श्रीकृष्ण जन्मस्थान में वित्तीय पारदर्शिता की मांग, करोड़ों श्रद्धालुओं के दान का हिसाब सार्वजनिक करने की अपील
मथुरा: सोशल आउटरीच कांग्रेस, मथुरा के जिलाध्यक्ष दीपक पाराशर ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान/श्रीकृष्ण जन्मभूमि न्यास के सचिव को विस्तृत प्रार्थना-पत्र भेजकर मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान एवं चढ़ावे के संबंध में वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने विगत छह माह के दौरान प्राप्त दान, आय-व्यय और ऑडिट से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने का आग्रह किया है।
प्रार्थना-पत्र में कहा गया है कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान करोड़ों सनातन श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु नकद धनराशि, स्वर्ण, रजत एवं अन्य बहुमूल्य वस्तुएं भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में अर्पित करते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास होता है कि उनकी अर्पित राशि का उपयोग मंदिर व्यवस्था, भगवान की सेवा, धर्मार्थ कार्यों एवं जनकल्याण के लिए पारदर्शी तरीके से किया जाता है।
दीपक पाराशर ने कहा कि देश के कई प्रमुख धार्मिक संस्थानों में समय-समय पर वित्तीय प्रबंधन को लेकर प्रश्न उठने के बाद अब श्रद्धालुओं की अपेक्षा है कि प्रमुख धार्मिक न्यास स्वयं अपने आय-व्यय का विवरण सार्वजनिक करें। उनका मानना है कि यदि श्रीकृष्ण जन्मभूमि न्यास स्वेच्छा से वित्तीय जानकारी सार्वजनिक करता है तो इससे श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक मजबूत होगा तथा अन्य धार्मिक संस्थानों के लिए भी एक सकारात्मक उदाहरण स्थापित होगा।
प्रार्थना-पत्र में मांगी गई प्रमुख जानकारियां
- विगत छह माह में दान-पात्रों से प्राप्त कुल नकद चढ़ावे का विवरण।
- ऑनलाइन, चेक, ड्राफ्ट, स्वर्ण, रजत एवं अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के रूप में प्राप्त दान का रिकॉर्ड।
- दान-पात्र खोलने एवं गणना की निर्धारित प्रक्रिया (SOP)।
- पिछले छह माह का आय-व्यय विवरण।
- यदि कोई आंतरिक अथवा बाह्य ऑडिट हुआ हो तो उसकी रिपोर्ट।
- चढ़ावा गणना प्रक्रिया से संबंधित सीसीटीवी अभिलेखों के निरीक्षण अथवा प्रमाणित प्रति।
- गौ-सेवा, शिक्षा, चिकित्सा, जनकल्याण, मंदिर रखरखाव, धार्मिक गतिविधियों एवं श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर हुए खर्च का विस्तृत विवरण।
दीपक पाराशर ने स्पष्ट किया कि इस पहल का उद्देश्य किसी व्यक्ति, ट्रस्टी या संस्था पर आरोप लगाना नहीं है, बल्कि धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता, नैतिक जवाबदेही और श्रद्धालुओं के विश्वास को मजबूत करना है। उन्होंने सुझाव दिया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि न्यास समय-समय पर अपनी आय-व्यय विवरणी और ऑडिट रिपोर्ट स्वेच्छा से सार्वजनिक करने की परंपरा शुरू करे।
उन्होंने बताया कि इस प्रार्थना-पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव (धर्मार्थ कार्य विभाग), जिलाधिकारी, मंडलायुक्त सहित सनातन धर्म के चारों आम्नाय पीठों के जगद्गुरु शंकराचार्यों एवं प्रमुख वैष्णव सम्प्रदायों के जगद्गुरुओं को भी सूचनार्थ एवं आवश्यक संज्ञान के लिए भेजी गई है।











