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गरियाबंद: शासकीय विद्यालय में शराबखोरी का वीडियो वायरल होने पर दो शिक्षक निलंबित






गरियाबंद: शासकीय विद्यालय में शराबखोरी का वीडियो वायरल होने पर दो शिक्षक निलंबित – विस्तृत समाचार


गरियाबंद | 03 अगस्त 2026

गरियाबंद: शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला में शराबखोरी का वीडियो वायरल होने पर दो शिक्षक तत्काल प्रभाव से निलंबित

विशेष संवाददाता | शिक्षा विभाग अपडेट्स

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से शिक्षा जगत को शर्मसार करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। विकासखंड मैनपुर के अंतर्गत आने वाले शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला देवझर अमली के दो शिक्षकों को विद्यालय परिसर और कार्यालय कक्ष के भीतर शराब का सेवन करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया और विभिन्न वेब न्यूज पोर्टल्स पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए दोनों शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

घटना का विवरण: कार्यालय कक्ष बना मयखाना

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गत 1 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और लोकल वेब न्यूज चैनलों पर एक वीडियो क्लिप सामने आई। इस वीडियो में शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला देवझर अमली के शिक्षक एल.बी. श्री कमल सिंह दीवान एवं श्री मनोज कुमार भारद्वाज विद्यालय के आधिकारिक कार्यालय कक्ष के भीतर बैठकर शराब का सेवन करते और चखना खाते हुए नजर आ रहे थे। विद्यालय जैसा पवित्र स्थान, जिसे ज्ञान का मंदिर कहा जाता है, वहां इस तरह की अशोभनीय और गैर-जिम्मेदाराना हरकत ने स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया।

वीडियो सामने आते ही क्षेत्र में सनसनी फैल गई। अभिभावकों और शिक्षाविदों ने इस कृत्य की कड़ी निंदा की और सोशल मीडिया के माध्यम से जिला प्रशासन से तत्काल कड़ी कार्रवाई की मांग की। वायरल वीडियो की सत्यता की प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हो गया कि वीडियो में नजर आ रहे दोनों शिक्षक वही हैं और घटना विद्यालय परिसर की ही है।

निलंबित शिक्षकों का विवरण:

  • श्री कमल सिंह दीवान – शिक्षक (एल.बी.), शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला देवझर अमली, विकासखंड मैनपुर।
  • श्री मनोज कुमार भारद्वाज – शिक्षक (एल.बी.), शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला देवझर अमली, विकासखंड मैनपुर।

शिक्षकीय गरिमा और दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही

बच्चों के भविष्य को गढ़ने वाले शिक्षकों द्वारा इस तरह के कृत्य को प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में यह पाया गया कि दोनों शिक्षकों का यह आचरण न केवल शिक्षण पेशे की गरिमा के खिलाफ है, बल्कि यह उनके शिक्षकीय दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और अनुशासनहीनता का खुला प्रमाण है। विद्यालय परिसर को इस प्रकार की गतिविधियों का अड्डा बनाना शिक्षा के मंदिर की पवित्रता पर एक बड़ा आघात है।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, शिक्षकों का यह आचरण सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 का स्पष्ट उल्लंघन है। सरकारी कर्मचारियों और विशेषकर शिक्षकों से समाज में उच्च नैतिक आचरण की अपेक्षा की जाती है, लेकिन इन शिक्षकों ने अपने आचरण से पूरे विभाग को कलंकित किया है।

संभागीय संयुक्त संचालक द्वारा निलंबन आदेश जारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी, मैनपुर द्वारा त्वरित रूप से मैदानी रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को प्रेषित की गई। इस प्रतिवेदन के आधार पर शिक्षा संभाग के संभागीय संयुक्त संचालक श्री संजीव श्रीवास्तव ने कड़ा कदम उठाते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए दोनों शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

जारी आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान दोनों शिक्षकों का मुख्यालय कार्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी, मैनपुर नियत किया गया है। इसका अर्थ यह है कि निलंबन काल में दोनों शिक्षक बिना अनुमति के अपना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे और उन्हें उपस्थिति दर्ज करानी होगी। इसके साथ ही, नियमानुसार उन्हें इस अवधि में जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।

शिक्षा विभाग की सख्त चेतावनी

इस घटना के बाद गरियाबंद जिला शिक्षा प्रशासन ने जिले के सभी विद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों को सख्त हिदायत दी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में इस प्रकार की अनुशासनहीनता, नशे की प्रवृत्ति या शाला की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में लिप्त पाए जाने वाले अन्य कर्मचारियों के खिलाफ भी बिना किसी नरमी के कठोर से कठोर अनुशासनात्मक और वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीणों और छात्र-छात्राओं के अभिभावकों ने प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई का स्वागत किया है, साथ ही मांग की है कि ऐसे शिक्षकों के खिलाफ विभागीय जांच को शीघ्र पूरा कर स्थायी बर्खास्तगी जैसी कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई अन्य शिक्षक इस तरह की पुनरावृत्ति करने की हिम्मत न जुटा सके।