
HC ने ताजमहल पर याचिका खारिज की, याचिकाकर्ता की खिंचाई की
HC ने ताजमहल पर याचिका खारिज की, याचिकाकर्ता की खिंचाई की
लखनऊ 12 मई इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गुरुवार को ताजमहल के इतिहास और स्मारक के परिसर में “22 कमरों के उद्घाटन” की ‘तथ्य-खोज जांच’ की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि याचिकाकर्ता यह बताने में विफल रहा कि उसका कौन सा कानूनी या संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा था।
न्यायमूर्ति डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की लखनऊ पीठ ने याचिकाकर्ता रजनीश सिंह के वकील की खिंचाई की, जो भाजपा की अयोध्या इकाई के मीडिया प्रभारी हैं। इस मामले में संविधान का अनुच्छेद 226।
यह लेख उच्च न्यायालय को अपने अधिकार क्षेत्र के तहत क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति या प्राधिकरण को मौलिक अधिकारों को लागू करने के आदेश या रिट जारी करने का अधिकार देता है।
पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता यह नहीं बता सकता कि उसके किस कानूनी या संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है।
याचिकाकर्ता के वकील रुद्र विक्रम सिंह ने अदालत से याचिका वापस लेने और नई याचिका दायर करने की अनुमति देने का आग्रह किया, लेकिन पीठ ने उनके अनुरोध को स्वीकार नहीं किया और याचिका खारिज कर दी।
ताजमहल के इतिहास की तथ्यान्वेषी जांच की मांग को लेकर रजनीश सिंह द्वारा उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ की रजिस्ट्री में शनिवार को रिट याचिका दायर की गयी थी.
इसने अपने “22 कमरों” के दरवाजे “सच्चाई, जो कुछ भी है” देखने के लिए खोलने की मांग की।
कई हिंदू दक्षिणपंथी संगठनों ने अतीत में दावा किया है कि मुगल काल का मकबरा भगवान शिव का मंदिर था।
स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है।
याचिका में प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष (राष्ट्रीय महत्व की घोषणा) अधिनियम 1951, और प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 के कुछ प्रावधानों को अलग करने की भी मांग की गई, जिसके तहत ताजमहल, फतेहपुर सीकरी , आगरा का किला, इतिमाद-उद-दौला का मकबरा ऐतिहासिक स्मारक घोषित किया गया।