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धमतरी : जिला स्तरीय सतर्कता एवं मॉनीटरिंग कमेटी की बैठक हुई

धमतरी : जिला स्तरीय सतर्कता एवं मॉनीटरिंग कमेटी की बैठक हुई

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम-2016 के तहत गठित जिला स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक आज अपराह्न 3.30 बजे धमतरी विधायक श्रीमती रंजना साहू की उपस्थिति में तथा कलेक्टर पी.एस. एल्मा की अध्यक्षता में आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न एजेण्डों पर चर्चा हुई। बैठक में धमतरी विधायक ने एक्ट के विभिन्न अधिनियमों की जानकारी तथा परस्पर सामाजिक समरसता का वातावरण स्थापित करने के लिए समय-समय पर शिविर आयोजित करने पर जोर दिया। इस दौरान अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्रावधानों की जानकारी दी गई

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कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित बैठक में एजेण्डा पर चर्चा करते हुए सहायक आयुक्त आदिवासी विकास डॉ. रेशमा खान ने बताया कि गत 23 दिसम्बर को आयोजित त्रैमासिक बैठक में लिए गए निर्णयों पर कार्रवाई पूर्ण मान्य की गई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 में उक्त अधिनियम के तहत कुल 46 प्रकरण प्राप्त हुए हैं, जिनमें 15 अनुसूचित जाति और 31 अनुसूचित जनजाति वर्ग से संबंधित हैं। प्रकरणों के परीक्षण उपरांत इनमें 39 प्रकरणों को मान्य किया गया, जिसके विरूद्ध एक्ट के तहत 93 लाख रूपए की राशि स्वीकृत की गई है और 64.25 लाख रूपए का भुगतान पीड़ितों/हितग्राहियों को किया जा चुका है। सहायक आयुक्त ने अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि अब तक वित्तीय वर्ष 2021-22 में योजनांतर्गत कुल 54 प्रकरण पंजीकृत किए गए हैं जिनके विरूद्ध कुल 1.35 करोड़ रूपए विभाग द्वारा स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 1.15 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है, जबकि शेष राशि 20 लाख रूपए के देयक भुगतान हेतु कोषालय में प्रस्तुत किए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में उक्त अधिनियम के अंतर्गत प्रदाय किए जाने वाले यात्रा भत्ता, मजदूरी की क्षतिपूर्ति, आहार व्यय, चिकित्सा सुविधा व्यय के लिए पुलिस अधीक्षक को 50 हजार रूपए की राशि प्रदाय की जा चुकी है। बैठक में समिति के सदस्यों ने अस्पृश्यता निवारण एवं जनजागरूकता के लिए जिले के सभी विकासखण्डों में शिविर आयोजित करने की मांग की, जिस पर कलेक्टर ने सहायक आयुक्त को नियमानुसार कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया। इस दौरान डीएसपी आजाक श्रीमती रागिनी तिवारी ने कहा कि इस अधिनियम के तहत प्रकरण का आधार जाति प्रमाण-पत्र को माना जाता है, किन्तु स्थायी जाति प्रमाण पत्र के अभाव में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस पर कलेक्टर ने कहा कि ऐसे विशेष प्रकरणों की जानकारी तत्काल उपलब्ध करा दें, जिससे संबंधित एसडीएम को निर्देशित कर अविलम्ब प्रमाण-पत्र बनवाया जा सके। इस अवसर पर समिति के सदस्य सर्वश्री मुकेश कोसरे, सलीम गौस, शंकर ग्वाल सहित शासकीय सदस्यगण उपस्थित थे।

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