनीक के काम करने का तरीका बेहद वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल है।

जब ग्रिड में बिजली की मांग कम होती है (जैसे दिन के समय जब सोलर पावर का उत्पादन भरपूर होता है), तब उस अतिरिक्त सस्ती बिजली का उपयोग करके निचले जलाशय (गांधीसागर) से पानी को पम्प करके ऊपर खिमला जलाशय में पहुंचा दिया जाएगा। इसके बाद, जब शाम या रात के वक्त अचानक बिजली की मांग (Peak Hours) बढ़ती है, तब इसी पानी को वापस ऊपर से नीचे गांधीसागर जलाशय की तरफ छोड़ा जाएगा। नीचे गिरते पानी के जबरदस्त दबाव से टर्बाइन घूमेंगे और तुरंत बिजली का उत्पादन शुरू हो जाएगा।

इस पूरी प्रक्रिया की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी खूबी यह है कि इसमें पानी का शत-प्रतिशत पुनः उपयोग (Recycling) होता है। प्राकृतिक रूप से होने वाले मामूली वाष्पीकरण (Evaporation) से होने वाले नुकसान को यदि छोड़ दिया जाए, तो इस पूरे बिजली चक्र को लगातार चलाने के लिए बाहर से किसी भी प्रकार के अतिरिक्त जल की आवश्यकता नहीं होगी। यह पूरी तरह से एक ‘क्लोज्ड-लूप’ सिस्टम की तरह काम करेगा, जिससे जल संसाधनों का अत्यधिक संरक्षण होगा।

तकनीकी ढांचा: स्थापित की जा रही हैं अत्याधुनिक द्वि-दिशात्मक टर्बाइन

खिमला और गांधीसागर के इस एकीकृत प्रोजेक्ट के तकनीकी ढांचे को वैश्विक मानकों के अनुरूप बेहद शक्तिशाली बनाया जा रहा है। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि पावरहाउस के भीतर कुल 9 अत्याधुनिक द्वि-दिशात्मक टर्बाइन (Bi-directional/Reversible Turbines) इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। इनका विवरण इस प्रकार है:

टर्बाइन यूनिट का प्रकार व्यक्तिगत क्षमता इकाइयों की संख्या कुल क्षमता योगदान
मुख्य रिवर्सिबल टर्बाइन 240 मेगावाट 7 यूनिट 1,680 मेगावाट
सहायक वेरिएबल टर्बाइन 120 मेगावाट 2 यूनिट 240 मेगावाट
कुल संयोजित ढांचा 9 यूनिट 1,920 मेगावाट

ये द्वि-दिशात्मक टर्बाइन ही इस प्रोजेक्ट का दिल हैं। ये एक ही समय में दोतरफा काम करने में सक्षम हैं—जरूरत पड़ने पर ये पानी को ऊपर खींचने के लिए हाई-पावर पंप का रूप ले लेती हैं, और बिजली उत्पादन के समय यही इकाइयां जनरेटर टर्बाइन की तरह काम करने लगती हैं। इस तरह के बड़े पैमाने के तकनीकी संयोजन से ग्रिड को नियंत्रित करना बेहद आसान हो जाता है।

स्थानीय विकास: 3000 से अधिक लोगों को मिल रहा है प्रत्यक्ष रोजगार

ग्रीनको पम्प स्टोरेज परियोजना केवल पर्यावरण और बिजली उत्पादन के लिहाज से ही नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक रूप से भी मालवा और विशेषकर नीमच क्षेत्र के लिए एक बड़ा वरदान साबित हो रही है। परियोजना के निर्माण कार्य की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों ने बताया कि इस समय खिमला साइट पर निर्माण कार्यों के चलते प्रतिदिन तीन हजार (3,000) से अधिक स्थानीय कुशल और अकुशल श्रमिकों, इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों को सीधे तौर पर रोजगार मिल रहा है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि जैसे ही यह परियोजना और इसके साथ जुड़ा हुआ 500 मेगावाट का नीमच सोलर पार्क पूरी तरह से धरातल पर क्रियान्वित होकर व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर देगा, वैसे ही इस पूरे अंचल में औद्योगिक विकास को एक नई और अभूतपूर्व रफ्तार मिलेगी। इस क्षेत्र में सहायक उद्योगों (Ancillary Industries) का जाल बिछेगा, जिसके परिणामस्वरूप अप्रत्यक्ष रोजगार के हजारों नए अवसर सृजित होंगे। स्वच्छ ऊर्जा की चौबीसों घंटे उपलब्धता के चलते बड़ी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कंपनियां भी नीमच की तरफ आकर्षित होंगी, जिससे इस सुदूर अंचल की आर्थिक रीढ़ मजबूत होगी।

समीक्षा बैठक में वरिष्ठ नेतृत्व और प्रशासनिक अमला रहा मुस्तैद

हवाई सर्वेक्षण के बाद आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में केंद्रीय और राज्य नेतृत्व की मौजूदगी ने इस प्रोजेक्ट की राष्ट्रीय महत्ता को रेखांकित किया। केंद्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री जोशी ने केंद्र सरकार की तरफ से मध्यप्रदेश को इस तरह के अभिनव ग्रीन इनिशिएटिव्स के लिए हर संभव तकनीकी और वित्तीय सहायता जारी रखने का आश्वासन दिया। वहीं, राज्य के ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने आश्वस्त किया कि विभाग समय-सीमा के भीतर इस प्रोजेक्ट के बुनियादी ढांचे और ट्रांसमिशन लाइनों के काम को पूरा करने के लिए मुस्तैदी से जुटा हुआ है।

प्रशासनिक अधिकारियों के दल का नेतृत्व कर रहे अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि पर्यावरण और वन विभाग से जुड़ी स्वीकृतियों और जमीन के तकनीकी आवंटन का काम सुचारू रूप से पूरा कर लिया गया है और प्रोजेक्ट पूरी तरह से सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। अंत में नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने स्थानीय प्रशासन की ओर से कानून व्यवस्था, एप्रोच रोड के निर्माण और साइट पर सुरक्षा संबंधी तमाम आवश्यक प्रबंधों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। बैठक का समापन क्षेत्र के उज्ज्वल औद्योगिक भविष्य की प्रतिबद्धता और हरित ऊर्जा के संकल्प के साथ हुआ।

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