गरियाबंद जिले के किसानों के लिए राहत: खरीफ 2026-27 फसल बीमा की अंतिम तिथि बढ़कर हुई 14 अगस्त
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के अन्नदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर सामने आई है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत खरीफ मौसम 2026-27 के लिए फसलों का बीमा कराने की निर्धारित अंतिम तिथि को आगे बढ़ा दिया गया है। पहले जहां यह अंतिम तिथि 31 जुलाई तय की गई थी, वहीं अब इसे बढ़ाकर 14 अगस्त कर दिया गया है। कृषि विभाग द्वारा लिए गए इस निर्णय से उन किसानों को बड़ी राहत मिली है जो किन्हीं कारणों से तय समय सीमा के भीतर अपनी फसलों का बीमा नहीं करवा पाए थे। अब जिले के सभी पात्र किसान आगामी 14 अगस्त तक बिना किसी बाधा के अपनी फसलों का सुरक्षा कवच सुनिश्चित कर सकते हैं।
योजना का मुख्य उद्देश्य और सुरक्षा का दायरा
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का मूल उद्देश्य देश के किसानों को अप्रत्याशित प्राकृतिक आपदाओं और मौसम की अनिश्चितता से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाना है। कृषि प्रधान देश में खेती हमेशा से मौसम की मेहरबानी पर टिकी रही है, ऐसे में यह योजना किसानों के लिए वित्तीय सुरक्षा ढाल का काम करती है। गरियाबंद जिले में भी खरीफ सीजन के दौरान कई बार बेमौसम बारिश, सूखा, या कीट प्रकोप जैसी समस्याएं सामने आती हैं।
सुरक्षा के प्रमुख बिंदु: इस योजना के माध्यम से प्राकृतिक आपदाओं, प्रतिकूल मौसम की स्थिति, सूखे की मार, बाढ़, जलभराव की समस्या, कीट एवं रोगों के प्रकोप तथा ओलावृष्टि जैसी विपदाओं के कारण फसल को होने वाले संपूर्ण नुकसान की स्थिति में किसानों को सीधे आर्थिक मुआवजा प्रदान किया जाता है।
इस योजना का लाभ उठाने के लिए जिले के व्यापक स्तर पर किसानों को जागरूक किया जा रहा है, ताकि कोई भी अन्नदाता प्राकृतिक आपदा की अनिश्चितता के आगे लाचार न रहे।
किन-किन फसलों को किया गया है शामिल?
खरीफ मौसम 2026-27 के लिए गरियाबंद जिले में विभिन्न प्रकार की प्रमुख खाद्य फसलों, दलहन और तिलहन फसलों को बीमा के दायरे में अधिसूचित किया गया है। किसान अपनी बोई गई मुख्य फसलों के अनुसार प्रीमियम जमा कर बीमा का लाभ ले सकते हैं।
- अनाज फसलें: धान (सिंचित एवं असिंचित), मक्का
- दलहन फसलें: अरहर, मूंग, उड़द
- तिलहन फसलें: मूंगफली
- लघुधान्य (मिलेट्स) फसलें: कोदो, कुटकी तथा रागी
योजना के तहत बीमा की प्रशासनिक इकाइयों का भी निर्धारण किया गया है। मुख्य फसलों के लिए बीमा की इकाई ‘ग्राम’ निर्धारित की गई है, जबकि अन्य विशिष्ट फसलों के लिए ‘राजस्व निरीक्षक मंडल’ को इकाई माना गया है, जिससे नुकसानी के आकलन में पारदर्शिता और सटीकता बनी रहे।
कौन-कौन किसान उठा सकते हैं लाभ?
यह योजना समाज के विभिन्न वर्गों के कृષकों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इसमें पारंपरिक भू-धारक (भूमि के मालिक) किसानों के साथ-साथ भूमि बटाई पर लेकर खेती करने वाले बटाईदार किसान भी पूरी तरह शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा, जिन किसानों ने बैंकों से कृषि ऋण नहीं लिया है (गैर ऋणी किसान), वे भी स्वैच्छिक आधार पर अपनी इच्छा से इस योजना से जुड़कर अपनी फसलों का बीमा करवा सकते हैं।
प्रीमियम दरें और प्रति हेक्टेयर बीमित राशि का विवरण
खरीफ मौसम 2026 के लिए किसानों को बेहद कम प्रीमियम पर भारी-भरकम बीमा सुरक्षा प्रदान की जा रही है। तय नियमों के अनुसार, किसानों को अनाज, दलहन एवं तिलहन फसलों पर कुल बीमित राशि का मात्र 2 प्रतिशत हिस्सा प्रीमियम के रूप में देना होगा, जबकि लघुधान्य (मिलेट्स) फसलों के लिए यह दर और भी कम यानी मात्र 1 प्रतिशत निर्धारित की गई है।
| फसल का नाम | प्रति हेक्टेयर बीमित राशि (रुपये में) | किसान द्वारा देय प्रीमियम राशि (रुपये में) |
|---|---|---|
| धान (सिंचित) | 66,000 | 1,320 |
| धान (असिंचित) | 49,500 | 990 |
| मक्का | 50,600 | 1,012 |
| अरहर | 46,200 | 924 |
| उड़द एवं मूंग | 27,500 | 550 |
| मूंगफली | 51,700 | 1,034 |
| कोदो | 19,800 | 198 |
| कुटकी | 20,900 | 209 |
| रागी | 18,700 | 187 |
बीमा करवाने के लिए आवश्यक दस्तावेज और प्रक्रिया
गैर ऋणी किसानों को अपनी फसल का बीमा सुनिश्चित करने के लिए कुछ चुनिंदा दस्तावेज अपने नजदीकी केंद्र पर प्रस्तुत करने होंगे। आवेदन के समय किसानों को निम्नलिखित दस्तावेज साथ रखने अनिवार्य हैं:
- आधार कार्ड की छायाप्रति
- बैंक पासबुक की कॉपी (खाता विवरण के लिए)
- भूमि के दस्तावेज जैसे बी-1 और पी-2
- संबंधित फसल बुवाई प्रमाण पत्र
किसान इन दस्तावेजों के साथ अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), लोक सेवा केंद्र, या अपने संबंधित बैंक की शाखा के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, गरियाबंद जिले के किसान सहकारी समितियों, कृषि विभाग के मैदानी अमले और इस वर्ष के लिए अधिकृत बीमा प्रदाता कंपनी बजफ जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के प्रतिनिधियों के माध्यम से भी संपर्क साधकर बीमा करवा सकते हैं.
फसल क्षति होने पर क्या करें? (दावा प्रक्रिया एवं हेल्पलाइन)
यदि दुर्भाग्यवश मौसम की मार या किसी अन्य प्राकृतिक आपदा के कारण फसल को नुकसान पहुंचता है, तो किसानों को समय पर सूचना दर्ज करानी होगी। प्रावधानों के अनुसार, बीमित किसानों को फसल क्षति होने के 72 घंटे के भीतर भारत सरकार के आधिकारिक कृषि रक्षक पोर्टल पर या टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 14447 पर तुरंत अपनी शिकायत दर्ज करानी होगी, ताकि नुकसान का समय पर आकलन किया जा सके।
कृषि विभाग की विशेष अपील
गरियाबंद जिला कृषि विभाग ने क्षेत्र के समस्त किसानों से पुरजोर अपील की है कि वे वर्तमान मौसम की अनिश्चित परिस्थितियों को मद्देनजर रखते हुए किसी भी अंतिम दिन की भीड़ से बचने के लिए 14 अगस्त की बढ़ी हुई अंतिम तिथि से पहले ही अपनी फसलों का बीमा अवश्य करा लें। समय पर बीमा कराने से किसानों को किसी भी आपातकालीन प्राकृतिक आपदा के समय सरकारी सहायता और योजना का पूरा लाभ सुगमता से मिल सकेगा।











