सुरजपुर : पोषण पखवाड़ा के तहत पोषण रथ के माध्मय से ग्रामीणों को बाल अधिकार से भी किया जा रहा जागरुक।

पोषण पखवाड़ा के तहत पोषण रथ के माध्मय से ग्रामीणों को बाल अधिकार से भी किया जा रहा जागरुक
सूरजपुर/18 मार्च 2021/ पोषण अभियान अंतर्गत जन आंदोलन व्यवहार परिवर्तन संप्रेषण के तहत जिले में कलेक्टर  रणबीर शर्मा द्वारा 17 मार्च को हरी झंडी दिखा कर पोषण रथ की रवानगी की गई थी। जिसके तहत आज 18 मार्च को पोषण रथ अपने नियत कार्यक्रम अनुसार सूरजपुर परियोजना अंतर्गत ग्राम चंद्रपुर एवं केतका तथा बसदेई में पहुंचा। जहां भारी संख्या में ग्रामीणों द्वारा तालियों के साथ पोषण रथ का स्वागत किया गया। 

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कार्यक्रम में पोषण रथ के माध्यम से उपस्थित ग्रामीण जनों को बच्चों के बाल अधिकार के संबंध में बताया गया कि 6 से 14 वर्ष की उम्र तक के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य प्रारंभिक शिक्षा का अधिकार है। 14 वर्ष की उम्र तक सभी बच्चों को किसी भी खतरनाक रोजगार, काम से सुरक्षा का अधिकार है। बच्चों को सही ढंग से पालन-पोषण और आजादी व सम्मान के साथ बराबर अवसर व सुविधाएॅ पाने के अधिकार है। इनके अलावा बच्चों को वे सारे अधिकार भी मिलते है, जो भारत का नागरिक होने के नाते किसी भी बालिग स्त्री-पुरूष को दिए गये है। 

इसके साथ ही बाल विवाह न करने, बाल विवाह से होने वाले दुष्प्रभाव के संबंध में बताया गया कि उत्तर भारत के साथ-साथ ही हमारे राज्य में भी अक्षय तृतीया, रामनवमी के अवसरो पर बहुत सारे बच्चों का विवाह कर दिया जाता है। इन इलाकों में इसे बहुत पवित्र दिन माना जाता है। कई मामलों में कम उम्र की लड़कियों का विवाह अधेड़ उम्र के पुरूषो से करा दिया जाता है। कम उम्र में विवाह से बच्चों का बचपन नष्ट हो जाता है। बाल विवाह के कारण बच्चे, खासतौर से लडकिया पढ़ाई लिखाई से वंचित रह जाती है। बाल श्रम न कराने के संबंध में बताया गया कि इससे बच्चों के शिक्षा संबंधी अधिकारों का हनन होता है। बच्चों की शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक बेहतरी के लिए खतरा पैदा होता है की जानकारी दी गई। 

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बाल भिक्षा वृत्ति को प्रोत्साहित न करने के संबंध में बताया गया कि बच्चें का स्वास्थ्य और खुशहाल बचपन का अधिकार छिन जाता है। बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से अस्वस्थ्य हो सकते है। कई बार तो बच्चे की मौत भी हो जाती है।

 भारत सरकार द्वारा संचालित किये गये नशा उन्मुलन कार्यक्रम में हमारा सूरजपुर जिला को भी शामिल किया गया है। बालको एवं युवा में नशा की प्रवृति को बढावा न देने के संबंध मेें बताया गया कि नशे से बच्चों में मानसिक कुरीति, गलत संगत पनपने लगती है जिसके कारण छोटी उम्र से ही सही दिशा से भटक जाते है। 

कार्यक्रम में बालकों के साथ में प्रश्नोत्तर प्रतियोगिता एवं सवाल-जवाब कर सही जवाब देने वाले बालक एवं बालिकाओं को पुरस्कृत भी किया गया। भारी संख्या में उपस्थित महिलाओं एवं बालकों द्वार बाल अधिकार के संबंध में किसी भी तरह की समस्या होने पर चाईल्ड लाईन की टोल फ्री नंबर 1098 पर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी गई। 

पोषण अभियान अंतर्गत पांच सूत्र ग्र्रामीणो को बताया गया जिसमें 1- पहले सुनहरे 1000 दिन, 2- पौष्टिक आहार, 3- एनिमिया रोकथाम, 4- डायरिया प्रबंधन, 5- स्वछता एवं साफ सफाई। इस संबंध में उपस्थित ग्रामीण जनों, युवाओं एवं बालिकाओं से हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। कार्यक्रम में केतका सरपंच बाबूलाल, पोंडी सरपंच श्रीमती मोहरमनिया, लाछा सरपंच मुकेश, राजपाल सिंह उपसरपंच केतका उपस्थित रहे।

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