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केरल ने जल जीवन मिशन के तहत अपनी वार्षिक कार्य योजना प्रस्तुत की

केरल ने जल जीवन मिशन के तहत अपनी वार्षिक कार्य योजना प्रस्तुत की

2021-22 में राज्य लगभग 30 लाख नए कनेक्शन प्रदान करेगा

केरल ने जल जीवन मिशन (जेजेएम) की योजना और कार्यान्वयन पर वार्षिक कार्य योजना (एएपी) प्रस्तुत की, जहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से केरल राज्य के अधिकारियों ने राष्ट्रीय समिति के सामने वित्तीय वर्ष 2021-22 के रोडमैप को रखा। केरल में 67.15 लाख ग्रामीण परिवार हैं। इनमें से लगभग 21.55 लाख परिवारों के पास घरेलू नल जल आपूर्ति है। 2020-21 में लगभग 4 लाख कनेक्शन प्रदान किए गए थे। वहीं 2021-22 में राज्य की योजना लगभग 30 लाख नए कनेक्शन प्रदान करने की है। राज्य की योजना 2024 तक‘हर घर जल’ के लक्ष्य को हासिल करने की है। इसके अलावा राज्य की योजना नल जल आपूर्ति या सामुदायिक जल शोधन संयंत्रों (सीडब्ल्यूपीपी) के माध्यम से जून, 2021 तक सभी गुणवत्ता प्रभावित आवासीय इलाकों में पेय जल उपलब्ध कराने की है। राज्य से एससी/एसटी बहुल क्षेत्रों, आकांक्षी जिलों में परिवारों की कवरेज को शीर्ष प्राथमिकता देने का आग्रह किया गया है।

जल जीवन मिशन केंद्र सरकार का एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य 2024 तक सभी ग्रामीण परिवारों को पाइप के माध्यम से पेयजल उपलब्ध करवाना है।  अगस्त, 2019 में इस योजना की घोषणा होने के बाद की अवधि में देश के ग्रामीण इलाकों में 4.17 करोड़ नए नल कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप 7.40 करोड़ (38.56 फीसदी) ग्रामीण परिवारों के पास नल जल आपूर्ति है। 2019 में यह आकंडा 3.23 करोड़ (17 फीसदी) था।

जल जीवन मिशन के तहत प्रत्येक गांव के लिए ग्राम कार्य योजना (वीएपी) और ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति का गठन काफी महत्वपूर्ण है, जिससे योजना, गांव में जल आपूर्ति योजनाओं के कार्यान्वयन में स्थानीय समुदाय न केवल महत्वपूर्ण हितधारक हों, बल्कि लंबे समय के लिए ग्रामीणों को ‘हर घर जल’ कार्यक्रम के तहत निर्मित जल आपूर्ति अवसंरचना को संचालित और रखरखाव करने के लिए सशक्त किया जा सके। वही विभिन्न कार्यक्रमों के सम्मिलन द्वारा उपलब्ध संसाधनों को प्राप्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में मनरेगा, एसबीएम, पीआरआई को 15वें वित्त आयोग के अनुदान, कैम्पा निधि और स्थानीय क्षेत्र विकास निधि आदि शामिल हैं। राज्य को दीर्घावधि स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए गांवों में जल आपूर्ति प्रणाली की योजना, कार्यान्वयन, प्रबंधन, संचालन और रखरखाव में स्थानीय ग्राम समुदाय/ग्राम पंचायतों और/या उपयोगकर्ता समूहों को शामिल करना है, जिससे पेयजल सुरक्षा प्राप्त करने में मदद मिल सके। वहीं राज्य से सभी गांवों में सामुदायिक जुड़ाव के माध्यम से आईईसी अभियान शुरू करने का आग्रह किया गया है।

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यह राष्ट्रीय समिति राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा तैयार प्रस्तावित वार्षिक कार्य योजना (एएपी) को मंजूर करने से पहले इसकी समीक्षा करती है। इसके बाद भौतिक और वित्तीय प्रगति के आधार पर किस्तों में रकम जारी की जाती है। वहीं ‘हर घर जल’ के लक्ष्य को प्राप्त करने को लेकर वार्षिक कार्य योजना के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए नियमित तौर पर क्षेत्र के दौरे किए जाते हैं और समीक्षा बैठकें आयोजित की जाती हैं।

राष्ट्रीय समिति ने राज्य द्वारा प्रस्तुत योजना का विश्लेषण किया और सलाह दी। राज्य से कार्यान्वयन की गति को बढ़ाने और न केवल पिछले वर्ष के कार्य को पूरा करने के लिए ठोस प्रयास करने बल्कि चालू वर्ष की योजना के तहत तय कार्य को भी तेजी से करने का आग्रह किया गया है। वहीं समिति ने ग्राम कार्य योजनाओं और महिला सदस्यों की न्यूनतम 50 फीसदी भागीदारी के साथ ग्राम पंचायत की एक उप-समिति के रूप में ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति/पानी समिति के गठन पर भी जोर दिया है। इसके अलावा ग्राम पंचायत, आंगनवाड़ी केंद्रों और विद्यालय के स्तर पर एफटीके परीक्षण सुनिश्चित करने के लिए जल गुणवत्ता निगरानी एवं निरीक्षण (डब्ल्यूक्यूएमएंडएस) गतिविधियों पर जोर देने की जरूरत है।

एक मजबूत पीआरआई प्रणाली के साथ विकेंद्रीकृत योजना में अग्रणी होने के चलते राज्य के पास इस समुदाय आधारित संचालित कार्यक्रम को सफलतापूर्वक लागू करने की अपार क्षमता है। गुणवत्ता प्राप्त करने के लिए जल में मौजूद जैविक संदूषण को मापने को लेकर मंत्रालय द्वारा सिफारिश की गई पेयजल की जांच काफी महत्वपूर्ण है। राज्य में पेयजल की प्रयोगशालाओं के मजबूतीकरण/उन्नयन और लोगों के लिए उनके जल के नमूनों को एक सामान्य दर पर परीक्षण करने के लिए उन्हें खोलने को प्राथमिकता बनना चाहिए। वहीं राज्य को प्रत्येक गांव में फिल्ड टेस्ट किटों (एफटीके) के जरिए जल गुणवत्ता की निगरानी के लिए कम से कम पांच लोगों, विशेषरूप से महिलाओं को प्रशिक्षित करने की सलाह दी गई है।

जल जीवन मिशन (जेजेएम) केंद्र सरकार का एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य 2024 तक सभी ग्रामीण परिवारों को पाइप के माध्यम से पेयजल उपलब्ध करवाना है। 2021-22 में जल जीवन मिशन के लिए50,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटन किया गया है। इसके अलावा 15वें वित्त आयोग के बंधित-अनुदानों के तहत26,940 करोड़ रुपये का उपलब्ध निश्चित निधि आरएलबी/पीआरआई को जल और स्वच्छता एवं राज्यों के हिस्से और बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं के मिलान के लिए है। इस प्रकार 2021-22 में ग्रामीण घरों तक नल जल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश करने की योजना है। इस तरह के भारी निवेश से विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे और साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी तेजी आएगी।

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