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Ambikapur News : वरिष्ठ साहित्यकार बीडीलाल के सम्मान में तुलसी साहित्य समिति की काव्यगोष्ठी…………….

वरिष्ठ साहित्यकार बीडीलाल के सम्मान में तुलसी साहित्य समिति की काव्यगोष्ठी…………….

P.S.YADAV/ब्यूरो चीफ/सरगुजा// तुलसी साहित्य समिति के द्वारा सरगुजा के वरिष्ठ साहित्यकार व पूर्व प्राचार्य बीडीलाल के सम्मान में विवेकानंद विद्यानिकेतन में काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि शायरे शहर यादव विकास, श्यामबिहारी पाण्डेय और अध्यक्षता पूर्व प्राचार्य एसपी जायसवाल ने की।

कार्यक्रम का शुभारंभ कवयित्री अर्चना पाठक ने सरस्वती-वंदना से किया। एसपी जायसवाल ने वरिष्ठ कवि बीडीलाल को प्रतीक चिन्ह, गुलदस्ता और यादव विकास ने उन्हें शॉल-श्रीफल से सम्मानित किया। इस अवसर पर एसपी जायसवाल ने बीडी लाल के प्रेरक व्यक्तिव और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बीडी लाल अंचल के वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार हैं। इनकी शिक्षा-दीक्षा बनारस में हुई और मात्र 20 वर्ष की आयु में ये अम्बिकापुर आ गए। यहीं से इन्होंने अपना शिक्षकीय कार्य प्रारंभ किया। छत्तीसगढ़ राज्य के विभिन्न भागों में सेवाएं देकर इन्होंने बलरामपुर जिले के उ0मा0वि0 धर्मपुर में कई वर्षों तक प्राचार्य के कुशल दायित्व का निर्वहन किया और सेवानिवृत्त हुए। सन् 1967 में इन्होंने प्रथम कविता ‘कुसमी कश्मीर है’ शीर्षक से लिखी। इनकी प्रमुख कृतियों में सरगुजिहा रामायण (2010), सरगुजा- गीतों के गवाक्षों से (2012), गुलदस्ता – गीत और ग़ज़ल (2016) और ओह! धृतराष्ट्र (2020) उल्लेखनीय हैं। बीडी लाल ने कहा कि युवा पीढ़ी को गहन अध्ययन, चिंतन और मनन के बाद ही अपने विचारों की सार्वजनिक अभिव्यक्ति करनी चाहिए। विधा चित्रकला, मूर्तिकला, साहित्य, संगीत आदि कोई भी हो सकती है।

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काव्यगोष्ठी में कवयित्री माधुरी जायसवाल ने भगवती मां शारदा से निवेदन किया कि- हे मां, मेरा विश्वास न उठने देना। यदि दुनिया में किसी से डर जाऊं, अंधेरे में कहीं सिमट जाऊं, तो बन के रोशनी मुझे राह दिखा देना। प्रकाश कश्यप ने निष्काम कर्म करने की प्रेरणा दी- जब तक मन में राम नहीं, जीवन में आराम नहीं। कर्म ही बंधन बन जाता है, भाव अगर निष्काम नहीं। सीमा तिवारी ने अपने दोहे में भगवान राम की वंदना की- पावन जिनका धाम है, दशरथ नंदन राम। करते हैं हम वंदना, जय-जय-जय श्रीराम। श्यामबिहारी पाण्डेय ने वीर रस से परिपूर्ण देशभक्ति रचना की शानदार प्रस्तुति दी- मुझे मंदिर बनाना है, तुम्हें मस्जिद बनाना है। मगर इस देश की मिट्टी का ही गारा लगाना है। रहे बुनियाद हिन्दुस्तान में, यह याद तुम रखना। इबादत हम करें कोई, मगर जयहिंद गाना है। देश के शूरवीरों की शौर्यगाथा का चित्रण करते हुए कवयित्री अर्चना पाठक ने उन्हें प्रणाम-निवेदन किया- वीरता से शत्रुदल भयभीत हो गया है, भारती के लाल करूं आपको नमन है। राम-कृष्ण की ही भूमि स्वर्ग से सुहावनी है, वीरवर करती हूं आपको नमन है। वरिष्ठ कवि बीडी लाल ने अपनी रचना में कृष्ण-जन्म की दिव्य झांकी प्रस्तुत की- कारागार की काल-कोठरी में जब फैला दिव्य प्रकाश, वासुदेव-देवकी हुए चमत्कृत, जैसे टूट पड़ा आकाश। समिति के संरक्षक एसपी जायसवाल ने कृष्णभक्ति में लीन गोपी की भावविह्वल दशा का वर्णन किया- मैं तो श्याम की हो गई राम, दुनिया जो बोले सो बोले। यमुना तट पर वंशी बजाते बैठ कदम्ब की डाली, मैं तज की कुल की कानि। आचार्य दिग्विजय सिंह तोमर ने जीवन की नश्वरता का बोध कराया- जी लिया जीना था जितना, नश्वर जीवन शेष है कितना, कब समझोगे बेटा इतना। इसके अलावा उन्होंने वैशाख शीर्षक से रचना पाठ करते हुए भगवान शिव पर भी स्वरचित स्तोत्र की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

सम्प्रति सम्पूर्ण सरगुजा भीषण गर्मी की चपेट में हैं। सर्वत्र गर्मी से हाहाकार मचा हुआ है। जन-जीवन भी अस्त-व्यस्त हो गया है। समिति के अध्यक्ष मुकुंदलाल साहू ने अपने दोहों में ग्रीष्म की भयानकता का चित्रण किया- बिगड़ गए हैं ग्रीष्म में, जीवन के लय-ताल। सूर्य आग बरसा रहा, रूप बना विकराल। जीवों को घायल करे, गर्मी का यह रूप। हवा चुभाए शूल तो, जला रही है धूप। इनके अलावा अजय श्रीवास्तव की कविता- धीरे-धीरे चल सजनिया, प्रताप पाण्डेय की- शब्दों का अपना ही संसार है और गीता द्विवेदी की गीत-रचना- दो परिंदे साथ में सोते, साथ-साथ जग जाते हैं- ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। अंत में, शायरे शहर यादव विकास की भाईचारा बढ़ानेवाली ग़ज़ल- जो दुआओं से पाले गए, दूर तक वो उजाले गए, रौशनी है बराबर यहां, मस्जिद या शिवाले गए- से गोष्ठी का यादगार समापन हुआ। कार्यक्रम का काव्यमय संचालन अर्चना पाठक और आभार प्रकाश कश्यप ने जताया। इस अवसर पर संस्कृति तिवारी, लीला यादव और विनोद कुमार सिन्हा उपस्थित रहे।

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