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ग्रामीणों की रसोई में भी हो रहा गोबर गैस का उपयोग, 28 गौठानों में गोबर गैस संयंत्र स्थापित

ग्रामीणों की रसोई में भी हो रहा गोबर गैस का उपयोग,28 गौठानों में गोबर गैस संयंत्र स्थापित

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शशिरत्न पाराशर महासमुंद 16 दिसम्बर 2021छत्तीसगढ़ शासन की महत्वकांक्षी योजनाओं में से एक सुराजी योजना और गोधन न्याय योजना अंतर्गत जिले की सभी गौठानों में गोबर खरीदी कर  ग्रामीणों को स्वावलंबी बनाने का कार्य किया जा रहा है। योजना में कदम आगे बढ़ाते हुए  गोबर गैस का उत्पादन कर गौठान को रौशन करने की परिकल्पना साकार हो रही है। क्रेडा अधिकारी ने बताया कि जिले के 28 गौठनों में गोबर गैस संयंत्र स्थापित किए गए। जिले के बसना विकासखंड के ग्राम पंचायत संतपाली में बने गौठान में गोबर गैस स्थापित किया जा रहा है। यहां संयंत्र की स्थापना का कार्य पूर्णता की ओर है इसके बाद गोबर गैस से यह गौठान भी गोबर गैस से जगमग होने लगेगा। इस पर लगभग 60 हजार रुपए व्यय किए जा रहें हैं । जिसमें 10 हजार रुपए खनिज न्यास निधि से व्यय हो रहे है। शेष राशि विभाग द्वारा व्यय की जा रही है।

ग्राम संतपाली के सरपंच श्री सुरेश निषाद का कहना है कि राज्य सरकार की नरवा, गरवा, घुरूवा एवं बाड़ी योजना से गौठान समिति के सदस्यों में खासा उत्साह है। यह योजना गौठान समिति के लिए आय का स्तोत्र बन गया है। उन्होंने बताया कि गौठानों में अब गोबर से गैस उत्पादन करने के लिए संयंत्र लगाने का कार्य प्रारंभ हो चुका है। जिससे शीघ्र ही गोबर से गैस उत्पादन किया जाएगा एवं अधिक उत्पादन होने पर यह गैस घरों में भी सप्लाई की जाएगी। अभी छोटा प्लांट लगाया गया है। जिससे गौठान में गैस से जलने वाले बल्ब लगाए जाएंगे एवं प्रकाश की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही इस गैस से सिलेंडर भी भरे जाएंगे। जो कि रसोई में उपयोग होने वाली गैस के रूप में काम आएंगे एवं महिलाएं अपने घरों में सस्ती गैस से खाना बना सकेंगी।

गौठान समिति द्वारा गोबर से गैस बनाएंगे और स्थानीय घरों में गोबर गैस से रसोई के चूल्हे भी जलेंगे। गौठान में गोबर से सस्ती गैस का उत्पादन होने के साथ-साथ जैविक खाद का भी उत्पादन होगा। इससे गौठान समितियों और महिला स्व-सहायता समूहों को दोहरा लाभ होगा। यहां गोधन न्याय योजना के तहत दो रुपये किलो में गोबर की खरीदी कर बड़े पैमाने पर जैविक खाद का उत्पादन एवं अन्य आयमूलक गतिविधियां समूह की महिलाओं द्वारा संचालित की जा रही है।

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महासमुन्द जिले मंे वर्तमान में 170 गौठानों को स्वावलंबी गौठान की श्रेणी मंे रखा गया है। उक्त गौठानांे मंे गोबर खरीदी के साथ-साथ मल्टी एक्टिविटी गतिविधियां संचालित किया जा रहा है, जिसमंे मुख्य रूप से मुर्गी पालन, मछली पालन, मशरूम, सामुदायिक बाड़ी विकास, सामुदायिक साग सब्जी उत्पादन, सामुदायिक फलांे की खेती, पपीता, गंेदाफूलांे की खेती, दिया एवं गमला निर्माण, मछलीपालन, जैविक गुलाल निर्माण किया जाता है।

    नरवा, गरूवा, घुरूवा और बाड़ी अंतर्गत ज़िले के  गौठानों में  पशुओं की चारा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए किसानों द्वारा पैरा दान किया जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा बेलर मशीन के माध्यम से पैरा एकत्र कर गठ्ठेे बनायें जा रहे है। सुराजी गाँव योजना के अंतर्गत जिले में पशुओं के देख-रेख के लिए गौठानों को मल्टी एक्टिविटी सेन्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है। जिले में कुल 551 ग्राम इसमें 469 राजस्व तथा 86 आवर्ती चराई भूमि पर गौठान स्वीकृत है। इन सभी गौठानों को ग्रामीण आजीविका केन्द्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। जिसमंे गाध्ेान न्याय योजनांतर्गत गोबर खरीदी, वर्मी कम्पोस्ट निर्माण, मुर्गी पालन, बकरी पालन, डेयरी विकास, बाड़ी विकास, मशरूम उत्पादन इत्यादि आजीविका संबंधी गतिविधियां संचालित है।

   महासमुन्द जिले के सभी विकासखण्डों मंे कुल 551 गौठान स्वीकृत है, जिसमंे से माह नवम्बर के अंत तक 183 महिला समूहांे के माध्यम से 134 गौठानांे मंे 36 हजार क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट खाद उत्पादन कर 3.60 करोड़ का विक्रय हुआ है। जिसमंे से 30 हजार क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट खाद, राशि रूपये 3 करोड़ का विक्रय किया जा चुका है। वहीं 6 हजार क्विंटल वर्मी सुपर कम्पोस्ट 60 लाख का विक्रय किया गया है। वर्मी कम्पोस्ट खाद के अलावा जिले के गौठानों में अन्य प्रकार की आर्थिक गतिविधियां की जा रही है। जिससे ग्रामीणों और महिला समूहों की आर्थिक स्थिति सुधर रही है।

     गौठानों में गोबर खरीदी के अलावा स्वसहायता समूह की महिलाएं मुर्गीपालन, मशरूम, मछलीपालन, वर्मीवास, वर्मीटैंक, नर्सरी, सामुदायिक खेती बाड़ी कर साग सब्जी, सामुदायिक फलांे आदि उत्पादित कर रही है। फलों की खेती में केला, पपीता, गंेदाफूलांे की खेती, दिया एवं गमला निर्माण, मछली पालन, होली गुलाल निर्माण। मधुमक्खी पालन, सीमेंट पोल, बासं सामान, मसाला प्रसंस्करण, फूल एवं फूलों की खेती, फिनाईल, कड़कनाथ पालन, वाशिगं पाउडर, झाडू, बतख पालन, बकरी पालन आदि आर्थिक गतिविधियों के कार्य किए जा रहे है।

Ashish Sinha

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