
IIT दिल्ली में नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स का प्रेरक व्याख्यान, छात्रों से साझा की ‘Astronaut बनने की कहानी’
नासा की अंतरिक्ष यात्री (सेवानिवृत्त) सुनीता विलियम्स ने 20 जनवरी 2026 को IIT दिल्ली में “The Making of an Astronaut” विषय पर व्याख्यान दिया। बड़ी संख्या में छात्रों और शिक्षकों ने कार्यक्रम में भाग लिया।
IIT दिल्ली में सुनीता विलियम्स: अंतरिक्ष तक पहुंचने की कहानी, जिसने छात्रों को सपने देखने की हिम्मत दी
नई दिल्ली।20 जनवरी 2026 की सुबह भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के परिसर में कुछ अलग ही उत्साह था। कैंपस के ऑडिटोरियम में जुटी सैकड़ों आंखें उस शख्सियत को देखने और सुनने के लिए उत्सुक थीं, जिसने धरती की सीमाओं को पार कर अंतरिक्ष में भारत और दुनिया का नाम रोशन किया है। नासा की अंतरिक्ष यात्री (सेवानिवृत्त) और अमेरिकी नौसेना की पूर्व कैप्टन सुनीता एल. विलियम्स जब मंच पर पहुंचीं, तो तालियों की गूंज ने साफ कर दिया कि यह सिर्फ एक व्याख्यान नहीं, बल्कि एक प्रेरक अनुभव होने वाला है।
‘The Making of an Astronaut’: एक असाधारण यात्रा
सुनीता विलियम्स का व्याख्यान “The Making of an Astronaut: Sunita Williams’ Story” केवल अंतरिक्ष यात्राओं का विवरण नहीं था, बल्कि यह एक ऐसे सफर की कहानी थी, जिसमें अनुशासन, जोखिम, असफलताएं और निरंतर सीखने की भावना शामिल थी। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष यात्री बनने का रास्ता किसी एक परीक्षा या चयन प्रक्रिया से तय नहीं होता, बल्कि यह वर्षों की तैयारी, मानसिक मजबूती और टीमवर्क का परिणाम होता है।
उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि अंतरिक्ष में जाने से पहले सबसे बड़ी चुनौती खुद को हर परिस्थिति के लिए तैयार करना है—चाहे वह शारीरिक प्रशिक्षण हो, तकनीकी ज्ञान हो या मानसिक संतुलन।
छात्रों से सीधा संवाद: फायरसाइड चैट
व्याख्यान के बाद आयोजित फायरसाइड चैट ने इस कार्यक्रम को और खास बना दिया। इस सत्र में छात्रों ने बेझिझक सवाल पूछे—अंतरिक्ष में जीवन कैसा होता है, पृथ्वी को वहां से देखने का अनुभव क्या होता है, और क्या असफल मिशन का डर कभी हावी होता है?
इस संवाद सत्र का संचालन प्रो. शिल्पी शर्मा, एसोसिएट डीन (Academic Outreach & New Initiatives) ने किया। सुनीता विलियम्स ने बेहद सरल और ईमानदार अंदाज़ में जवाब देते हुए कहा कि डर हर इंसान को लगता है, लेकिन वही डर सही तैयारी और टीम पर भरोसे से ताकत में बदल जाता है।
अनुशासन और टीमवर्क की अहमियत
सुनीता विलियम्स ने अपने अनुभव साझा करते हुए बार-बार टीमवर्क और अनुशासन पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष मिशन किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं होते, बल्कि सैकड़ों वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीशियनों की साझा मेहनत का नतीजा होते हैं।
उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि चाहे वे अंतरिक्ष विज्ञान में जाएं या किसी और क्षेत्र में, टीम के साथ काम करना और दूसरों पर भरोसा करना सीखें—क्योंकि बड़ी उपलब्धियां अकेले हासिल नहीं होतीं।
एक नई लेक्चर सीरीज़ की शुरुआत
यह कार्यक्रम प्रो. वी. एन. वज़िरानी इंस्टीट्यूट लेक्चर सीरीज़ के अंतर्गत आयोजित पहला व्याख्यान था। इस लेक्चर सीरीज़ की स्थापना प्रो. विजय वज़िरानी और प्रो. उमेश वज़िरानी ने अपने पिता प्रो. वी. एन. वज़िरानी की स्मृति में की है।
इस पहल का उद्देश्य छात्रों को दुनिया के शीर्ष विचारकों, वैज्ञानिकों और नवप्रवर्तकों से रूबरू कराना है, ताकि वे कक्षा की पढ़ाई से आगे बढ़कर वास्तविक दुनिया की चुनौतियों और संभावनाओं को समझ सकें।
भारत-अमेरिका शैक्षणिक सहयोग का प्रतीक
इस व्याख्यान का आयोजन IIT दिल्ली के Academic Outreach and New Initiatives Office और अमेरिकी दूतावास, नई दिल्ली के सहयोग से किया गया। यह पहल भारत और अमेरिका के बीच शैक्षणिक और वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत करने का एक उदाहरण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम वैश्विक दृष्टिकोण को बढ़ावा देते हैं और छात्रों को अंतरराष्ट्रीय अवसरों के लिए तैयार करते हैं।
छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत
कार्यक्रम में मौजूद कई छात्रों ने कहा कि सुनीता विलियम्स की कहानी ने उन्हें अपने सपनों को नए सिरे से देखने की प्रेरणा दी। एक छात्र ने कहा, “हम किताबों में अंतरिक्ष के बारे में पढ़ते हैं, लेकिन जब कोई वहां जाकर लौटे व्यक्ति अपने अनुभव साझा करता है, तो वह ज्ञान कहीं ज्यादा जीवंत हो जाता है।”
सुनीता विलियम्स ने छात्रों को असफलताओं से डरने के बजाय उनसे सीखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हर चुनौती एक अवसर होती है, बस जरूरत है उसे पहचानने और उससे आगे बढ़ने की।
STEM और भविष्य की उड़ान
अपने संबोधन में उन्होंने STEM (Science, Technology, Engineering and Mathematics) शिक्षा की अहमियत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य की दुनिया वैज्ञानिक सोच और तकनीकी नवाचार से संचालित होगी, और आज के छात्र ही उस भविष्य के निर्माता हैं।
उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे जिज्ञासा बनाए रखें, सवाल पूछें और सीमाओं को चुनौती देने से न डरें।
एक यादगार दिन
कार्यक्रम के अंत में, तालियों की गड़गड़ाहट और छात्रों के उत्साह ने यह साबित कर दिया कि यह व्याख्यान केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि एक यादगार अनुभव बन चुका था। सुनीता विलियम्स की उपस्थिति ने IIT दिल्ली के छात्रों को यह एहसास दिलाया कि सपने चाहे जितने बड़े हों, अगर इरादे मजबूत हों तो वे हकीकत बन सकते हैं।
IIT दिल्ली का यह दिन उन अनगिनत युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया, जो विज्ञान और तकनीक के जरिए दुनिया को बेहतर बनाने का सपना देखते हैं—और शायद, किसी दिन अंतरिक्ष तक पहुंचने का भी।












