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युवा स्वरोजगार योजना से दूर हुई राकेश की बेरोजगारी

वनांचल गॉंव में खोला किराना दुकान, साढ़े चार लाख प्रतिवर्ष टर्नओवर

युवा स्वरोजगार योजना से दूर हुई राकेश की बेरोजगारी

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ब्यूरो चीफ/सरगुजा//  ’’जहां चाह वहां राह’’ अर्थात अगर कुछ करने की इच्छा शक्ति हो तो किसी भी परिस्थिति में मंजिल तक पहुंचने का रास्ता मिल ही जाता है। इस कहावत को दृढ़ निश्चयी अवश्य चरितार्थ करते हैं। जिले के उदयपुर विकासखण्ड के दूरस्थ वनांचल ग्राम केदमा के राकेश सिंह ने भी अपने मजबूत इरादों से बेरोजगारी को मात देकर इसे सिद्ध किया है। राकेश ने मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना का लाभ लेकर अपने गाँव में किराना का दुकान खोलकर स्वरोजगार को अपनाया है। इससे राकेश की बेरोजगारी तो दूर हुई है साथ ही अन्य बेरोजगार युवाओ के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए हैं। किराना एवं जनरल स्टोर से अब साढ़े चार लाख प्रतिवर्ष टार्न ओवर मिल रहा है।

वनांचल ग्राम केदमा निवासी 25 वर्षीय युवा राकेश सिंह बताते है कि उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि एक कृषक परिवार से है, जहाँ आय का जरिया कृषि ही है। वे पिता को  बंटवारे में मिली कृषि भूमि पर धान की खेती कर जीवन यापन करते है जो अपर्याप्त है। गांव में 12 वीं की पढ़ाई पूरी कर चार वर्ष पूर्व बी.एस.सी. की पढ़ाई करने अम्बिकापुर आये थे । घर की माली हालत ठीक नही होने के कारण उन्हें यहाँ रहकर पढ़ाई करने में दिक्कत हो रही थी। बी.एस.सी. अंतिम वर्ष की पढ़ाई के दौरान उन्होंने सोच लिया था कि अब आगे अम्बिकापुर में रहकर पढ़ाई करना संभव नही होगा और घर की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कुछ करना ही होगा।

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राकेश ने बताया कि वर्ष 2020 के फरवरी माह में कुछ काम से जिला न्यायालय आना हुआ था जहां कुछ दोस्तों ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के बारे में बताया। योजना के बारे में जानकर तत्काल जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र जाकर अधिकारियों से योजना के बारे में विस्तार से जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि योजना के तहत 1 लाख रुपए के ऋण स्वीकृति में 25 हजार की सब्सिडी मिलेगी। कुछ दिन बाद योजना के तहत किराना दुकान खोलने हेतु 1 लाख ऋण लेने हेतु फार्म भी जमा कर दिया। मार्च माह में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के केदमा शाखा से राशि स्वीकृत हो गई। गांव के अपने पुराने कच्चा मकान के एक कमरे में किराना और जनरल दुकान शुरू की। राकेश सिंह ने बताया कि दुकान संभालने के साथ-साथ प्राइवेट पढ़ाई भी जारी रखा है। इस वर्ष एम.ए. अंग्रेजी अंतिम वर्ष की परीक्षा देंगे।

राकेश सिंह ने बताया कि दुकान से घर की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है। ऋण राशि भी बहुत कम शेष है। उन्होंने बताया कि अब दुकान में कम्प्यूटर और प्रिंटर भी रख लिए है जिससे विभिन्न प्रकार के आनलाईन आवेदन भरने तथा आमंत्रण कार्ड प्रिंटिंग का कार्य भी करते है जिससे अतिरिक्त आय मिल जाता है। राकेश ने बताया कि उनकी इच्छा कच्चे मकान को पक्का मकान में तब्दील करना है जो एक दिन अवश्य पूरा होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री स्व रोजगार योजना को युवाओं के लिए एक बेहतर योजना बताते हुए कहा कि इसमें ऋण राशि भुगतान के लिए कोई राशि निर्धारित नहीं है। प्रतिमाह अपने आय के अनुसार जमा कर सकते है। उन्होंने बताया कि उनके दुकान आने वाले युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करते हैं जिससे गांव के 3 युवाओं ने आवेदन किया है।

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