मदरसे में धार्मिक पढ़ाई हो सकती है, तो स्कूलों में हिंदू धर्म की पढ़ाई क्यों नहीं : शंकराचार्य

मदरसे में धार्मिक पढ़ाई हो सकती है, तो स्कूलों में हिंदू धर्म की पढ़ाई क्यों नहीं : शंकराचार्य

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रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान आज शुक्रवार को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद मीडिया से रूबरू हुए और कई अहम मुद्दों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ के लोगों की तरीफ करते हुए कहा कि यहां के लोग पुराण प्रेमी, हम उन्हें पुराण सुनाएंगे। यहां दो भागवत होगा। आज पाटेश्वर धाम जाएंगे और आगे भी आना जाना लगा रहेगा।z
ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने साईं बाबा पर धीरेन्द्र कृष्णा शास्त्री के दिए बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि हम ह्यसाई बाबा को लेकर दिए गए बयान का समर्थन करते हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि शिक्षा नीति में बदलाव की जरुरत है। अगर मदरसे में धार्मिक पढ़ाई हो सकती है, तो स्कूलों में हिंदू धर्म की पढ़ाई क्यों नहीं हो सकती। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों से मुगलों का चैप्टर हटाए जाने को लेकर कहा कि इतिहास जैसा है वैसा पढ़ाया जाना चाहिए। तठस्थ इतिहास के लिए जरुरी है कि सबको सबकुछ पढ़ाया जाए। उन्होंने हिंदू राष्ट्र के बारे में भी अपने विचार व्यक्त किए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा हिंदू राष्ट्र की कोई मांग नहीं है क्योंकि कोई प्रारूप सामने नहीं है, हमे हिंदू राष्ट्र नहीं रामराज्य चाहिए। ये बांट कर राज करने की रणनीति है। हिंदू बहुमत में है तो रामनवमी और हनुमान जंयती पर एडवाइजरी क्यों? हिंदू खतरे में तब होगा जब वो धर्म का पालन नहीं करेगा। इसके लिए राजनीतिक पार्टियां जिम्मेदार है।