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रायपुर : ​​​​​​​राज्योत्सव में छत्तीसगढ़ी लोक गीतों और लोक नृत्यों की धूम

रायपुर : ​​​​​​​राज्योत्सव में छत्तीसगढ़ी लोक गीतों और लोक नृत्यों की धूम

रायपुर. 1 नवम्बर 2021राज्योत्सव के मौके पर साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित सांस्कृतिक संध्या छत्तीसगढ़ी लोक गीतों और लोक नृत्यों से सराबोर रही। लोक कलाकारों ने परंपरागत लोक संगीत, गीत और नृत्य से दर्शकों को प्रदेश की विविध संस्कृतियों, त्यौहारों, पर्वों और आदिवासी जीवन से परिचय कराया। लोक कलाकारों भूपेन्द्र साहू, सुनील तिवारी और श्रीमती कविता वासनिक ने अपने-अपने दल के साथ छत्तीसगढ़ महतारी की वंदना, जस गीत, गौरी-गौरा गीत, भोजली, करमा, पंथी नृत्य, सुआ नृत्य, फाग गीत, पारंपरिक विवाह गीत, बसदेव गीत, भरथरी और राऊत नाचा जैसी अनेक विधाओं पर मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।

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कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से मंच पर छत्तीसगढ़ के हरेली त्यौहार से लेकर होली तक के लोक जीवन और लोक संस्कृति को जीवंत किया। अरपा पैरी के धार, पता ले जा रे गाड़ीवाला रे, चौरा म गोंदा मोर रसिया, मोर संग चलव रे, महुवा झरे महुवा झरे, मंगनी म मांगे मया नइ मिलय रे मंगनी म, बखरी के तुमा नार बरोबर, छनन छनन बाजे वो पांव के पैजनियां दाई तोर, जोहर जोहर मोर गौरा गौरी जैसे पारंपरिक गीतों और नृत्यों से लोगों को मंत्रमुग्ध किया।


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