आदिवासी नेता सोहन पोटाई का निधन, कांकेर लोकसभा से चार बार रहे सांसद

आदिवासी नेता सोहन पोटाई का निधन, कांकेर लोकसभा से चार बार रहे सांसद

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रायपुर. छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल कांकेर लोकसभा सीट से चार बार भाजपा के सांसद रहे आदिवासी नेता सोहन पोटाई जिंदगी की जंग हार गए. एम्स में उनका कैंसर का इलाज चल रहा था. 9 मार्च को सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली.

पोटाई 1998 में भाजपा से पहली बार सांसद चुने गए. इसके बाद 1999, 2004 और 2009 में उन्होंने भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ा और कांकेर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया. हालांकि जून 2016 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में उन्हें निलंबित कर दिया गया था. इसके बाद वे सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष के रूप में काम कर रहे थे. पोटाई ने समाज शास्त्र से एमए तक शिक्षा ग्रहण की थी. उनकी पत्नी का नाम मिनी पोटाई है. उनकी एक बेटी और एक बेटा है.

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ऐसा रहा सोहन पोटाई का राजनैतिक सफर
1999 में सोह पोटाई ने छबिला अरविंद नेताम को चुनाव हराया था. 2004 सोहन पोताई ने कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रही गंगा पोटाई ठाकुर को हराया. फिर साल 2009 में सोहन पोटाई कांग्रेस की फूलोदेवी नेताम को पराजित कर लगातार चौथी जीत का रिकार्ड बनाया. 2014 में भाजपा से उनका टिकिट कटने के बाद उन्होंने पार्टी से बगावत कर दिया और सर्व आदिवासी समाज के एक मुखर लीडर बनकर आदिवासियों मुद्दे को प्रमुखता से उठाते रहे. जिसके बाद 2016 में सोहन पोटाई को भाजपा ने निष्काषित कर दिया था. 2017 के जनवरी बीजेपी से निष्काषित होने के बाद उन्होंने जय छत्तीसगढ़ पार्टी भी बनाई थी।

कैंसर से ग्रसित थे पोटाई
सोहन पोटाई लंबे समय से कैंसर की बीमारी से ग्रसित थे. हाल ही में पूर्व राज्यपाल अनुसुइया उइके भी उनसे मिलने अस्पताल पहुंची थी. जहां उन्होंने डॉक्टरों को उनके उचित इलाज के निर्देश दिए थे. सोहन पोटाई के जाने से बस्तर में आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के मुद्दों पर असर पड़ेगा. सोहन पोटाई लगातार स्थानीय आदिवासियों के मुद्दों को मुखर होकर आवाज उठा रहे थे. उनके निधन के बाद आदिवासी समाज में शोक की लहर है।