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गुमला में नवजात शिशुओं की अवैध बिक्री का खुलासा – पुलिस ने दोनों बच्चों को किया बरामद

झारखंड के गुमला जिले में दो नवजात शिशुओं को एक लाख रुपये में बेचने का मामला, तीन स्वास्थ्यकर्मी बर्खास्त और सात के खिलाफ FIR।

गुमला (झारखंड)। झारखंड के गुमला ज़िले से नवजात शिशुओं की अवैध खरीद-फरोख्त का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक लाख रुपये में दो नवजात शिशुओं को बेचने का सौदा किया गया था। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों शिशुओं को सुरक्षित बरामद कर लिया है। वहीं, इस कृत्य में संलिप्त तीन स्वास्थ्यकर्मियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है और सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

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कैसे हुआ खुलासा

गुमला जिले के रायडीह थाना क्षेत्र में यह मामला रविवार को सामने आया था। जांच के आदेश उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित ने दिए। पुलिस जांच में पता चला कि दो अलग-अलग नवजात शिशुओं को अवैध रूप से गोद देने के नाम पर एक-एक लाख रुपये में दो पक्षों को सौंपा गया था।

रायडीह थाना प्रभारी संदीप कुमार यादव ने बताया कि “एक बच्चा रांची से और दूसरा गुमला से बरामद किया गया है। प्रारंभिक जांच से यह मामला अवैध गोद लेने का प्रतीत होता है, क्योंकि कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था और स्वास्थ्यकर्मियों ने माता-पिता को बच्चे सौंपने के लिए राजी किया था।”


कौन-कौन हैं आरोपी

पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, जिनमें से पांच की पहचान हो गई है और दो अज्ञात हैं।
जांच में रायडीह की सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, शंख मोड़ की सहिया पार्वती देवी और ब्लॉक टीम ट्रेनर (BTT-ग्रामीण) सुमन कुजूर की संलिप्तता पाई गई।

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गुमला के सिविल सर्जन शंभू नाथ चौधरी ने बताया कि उप-मंडल अधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति के समक्ष तीनों ने अपनी संलिप्तता स्वीकार की, जिसके बाद उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।


पैसे के लेन-देन का खुलासा

सिविल सर्जन ने बताया कि प्रत्येक मामले में एक-एक लाख रुपये का लेन-देन हुआ। जांच में सामने आया कि एक शिशु का जन्म गुमला के रायडीह स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुआ था, जबकि दूसरा शिशु छत्तीसगढ़ के लोरो घाटी स्थित निजी अस्पताल में एक अविवाहित महिला से जन्मा था। बाद में उस महिला ने ब्लॉक आदिवासी कल्याण अधिकारी से संपर्क कर बच्चे को बेच दिया।


शिशु अब बाल कल्याण समिति की देखरेख में

दोनों नवजातों को बाल कल्याण समिति (CWC) को सौंप दिया गया है। समिति की अध्यक्ष नेम्हंती तिग्गा ने बताया कि दोनों शिशु चिकित्सकीय रूप से स्वस्थ हैं। उन्होंने कहा कि “सीडब्ल्यूसी परिवार के सदस्यों को बुलाकर कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगी।”


प्रशासन की कार्रवाई और जांच जारी

उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित ने संबंधित अधिकारियों को सख्त जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं पुलिस ने बताया कि अन्य आरोपियों की पहचान और अवैध गोद लेने के नेटवर्क की जांच जारी है।

Ashish Sinha

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