अंबिकापुर में हुल क्रांति दिवस एवं भगवान बिरसा मुण्डा की 150वीं जयंती का भव्य आयोजन, डॉ. आशा लकड़ा की उपस्थिति में जुटे 14 जनजातीय समाज के प्रतिनिधि






अंबिकापुर में हुल क्रांति दिवस एवं भगवान बिरसा मुण्डा की 150वीं जयंती का भव्य आयोजन: डॉ. आशा लकड़ा की उपस्थिति में जुटे 14 जनजातीय समाज के प्रतिनिधि

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भगवान बिरसा मुण्डा की 150वीं जयंती और हुल क्रांति दिवस पर अंबिकापुर में जनजातीय गौरव का महासंगम, डॉ. आशा लकड़ा ने सुनीं जनसमस्याएं

स्थान: अंबिकापुर (सरगुजा) |
ब्यूरो रिपोर्ट: प्रदेश खबर नेटवर्क |
अपडेटेड: 2026

अंबिकापुर। जनजातीय अस्मिता, स्वाभिमान और स्वतंत्रता संग्राम के महानायक भगवान बिरसा मुण्डा की 150वीं जयंती के ऐतिहासिक अवसर पर सरगुजा जिला मुख्यालय के पीजी कॉलेज ऑडिटोरियम में हुल क्रांति दिवस का भव्य और गरिमामय आयोजन संपन्न हुआ। जिला प्रशासन सरगुजा एवं आदिम जाति विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस गरिमामयी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (भारत सरकार) की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में जनजातीय समाज के समृद्ध इतिहास, गौरवशाली संस्कृति और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए किए गए ऐतिहासिक संघर्षों को याद किया गया।

समारोह में सरगुजा संभाग और जिले के कोने-कोने से आए 14 जनजातीय समाजों के पारंपरिक प्रतिनिधियों, समाज प्रमुखों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा प्रबुद्ध नागरिकों सहित लगभग 1,500 से अधिक लोगों की स्वस्फूर्त और विशाल उपस्थिति रही। पूरा ऑडिटोरियम जनजातीय संस्कृति के रंगों और शहीदों के जयकारों से गुंजायमान रहा।

शहीदों के छायाचित्रों पर दीप प्रज्ज्वलन से हुआ शुभारंभ

समारोह का विधिवत और भव्य शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. आशा लकड़ा एवं विशिष्ट जनों द्वारा जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों के छायाचित्रों पर दीप प्रज्ज्वलन, माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर भगवान बिरसा मुण्डा, शहीद वीर नारायण सिंह, मांझी राम गोड़, सिद्धू-कान्हू, महान समाज सुधारक राजमोहनी देवी, संत गहिरा गुरु एवं जगदेव राम उरांव के तैलचित्रों पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उनके बलिदान और सामाजिक योगदान को नमन किया गया। इसके उपरांत, कार्यक्रम में पहुंचे 14 जनजातीय समाजों के प्रमुखों और पारंपरिक अगुओं ने मुख्य अतिथि डॉ. आशा लकड़ा का पारंपरिक आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें पुष्पगुच्छ भेंट किया।

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“हुल क्रांति और उलगुलान केवल इतिहास के पन्ने नहीं हैं, बल्कि यह हमारे पुरखों के स्वाभिमान, अद्वितीय साहस और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए किए गए बलिदान की जीवंत गाथाएं हैं। नई पीढ़ी को इस गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।” – डॉ. आशा लकड़ा, सदस्य, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अधिकारों और कार्यों पर विस्तृत प्रकाश

अपने मुख्य अतिथि उद्बोधन में डॉ. आशा लकड़ा ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के संवैधानिक अधिकारों, कर्तव्यों, कार्यप्रणाली और जनजातीय हितों की रक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों की विस्तृत और महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संविधान ने अनुसूचित जनजातियों को जो विशेष अधिकार और सुरक्षा कवच प्रदान किए हैं, उनकी अक्षुण्ण रक्षा के लिए आयोग पूरी प्रतिबद्धता के साथ निरंतर कार्य कर रहा है। चाहे सामाजिक विकास हो, शैक्षणिक उत्थान हो या फिर आर्थिक सशक्तिकरण, आयोग हर स्तर पर जनजातीय समाज की आवाज बनकर खड़ा है।

उन्होंने इतिहास के स्वर्णिम पन्नों को रेखांकित करते हुए भगवान बिरसा मुण्डा के क्रांतिकारी संघर्ष, उनके अद्वितीय नेतृत्व और जनजातीय अस्मिता की रक्षा में दिए गए ऐतिहासिक योगदान को विस्तार से स्मरण किया। इसके साथ ही, उन्होंने हुल क्रांति के महान सूत्रधार और महानायक सिद्धू-कान्हू के अदम्य साहस, अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों के खिलाफ उनके शंखनाद और मातृभूमि के लिए हंसते-हंसते प्राण न्यौछावर करने के सर्वोच्च बलिदान को नमन करते हुए श्रद्धांजलि दी।

कार्यक्रम के दौरान जनसुनवाई: समाज प्रमुखों ने सौंपे सुझाव और समस्याएं

हुल क्रांति दिवस के इस मंच का उपयोग जनजातीय समाज के सीधे सशक्तिकरण के लिए भी किया गया। कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि डॉ. आशा लकड़ा ने एक विशेष जनसुनवाई सत्र का संचालन किया। इस जनसुनवाई में सरगुजा जिले के विभिन्न दूरस्थ अंचलों से आए जनजातीय समाजों के प्रतिनिधियों, ग्रामीणों और पारंपरिक अगुओं ने अपनी स्थानीय समस्याओं, भूमि अधिकारों, शैक्षणिक सुविधाओं, छात्रवृत्ति और सामुदायिक विकास से जुड़े विषयों पर उन्हें सीधे अवगत कराया। समाज प्रमुखों ने जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन को लेकर कई महत्वपूर्ण लिखित सुझाव और ज्ञापन भी सौंपे, जिस पर आयोग की सदस्य ने नियमानुसार त्वरित और सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

इन 14 जनजातीय समाजों के प्रमुखों की रही ऐतिहासिक उपस्थिति

अंबिकापुर के इस गरिमामय मंच पर सरगुजा क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता और एकता का अनूठा नजारा देखने को मिला। कार्यक्रम में मुख्य रूप से निम्नलिखित 14 प्रमुख जनजातीय समाजों के संभाग और जिला स्तरीय पदाधिकारी, मांझी, बैगा और पारंपरिक मुखिया विशेष रूप से उपस्थित रहे:

  • उरांव समाज
  • कंवर समाज
  • मांझी समाज
  • गोंड समाज
  • खैरवार समाज
  • पंडो समाज
  • नागवंशी समाज
  • मझवार समाज
  • नगेसिया समाज
  • कोरवा समाज
  • बिंझिया समाज
  • मुण्डा समाज
  • भुईया समाज
  • पहाड़ी कोरवा समाज

आयोजन का मूल उद्देश्य: नई पीढ़ी में स्वाभिमान और चेतना का संचार

इस वृहद कार्यक्रम के आयोजन का मुख्य उद्देश्य जनजातीय समाज के उस गौरवशाली इतिहास, समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, अद्वितीय संघर्ष और महान बलिदानों को नमन करना था, जिन्हें इतिहास के मुख्य पन्नों में वह स्थान नहीं मिल सका जिसके वे हकदार थे। इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से जिला प्रशासन और आदिम जाति विकास विभाग का लक्ष्य युवा पीढ़ी और बच्चों में अपनी संस्कृति के प्रति जागरूकता, स्वाभिमान, आत्मगौरव और देशप्रेम की प्रेरणा का संचार करना है, ताकि वे आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपनी जड़ों और परंपराओं से मजबूती से जुड़े रहें।

सहायक आयुक्त डॉ. ललित शुक्ला ने व्यक्त किया आभार

समारोह के सफल और गरिमामय संचालन के बाद, कार्यक्रम के समापन सत्र में आदिम जाति विकास विभाग सरगुजा के सहायक आयुक्त डॉ. ललित शुक्ला ने मंच पर आसीन मुख्य अतिथि, विभिन्न विभागों के प्रशासनिक अधिकारियों, संभाग के सभी कोने से आए 14 जनजातीय समाजों के सम्मानित अध्यक्षों, समाज प्रमुखों, महिला प्रतिनिधियों, मीडिया जगत और ऑडिटोरियम में उपस्थित विशाल जनसमुदाय के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने जिला प्रशासन की ओर से आश्वस्त किया कि जनजातीय विकास और कल्याण की सभी योजनाओं को अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए विभाग पूरी निष्ठा से कार्य करता रहेगा।