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प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय स्तर पर आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का शुभारंभ किया

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय स्तर पर आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का शुभारंभ किया

“आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन एक आसान और बाधारहित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तैयार करेगा, जो डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम के अंतर्गत स्वास्थ्य से जुड़े अन्य पोर्टल के परस्पर संचालन को भी सक्षम बनाएगा

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, अब देश भर के अस्पतालों के डिजिटल स्वास्थ्य समाधानों को एक-दूसरे से जोड़ेगा

नए मिशन के तहत, अब प्रत्येक नागरिक को एक डिजिटल हेल्थ आईडी मिलेगी और उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखा जायेगा

“देश के दूर-दराज इलाकों के गांवों में रहने वाले हमारे भाई-बहनों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी, आज इस मिशन की शुरुआत के साथ, हम उनके जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ रहे हैं”

एक ऐतिहासिक पहल के रूप में, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री मनसुख मांडविया और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार भी उपस्थित थीं।

इस ऐतिहासिक अवसर पर देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने का पिछले सात साल से जारी अभियान, आज एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, “आज हम एक मिशन शुरू कर रहे हैं, जिसमें भारत की स्वास्थ्य सुविधाओं में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि आरोग्य सेतु ऐप से कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने में बहुत मदद मिली है। उन्होंने को-विन की सराहना करते हुए कहा कि सबको वैक्सीन-मुफ्त वैक्सीन अभियान के तहत भारत में आज तक वैक्सीन की लगभग 90 करोड़ रिकॉर्ड डोज दिए जाने में को-विन की बहुत बड़ी भूमिका है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के उपयोग के विषय पर आगे बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना काल में टेली-मेडिसिन का भी अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि अब तक ई-संजीवनी के जरिये दूर बैठकर लगभग 125 करोड़ परामर्श लिये गये हैं। यह सुविधा हर रोज देश के दूर-सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले हजारों देशवासियों को घर बैठे ही शहरों के बड़े अस्पतालों के डॉक्टरों से जोड़ रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, अब पूरे देश के अस्पतालों के डिजिटल हेल्थ समाधानों को एक-दूसरे से जोड़ेगा। इस मिशन से न केवल अस्पतालों की प्रक्रियाएं सरल होंगी, बल्कि इससे जीवन की सुगमता भी बढ़ेगी। इसके तहत अब देशवासियों को एक डिजिटल हेल्थ आईडी मिलेगी और हर नागरिक का स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रखा जायेगा।

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प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत एक ऐसे स्वास्थ्य मॉडल पर काम कर रहा है, जो समग्र भी है और समावेशी भी है। यह ऐसा मॉडल है, जिसमें बीमारियों को रोकने पर जोर दिया जायेगा यानी वह रोकथाम वाली स्वास्थ्य सुविधा हो। इसके अलावा बीमारी की स्थिति में इलाज सुलभ हो, सस्ता हो और सबकी पहुंच में हो। उन्होंने स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार की भी चर्चा की और कहा कि पिछले सात-आठ वर्षों की तुलना में आज डॉक्टरों और पैरा-मेडिकल की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि देश में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों तथा अन्य आधुनिक स्वास्थ्य संस्थानों का एक बड़ा नेटवर्क स्थापित किया जा रहा है। इसके अलावा हर तीन लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेज बनाने पर काम चल रहा है। उन्होंने गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने का उल्लेख करते हुए बताया कि गावों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के नेटवर्क तथा आरोग्य केंद्रों को दुरुस्त किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 80 हजार से अधिक ऐसे केंद्रों को चालू किया जा चुका है।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री मनसुख मांडविया ने ‘स्वस्थ अमृत’के निरंतर समावेश, और तीन साल पुराने आयुष्मान भारत के अनवरत आरोग्य मंथन के जरिए देश के अंतिम नागरिक तक इस सेवा का लाभ पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस, 2020 पर लालकिले की प्राचीर से राष्ट्र के नाम प्रधानमंत्री के संबोधन को याद करते हुए कहा, “आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का यह कदम स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को बदल देगा और सभी नागरिकों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।”

श्री मांडविया ने इस योजना को लेकर अपना विश्वास व्यक्त किया और छह केंद्र शासित प्रदेशों में इसके त्वरित कार्यान्वयन पर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि नई सुविधा से अब पुराने चिकित्सा दस्तावेज (मेडिकल रिकॉर्ड) खो नहीं सकते क्योंकि हर रिकॉर्ड डिजिटल रूप से जमा किया जाएगा। डिजिटल इकोसिस्टम कई अन्य सुविधाओं को भी सक्षम करेगा जैसे कि डिजिटल परामर्श, रोगियों द्वारा चिकित्सकों को अपने पुराने चिकित्सा दस्तावेज देखने की सहमति आदि। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह सब, आज की उपलब्धि को भारत के इतिहास में एक अहम पड़ाव बना देगा।

कार्यक्रम का यहां पर वेबकास्ट किया गया:

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