गरियाबंद फौज़ CRPF में चयन के बाद पूरा गांव ने ऐसा किया विदाई देशप्रेम की अलख जगाई, देशभक्ति के नारे संग रैली भावपूर्ण विदाई l

गरियाबंद फौज़ CRPF में चयन के बाद पूरा गांव ने ऐसा किया विदाई देशप्रेम की अलख जगाई, देशभक्ति के नारे संग रैली भावपूर्ण विदाई l

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देवभोग से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत मूंगिया के आश्रित गाँव मुरली गुड़ा में देशप्रेम की की अलख जगाई है। पूरे गांववाले भारत माता की जयकारे लगाते हुए रैली निकाल कर गांव के युवक को देश की रक्षा के लिए भावपूर्ण विदा किया यहां के युवक अरुण कुमार वैष्णव पिता सदा दास का चयन सीआरपीएफ में हुआ तो पूरा गांव उसे ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए गांव के अंतिम छोर तक छोड़ने आया गाँव में सैकड़ो की तादात में लोगों ने रैली भी निकाली सीआरपीएफ में चयनित होने वाले गांव के पहले युवक के सम्मान में ग्रामीणों ने जमकर खुशी मनाई, देशभक्ति के नारे लगाए। पटाखे जलाए। लाडले को छाती चौड़ी करके देश की रक्षा के लिए विदा किया।

कड़ी मेहनत और लगन से पाया सम्मान फौज़ में हुआ चयन

अरुण कुमार वैष्णव के बारे में ग्रामीणों ने बताई की अरुण का सेना में जाने का सपना बचपन से ही था जिसके चलते कक्षा 9 वी से ही तैयारी कर रहा था जो कि आज रंग लाई है कई साल की कड़ी मेहनत के बाद हुआ चयन हुआ 24 साल का युवक अरुण वैष्णव अपने कई साल की कड़ी मेहनत के बाद सीआरपीएफ में चयनित हुआ है। उसकी उपलब्धि पर पूरे गांव में खुशी का माहौल देखते ही बनता है l

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अरुण के पिता सदा दास ने कहा कि उसे गर्व है कि उसका बेटा देश की रक्षा करने सीआरपीएफ में सेवा देगा। जानकारी दी कि बेटा अरुण शुरु से मेहनत और काबिलियत पर आज पूरा गांव गौरवान्वित हो रहा है। अरुण कई साल से सीआरपीएफ में जाने के लिए मेहनत करता रहा। हरदम तैयारी करता रहा अब उसका सपना पूरा हो गया है। उनका चयन सीआरपीएफ में हो चुका है। वह सेना में अपनी सेवा देगा।

गांव में पहली बार फौजी का ताज़

ग्राम मुरलीगुड़ा में पहली बार गांव के बेटे ने आज फौजी का सरताज अपने माथे पर लगाया है पूरा गांव खुशी की लहर से झूम उठा है और उनको बधाई दे रहे हैं जब उनकी विदाई हुआ तो पूरे गांव वाले ने जोर-शोर के साथ उनको बस स्टेशन तक छोड़ने आए हम आप लोगों को बताना चाहेंगे कि इस गांव में पहली बार फौजी पर चयन हुआ है

युवा वर्ग सीआरपीएफ में जाने के लिए कई तैयारियां करते हैं दिन रात मेहनत करते हैं कड़ी पसीना बहाने के बाद भी उन्हें यह सम्मान नहीं मिल पाता है पर अरुण ने यह सपना साकार करके बता दिया है की मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती है बस अपने अंदर लगन आत्मविश्वास होना चाहिए दृढ़ संकल्प इच्छाशक्ति होना चाहिए सफलता एक दिन जरूर मिलती है l

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