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माँ सर्वमंगला मंदिर घाट पर हसदेव आरती संपन्न, कोरबा में जल संरक्षण का दिया गया सामूहिक संदेश

माँ सर्वमंगला मंदिर घाट पर श्रद्धा और जनजागरूकता के साथ संपन्न हुई हसदेव आरती, जल संरक्षण का दिया गया सामूहिक संदेश

নমামী হসদেব সেবা সমিতির আয়োজনে বিপুল সংখ্যায় উপস্থিত হলেন পুণ্যার্থীরা; হাসদেও নদীর পরিচ্ছন্নতা ও সুরক্ষায় জনঅংশীদারিত্বের অঙ্গীকার।


कोरबा। नमामि हसदेव सेवा समिति द्वारा कोरबा जिले की जीवनदायिनी हसदेव नदी के संरक्षण, स्वच्छता और जनजागरूकता के उद्देश्य से प्रत्येक पूर्णिमा पर आयोजित की जाने वाली भव्य हसदेव आरती इस माह 29 जून 2026, सोमवार की सायंकाल माँ सर्वमंगला मंदिर घाट, कोरबा में पूरी श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक सरोकारों के वातावरण में संपन्न हुई। शाम 6 बजे आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालुओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रबुद्ध नागरिकों तथा विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता कर हसदेव नदी के संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा का सामूहिक संदेश दिया।

नमामि हसदेव सेवा समिति द्वारा लंबे समय से हसदेव नदी, उसकी सहायक नदियों तथा जिले के अन्य पारंपरिक व प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण, स्वच्छता और सौंदर्यीकरण के लिए जनभागीदारी आधारित एक वृहद अभियान संचालित किया जा रहा है। इसी निरंतर अभियान के अंतर्गत प्रत्येक पूर्णिमा की तिथि पर माँ सर्वमंगला मंदिर घाट में हसदेव महाआरती का नियमित आयोजन किया जाता है। इस पुनीत कार्य का मुख्य उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों को जल संरक्षण, नदी स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति न केवल जागरूक करना है, बल्कि उन्हें धरातल पर सक्रिय करना भी है। इस बार भी आयोजित आरती में श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह, उमंग और अटूट श्रद्धाभाव के साथ भाग लिया और मां हसदेव के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट की।

महाआरती के मुख्य आकर्षण और संदेश:

  • आयोजन स्थल: ऐतिहासिक माँ सर्वमंगला मंदिर घाट, कोरबा (छत्तीसगढ़)।
  • मुख्य संकल्प: नदी को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त रखना और सिंगल-यूज प्लास्टिक का त्याग।
  • विशेषता: समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रबुद्ध जन बने महाआरती के यजमान।
  • मूल मंत्र: शासकीय प्रयासों के साथ-साथ समाज के हर नागरिक की सक्रिय जनभागीदारी जरूरी।

ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर जुटे गणमान्य नागरिक

ज्येष्ठ पूर्णिमा के शुभ और पावन अवसर पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्रों से जुड़े अनेक गणमान्य नागरिक यजमान के रूप में सम्मिलित हुए। कार्यक्रम के मुख्य यजमान के रूप में कामेश्वर धर दीवान, जिलाध्यक्ष, संस्कार भारती, कोरबा उपस्थित रहे। महाआरती के उपरांत उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए उन्होंने हसदेव नदी के संरक्षण को समाज की सामूहिक और नैतिक जिम्मेदारी बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारी संस्कृति में नदियां केवल जल का स्रोत नहीं बल्कि साक्षात चेतना हैं, इसलिए प्राकृतिक संसाधनों के मूल स्वरूप को बचाए रखने के लिए जनसहभागिता को एक जनआंदोलन का रूप देना अत्यंत आवश्यक हो गया है।

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कार्यक्रम में विशिष्ट यजमान के रूप में नगर की कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनमें राजेश अग्रवाल, डायरेक्टर, कोरबा कम्प्यूटर कॉलेज, कोरबा; संदीप शर्मा, जिलाध्यक्ष, आदित्य वाहिनी, कोरबा; बसंत कुमार रस्तोगी, विभागाध्यक्ष, वाणिज्य संकाय, अग्रसेन कन्या महाविद्यालय, कोरबा तथा आशीष कुमार श्रीवास्तव, वित्तीय एवं म्यूचुअल फंड सलाहकार, टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस, कोरबा ने विशेष रूप से सहभागिता की। महाआरती की वेदी से इन सभी प्रबुद्ध जनों ने सामूहिक स्वर में हसदेव नदी की स्वच्छता और संरक्षण के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर युवाओं से बढ़-चढ़कर आगे आने का आह्वान किया।

नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने और अपशिष्ट न फेंकने की शपथ

हसदेव आरती के दौरान उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान और श्रद्धाभाव से माँ हसदेव की महाआरती उतारी और प्रार्थना की। शंखध्वनि, घंटियों की गूंज और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूरा सर्वमंगला घाट भक्तिमय हो उठा। इस धार्मिक अनुष्ठान को सामाजिक चेतना से जोड़ते हुए कार्यक्रम के माध्यम से नदी को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त रखने, पारंपरिक जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने, प्लास्टिक, पॉलीथीन एवं अन्य घरेलू व औद्योगिक अपशिष्ट पदार्थों को पवित्र नदी में न फेंकने तथा व्यापक पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने का पुरजोर संदेश दिया गया।

समिति के सक्रिय सदस्यों ने कार्यक्रम के बीच नागरिकों से संवाद करते हुए बताया कि प्राकृतिक जल स्रोतों की सुरक्षा और उनका संवर्धन केवल शासकीय योजनाओं या प्रशासनिक प्रयासों के भरोसे संभव नहीं है। जब तक समाज का प्रत्येक नागरिक अपनी दैनिक आदतों में सुधार नहीं करेगा और अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित नहीं करेगा, तब तक नदियों का अस्तित्व बचाना कठिन होगा। घाटों की स्वच्छता ही हमारी आस्था का असली पैमाना होना चाहिए।

“हसदेव नदी केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि पूरे कोरबा जिले की जीवनरेखा और आर्थिक-सामाजिक रीढ़ है। इसके जल से ही हमारी फसलें लहलहाती हैं और उद्योग चलते हैं। यदि हम आज सचेत नहीं हुए, तो आने वाली पीढ़ियों को हम एक सूखा और प्रदूषित भविष्य सौंपेंगे। इसलिए नदी संरक्षण को हर घर का संकल्प बनाना होगा।”

भावी पीढ़ी के लिए जल संवर्धन आवश्यक

कार्यक्रम में मौजूद प्रबुद्ध नागरिकों और प्रभारियों ने जल संरक्षण के महत्व पर भी अपने-अपने व्यावहारिक विचार साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि कोरबा जिला प्राकृतिक रूप से बेहद समृद्ध है, लेकिन जल स्रोतों पर बढ़ता मानवीय दबाव चिंता का विषय है। सामूहिक प्रयास ही इस समय की सबसे बड़ी मांग है। यदि सभी नागरिक अपनी नागरिक जिम्मेदारी का ईमानदारी से निर्वहन करें, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और समृद्ध जल संसाधन आसानी से उपलब्ध कराए जा सकते हैं। इस अवसर पर उपस्थित युवाओं ने भी सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर इस अभियान को फैलाने की बात कही, ताकि नदी संरक्षण को एक स्थाई जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा सके।

कार्यक्रम के समापन पर नमामि हसदेव सेवा समिति के पदाधिकारियों ने आयोजन को भव्य और सफल बनाने में अपना बहुमूल्य सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं, विभिन्न सामाजिक संगठनों, गणमान्य नागरिकों, मीडिया प्रतिनिधियों तथा दिन-रात जुटे रहने वाले स्वयंसेवकों के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया। समिति ने दृढ़ संकल्प दोहराते हुए कहा कि हसदेव नदी के संरक्षण, अविरलता, स्वच्छता और समग्र पर्यावरण संवर्धन के लिए भविष्य में भी इसी प्रकार के व्यापक जनजागरूकता अभियान और प्रत्येक पूर्णिमा को हसदेव आरती का आयोजन निरंतर जारी रहेगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इस अभियान की मुख्यधारा से जुड़कर अपनी अनमोल प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण में अपनी ऐतिहासिक भागीदारी दर्ज करा सकें।

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