गरियाबंद जिला स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव 2026: मैनपुर में नवीन शिक्षा सत्र का भव्य शुभारंभ





मैनपुर में भव्य जिला स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव का आयोजन

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विशेष प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कवरेज | प्रदेश खबर नेटवर्क

गरियाबंद जिला स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव: मैनपुर में शिक्षा का महाउत्सव, सांसद एवं विधायक ने नवप्रवेशी बच्चों का किया आत्मीय स्वागत

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संवाददाता: विशेष ब्यूरो रिपोर्ट |
श्रेणी: शिक्षा, शासन-प्रशासन, क्षेत्रीय विकास

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के आदिवासी बहुल और सुदूर वनांचल क्षेत्र मैनपुर में आज शिक्षा के एक नए सवेरे का शंखनाद हुआ। शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल मैनपुर के प्रांगण में आयोजित भव्य जिला स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव कार्यक्रम ने न केवल नवीन शैक्षणिक सत्र 2026-27 का शुभारंभ किया, बल्कि समूचे वनांचल क्षेत्र में शिक्षा की महत्ता और बच्चों के सुनहरे भविष्य की एक नई इबारत भी लिख दी। महासमुंद लोकसभा क्षेत्र की सांसद रूपकुमारी चौधरी और बिन्द्रानवागढ़ विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक जनक राम ध्रुव की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित इस महाउत्सव में सैकड़ों नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और प्रबुद्ध जनों ने सहभागिता दर्ज की।

१. पारंपरिक एवं आत्मीय स्वागत की अनूठी बानगी

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के तैलचित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन और राज्य गीत ‘अरपा पैरी के धार’ के सस्वर गायन के साथ हुआ। जैसे ही नवप्रवेशी नन्हे-मुन्ने बच्चों ने विद्यालय की देहली पर कदम रखा, वहां का माहौल पूरी तरह से उत्सवमयी हो गया। मुख्य अतिथि सांसद रूपकुमारी चौधरी और विशिष्ट अतिथि विधायक जनक राम ध्रुव ने स्वयं आगे बढ़कर बच्चों की अगवानी की। अतिथियों ने पूरी आत्मीयता के साथ बच्चों के माथे पर रोली-चंदन का तिलक लगाया, अक्षत लगाए और उन्हें मिठाई खिलाकर उनका मुंह मीठा कराया।

इस आत्मीय स्वागत से बच्चों के चेहरों पर एक अनूठी मुस्कान और उत्साह साफ देखा जा सकता था। पहली बार स्कूल आने वाले बच्चों के मन में व्याप्त हिचक और भय को दूर करने के लिए प्रशासन और जन-प्रतिनिधियों द्वारा किया गया यह प्रयास अत्यंत सराहनीय रहा। विद्यालय प्रशासन द्वारा पूरे परिसर को रंग-बिरंगे गुब्बारों, आम के पत्तों के तोरण और आकर्षक रंगोलियों से सजाया गया था, जो बच्चों के लिए एक कौतूहल और खुशी का केंद्र बना रहा।

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अतिथि एवं प्रशासनिक अधिकारी

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सरस्वती साइकिल हितग्राही (सांकेतिक)

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निःशुल्क पुस्तक एवं गणवेश वितरण

२. सांसद रूपकुमारी चौधरी का प्रेरक उद्बोधन: ‘शिक्षा जीवन की सबसे बड़ी पूंजी’

इस पावन अवसर पर मुख्य अतिथि की आसंदी से बोलते हुए महासमुंद लोकसभा क्षेत्र की सांसद रूपकुमारी चौधरी ने अत्यंत मर्मस्पर्शी और प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय, पालकों और बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा किसी भी व्यक्ति, परिवार या समाज के विकास की पहली सीढ़ी होती है। शिक्षा केवल किताबी ज्ञान या उपाधि (डिग्री) प्राप्त करने का साधन नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को विवेकशील, सुसंस्कृत और आत्मनिर्भर बनाने का सशक्त माध्यम है।

उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी सरकार इस बात के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है कि देश और प्रदेश का कोई भी बच्चा धन या संसाधनों के अभाव में शिक्षा से वंचित न रहे। शासन द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाएं, जैसे- निःशुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण, निःशुल्क गणवेश योजना, मध्याह्न भोजन योजना और बालिकाओं के लिए सरस्वती साइकिल योजना, इसी दिशा में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम हैं। इन योजनाओं का एकमात्र उद्देश्य शिक्षा के स्तर को बढ़ाना और अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना है।

सांसद की विशेष पहल: बच्चों के बीच जमीन पर बैठकर साझा कीं यादें

कार्यक्रम के दौरान एक अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जब सांसद रूपकुमारी चौधरी अपने निर्धारित प्रोटोकॉल और मंच को छोड़कर अचानक छात्राओं के बीच नीचे जमीन पर जाकर बैठ गईं। उन्होंने छात्राओं का हाथ थामकर उनसे सीधा संवाद स्थापित किया। उन्होंने बच्चों से पूछा कि वे बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं और उन्हें स्कूल आना कैसा लग रहा है। सांसद ने अपने स्वयं के स्कूली दिनों के खट्टे-मीठे अनुभवों और संघर्षों को बच्चों के साथ साझा किया। इस अनौपचारिक और आत्मीय पल को यादगार बनाने के लिए उन्होंने बच्चों के साथ मोबाइल पर सेल्फी भी ली, जिससे छात्राओं का आत्मविश्वास और उत्साह कई गुना बढ़ गया।

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सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक दायित्व पर बल देते हुए सांसद ने उपस्थित अभिभावकों और पालकों से एक विशेष भावुक अपील की। उन्होंने कहा, “मैं क्षेत्र के सभी माता-पिता और अभिभावकों से आग्रह करती हूं कि वे अपने बच्चों की शिक्षा-दीक्षा में कोई कोर-कसर न छोड़ें। परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजें। धन-दौलत और जमीन-जायदाद नष्ट हो सकती है, लेकिन शिक्षा एक ऐसी पूंजी है जिसे कोई चुरा नहीं सकता। यह जीवनभर बच्चों का मार्गदर्शन करेगी।” उन्होंने आगे कहा कि बच्चे ही हमारे देश का भविष्य हैं और उन्हें शिक्षित तथा संस्कारवान बनाकर ही हम एक सशक्त, समृद्ध और समर्थ समाज का निर्माण कर सकते हैं।

३. विधायक जनक राम ध्रुव का संदेश: ‘कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे’

कार्यक्रम को विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए बिन्द्रानवागढ़ विधानसभा क्षेत्र के विधायक जनक राम ध्रुव ने स्थानीय आवश्यकताओं और शिक्षा की अनिवार्यता पर प्रकाश डाला। उन्होंने अत्यंत बेबाकी से कहा कि वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा का प्रसार करना और प्रत्येक बच्चे को शाला तक लाना हमारी सरकार और स्थानीय प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। शाला प्रवेशोत्सव केवल एक दिन का औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकल्प दिवस है कि क्षेत्र का एक भी बच्चा स्कूल की चौखट से दूर नहीं रहेगा।

विधायक ने सामाजिक सहभागिता पर जोर देते हुए कहा कि केवल सरकार या प्रशासन के प्रयासों से शत-प्रतिशत साक्षरता और गुणात्मक शिक्षा का लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पंच-सरपंचों और विशेषकर पालकों को सक्रिय भागीदारी निभानी होगी। जब समाज का हर व्यक्ति इस बात के लिए जागरूक होगा कि उसके आस-पड़ोस का हर बच्चा स्कूल जाए, तभी हम सही मायनों में शिक्षित, विकसित और आत्मनिर्भर बन पाएंगे।

उन्होंने अध्यापकों और प्राचार्यों से भी अपील की कि वे स्कूल के वातावरण को इतना रोचक और आनंदमयी बनाएं कि बच्चों का मन स्वतः ही विद्यालय आने के लिए आतुर रहे। खेल-खेल में शिक्षा, व्यावहारिक ज्ञान और नैतिक मूल्यों का समावेश आज की महती आवश्यकता है। स्कूल ही वह स्थान है जहां बच्चों के प्रारंभिक जीवन की दिशा तय होती है, इसलिए शिक्षकों का उत्तरदायित्व समाज में सबसे बड़ा है।

४. प्रशासनिक प्रतिबद्धता: कलेक्टर बी.एस. उइके के निर्देश

गरियाबंद जिले के संवेदनशील और कर्तव्यनिष्ठ कलेक्टर बी.एस. उइके ने प्रशासनिक दृष्टिकोण रखते हुए शिक्षा की मजबूत नींव पर बल दिया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि जिला प्रशासन जिले के सभी वनांचल और दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा की अधोसंरचना को मजबूत करने और शिक्षकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। शिक्षा ही वह अचूक माध्यम है जो बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करती है।

कलेक्टर ने सीधे विद्यार्थियों से रूबरू होते हुए कहा, “प्रिय बच्चों, आज से आपके जीवन का एक नया और अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय शुरू हो रहा है। आप सभी नियमित रूप से विद्यालय आएं, अपने शिक्षकों की बातों को ध्यान से सुनें और पूरी लगन, निष्ठा व कड़ी मेहनत के साथ अध्ययन करें। आपके लिए शासन और प्रशासन हर जरूरी सुविधा उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।” इसके साथ ही उन्होंने अभिभावकों को सचेत करते हुए कहा कि वे बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के प्रति निरंतर सजग रहें, समय-समय पर स्कूल जाकर शिक्षकों से बच्चों की प्रगति की जानकारी लें और घर पर भी पढ़ाई का माहौल तैयार करें।

५. सरस्वती साइकिल योजना एवं शासकीय सामग्रियों का वितरण

इस जिला स्तरीय प्रवेशोत्सव के मुख्य आकर्षणों में से एक रहा शासन की विभिन्न लोक-कल्याणकारी योजनाओं के तहत हितग्राही सामग्रियों का वितरण। अतिथियों के कर-कमलों से नवीन सत्र में प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं को उनकी कक्षाओं की चमचमाती नई पाठ्यपुस्तकें और निःशुल्क गणवेश (यूनिफॉर्म) के सेट प्रदान किए गए। किताबें और नए कपड़े पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे।

विशेष रूप से, बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने और दूर-दराज के गांवों से स्कूल आने में होने वाली कठिनाइयों को दूर करने के उद्देश्य से संचालित ‘सरस्वती साइकिल योजना’ के अंतर्गत कक्षा ९वीं में प्रवेश लेने वाली छात्राओं को साइकिलों का वितरण किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान सांकेतिक रूप से ५ होनहार बालिकाओं को मंच के समीप अतिथियों द्वारा हरी झंडी दिखाकर और साइकिल की चाबियां सौंपकर लाभान्वित किया गया। साइकिल प्राप्त करने वाली छात्राओं ने सरकार की इस योजना के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें स्कूल आने-जाने में समय की बचत होगी और वे अपनी पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगी।

क्र. वितरित की गई सामग्री / योजना लक्षित वर्ग / लाभार्थी मुख्य उद्देश्य
निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें नवीन सत्र के समस्त छात्र-छात्राएं समय पर अध्ययन सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करना
निःशुल्क शाला गणवेश प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर के विद्यार्थी समानता की भावना और स्कूल के प्रति आकर्षण बढ़ाना
सरस्वती साइकिल योजना कक्षा ९वीं में प्रवेश लेने वाली छात्राएं बालिका ड्रॉप-आउट दर को कम करना और सुगम आवागमन
मिठाई एवं तिलक द्वारा स्वागत सभी नवप्रवेशी नन्हे बच्चे स्कूली भय को दूर करना और आत्मीय वातावरण देना

६. रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की छटा

औपचारिक संबोधनों और वितरण कार्यक्रम के पश्चात शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल मैनपुर के छात्र-छात्राओं द्वारा अत्यंत मनमोहक और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी गईं। बच्चों ने पारंपरिक छत्तीसगढ़ी लोक नृत्यों, करमा, सुआ और ददरिया की धुनों पर शानदार नृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमुदाय को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके अतिरिक्त, कुछ छात्राओं ने शिक्षा के महत्व और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के संदेश पर आधारित एक लघु नाटिका भी प्रस्तुत की, जिसे दर्शकों की खूब वाहवाही और सराहना मिली। इन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मनोरंजन के साथ-साथ एक सकारात्मक सामाजिक संदेश का संचार भी किया।

७. गरिमामयी उपस्थिति एवं आभार प्रदर्शन

इस ऐतिहासिक जिला स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक वरिष्ठ जन-प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रिय सहभागिता रही। मंच पर और कार्यक्रम में गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराने वालों में जिला पंचायत अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप, जिला पंचायत उपाध्यक्ष लालिमा ठाकुर, क्षेत्र के वरिष्ठ और प्रतिष्ठित नागरिक गोवर्धन मांझी, अनिल चंद्राकर, गरियाबंद के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) राजेश चंद्राकर, स्थानीय ग्राम पंचायत मैनपुर की सरपंच हनिता नायक सहित बड़ी संख्या में जनपद सदस्य, पंच, स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी, संकुल समन्वयक, क्षेत्र के शिक्षक-शिक्षिकाएं, गणमान्य नागरिक, भारी संख्या में स्कूली बच्चे और उनके अभिभावक उपस्थित थे।

कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय के प्राचार्य द्वारा सभी अतिथियों, प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस प्रशासन, पालकों और प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से कार्यक्रम को सफल बनाने वाले सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। राष्ट्रगान के सामूहिक गायन के साथ इस भव्य और ऐतिहासिक जिला स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव कार्यक्रम का आधिकारिक समापन हुआ, जिसने मैनपुर और संपूर्ण गरियाबंद जिले में शिक्षा के एक नए, ऊर्जस्वित और स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत कर दी है।