कोरोना की संभावित तीसरी लहर देखते हुए बच्चों के लिए एमसीएच सूरजपुर एवं भैयाथान में क्रमशः 100 एवं 50 ऑक्सीजन बेड तथा सभी सीएचसी के 10-10 बेड की जायेंगी आरक्षित
गोपाल सिंह विद्रोही /प्रदेश खबर /प्रमुख छत्तीसगढ़/सूरजपुरकलेक्टर डाॅ. गौरव कुमार सिंह ने कोराना की संभावित तीसरी लहर के विषय में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. आर एस सिंह, सिविल सर्जन डाॅ. शशि तिर्की, शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. प्रियंक पटेल, डॉ. सीमा गुप्ता एवं टीकाकरण अधिकारी डॉ. मरकाम उपस्थित रहे।
कोरोना की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए कलेक्टर ने तैयारियों के पाँच स्तम्भ बताए जिसमें स्वास्थ्यगत अवसंरचना, मानव संसाधन, दवाएँ, प्रशिक्षण एवं प्रचार-प्रसार। सभी डॉक्टरों को इन पाँचों स्तंभों में से एक-एक की जिम्मेदारी सुनिश्चित करते हुए कलेक्टर ने सभी से अलग अलग प्लानिंग करने को कहा। साथ ही कार्य को जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के निर्देश दिए। स्वास्थ्य अवसंरचना के अंतर्गत स्थान का चयन कर लिया गया है जहाँ-जहाँ ऑक्सीजन बेड लगाया जाना है। एमसीएच सूरजपुर एवं एमसीएच भैयाथान में क्रमशः 100 एवं 50 ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था की जाएगी तथा सभी सीएचसी के 20 में से 10-10 बेड तीसरी लहर के लिए बच्चों के लिए आरक्षित की जाएगी।
इसके अतिरिक्त एमसीएच सूरजपुर में 5 वैंटिलेटर, रेडियंट वार्मर, 10 आईसीयू एवं 10 एचडीयू आदि की भी व्यवस्था की जाएगी। मानव संसाधन के लिए डॉक्टरों एवं नर्सों की भर्ती की प्रक्रिया की जाएगी। अलग-अलग वर्गों के बच्चों के लिए अलग-अलग उम्रानुसार मेडिसिन किट बनाए जायेंगे। डॉक्टरों, नर्सों, मितानिन, सचिव, सरपंच, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सुपरवाईजरो अन्य जनप्रतिनिधियों आदि को ट्रेनिंग के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाएगा। ट्रेनिंग के लिए एम्स एवं अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के डाॅक्टरों की मदद ली जाएगी। कलेक्टर ने रायपुर के बालगोपाल हॉस्पिटल के डॉ. भट्टर से बात कर उनकी टीम को सूरजपुर आकर प्रशिक्षण देने हेतु आग्रह किया है एवं जल्द ही उनकी टीम द्वारा हमारे जिले के डॉक्टरो को वेंटिलेटर, बाइ-पेप, सी-पेप आदि संचाचित करने की ट्रेनिंग प्राप्त करने के सौभाग्य प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त जनता में जागरूकता फैलाने के लिए पॉम्पलेट्स, वीडियो, वाॅल राइटिंग, सोशल मीडिया आदि के माध्यम से अभियान चलाए जाने के निर्देश दिए।
कोरोना के मरीजों में जानलेवा बन रहे ब्लैक फंगस के संक्रमण के खतरे को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर डाॅ. सिंह ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को सचेत रहने के निर्देश दिए। ध्यातव्य है कि पिछले दिनों जिले में एक फंगस का एक मामला आया था।
सीएमएचओ डाॅ. आर एस सिंह ने बताया कि ब्लैक फंगस या काला फफूंद या म्यूकर माइकोसिस एक दुर्लभ और घातक फंगल संक्रमण है। भारत में यह कोविड 19 से संक्रमित रोगियों को संक्रमित कर रही है। ध्यातव्य है कि 9 मई 2021 को इंडियन काउंजिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ब्लैक फंगस की जाँच, निदान और प्रबंधन के लिए एडवाइजरी जारी की है।
सीएमएचओ ने बताया कि ये कोई संक्रमण बीमारी नहीं है और मुख्य रूप से उन्हीं लोगों में देखने को मिलता है, जिन लोगों की इम्यून शक्ति बहुत हो कमजोर होती है तथा जो लंबे समय तक स्टेरॉयड की उपयोग करते हैं। ब्लैक फिगस मुख्य रूप से मिट्टी, पौधे, सड़े-गले फलों और सब्जियों में पाये जाते हैं। यह सांस के द्वारा अंदर जाती है और साइनस या फेफड़े को प्रभावित करती है। ब्लैक फंगस के लक्षण है जिसमें चेहरे कि एक तरफ सूजन, सरदर्द, नाक या साइनस में जमाव, नाक में या मुंह के ऊपरी हिस्से में काले घाव का जल्दी से गंभीर रूप लेना, बुखार आना आदि।
कलेक्टर ने लोगों से अपील की हैं कि वे सेल्फ मेडिकेसन न करें, लक्षण दिखने पर डॉक्टर से सलाह लें तथा अपने व अपने परिवारों को स्वस्थ रखें। उन्होंने कहा कि यह रोग अक्सर आँखों, नाक, त्वचा और फेफड़ों को प्रभावित करता है। यदि यह मस्तिष्क में फैल जाए तो रोगी की मृत्यु भी हो सकती है। यदि यह आँख को प्रभावित करता है तो आँख को हटाना ही मस्तिष्क में आगे फैलने से रोकने का एकमात्र उपाय है। अतः जरा भी लक्षण दिखने से तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।









