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भाजपा का मुख्यमंत्री चयन,संघ व परिषद् के निर्देशों के अनुसार पूरी वफ़ादारी,मेहनत व सक्रिय थे।

भाजपा का मुख्यमंत्री चयन,संघ व परिषद् के निर्देशों के अनुसार पूरी वफ़ादारी,मेहनत व सक्रिय थे।

छत्तीसगढ़,मध्य प्रदेश व राजस्थान राज्यों में भाजपा के मुख्यमंत्री चयन को लेकर देश यह समझ रहा था छत्तीसगढ़ में आर एस एस व जनसंघ से ख़ानदानी तौर पर जुड़े रहे नेता विष्णुदेव साय को राज्य के मुख्य मंत्री पद की लगाम सौंप दी गयी। विष्णुदेव साय के मुख्यमंत्री बनने के बाद एक वीडिओ तेज़ी से वायरल हुआ जिसमें साय के चुनाव प्रचार के दौरान एक सभा को सम्बोधित करते हुये गृह मंत्री अमित शाह जनसमूह से यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि आप विष्णुदेव साय को विधायक चुनें मैं इनको ‘बड़ा आदमी’बनाऊंगा। वैसे भी राम कोविंद को राष्ट्रपति बनाने से लेकर आदिवासी समुदाय की द्रोपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाने और अब विष्णुदेव साय को छत्तीसगढ़ का मुख्य मंत्री बनाने तक के भाजपा के फ़ैसले इस निष्कर्ष पर पहुँचने के लिये काफ़ी हैं कि समाज के सवर्ण में अपनी पैठ जमाने की पहचान रखने वाली भाजपा अब दलितों और आदिवसियों पर भी अपनी पैनी नज़र बनाये हुये है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का जन्म 21 फरवरी सन् 1964 को छत्तीसगढ़ के जशुपर जिले के फरसाबहार विकासखण्ड के ग्राम बगिया में हुआ। उनके पिता स्वर्गीय राम प्रसाद साय और माता श्रीमती जसमनी देवी साय हैं। विष्णुदेव साय का विवाह 27 मई 1991 को श्रीमती कौशल्या देवी साय से हुआ। उनके एक पुत्र और दो पुत्रियां हैं। श्री विष्णुदेव साय ने जशपुर जिले के कुनकुरी से अपनी हायर सेकेण्डरी की शिक्षा संपन्न की।

विष्णुदेव साय का मूल व्यवसाय कृषि है। किसान परिवार के साय ने लंबा राजनीतिक सफर तय कर ऊंचा मुकाम हासिल किया। उन्होंने तत्कालीन अविभाजित मध्यप्रदेश में सन् 1989 में बगिया ग्राम पंचायत के पंच के रूप में अपने राजनीतिक जीवन शुरुआत की। साय सन् 1990 में ग्राम पंचायत बगिया के निर्विरोध सरपंच चुने गए। श्री साय सन् 1990 में पहली बार तपकरा विधानसभा से विधायक बने । विष्णुदेव साय 1990 से 98 तक तत्कालिन मध्यप्रदेश के विधानसभा तपकरा से दो बार विधायक रहे, विष्णुदेव साय सन् 1999 से लगातार रायगढ़ से 4 बार सांसद चुने गए। उन्होंने लोकसभा क्षेत्र रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से सन् 1999 में 13वीं लोकसभा, 2004 में 14वीं लोकसभा, सन् 2009 में 15वीं लोकसभा और 2014 में 16वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में उल्लेखनीय कार्य किए। श्री विष्णुदेव साय ने 27 मई 2014 से 2019 तक केन्द्रीय राज्य मंत्री के रूप में इस्पात, खान, श्रम व रोजगार मंत्रालय का प्रभार संभाला।
विष्णुदेव साय मूलतः किसान परिवार से है, लेकिन उनके परिवार के राजनीतिक अनुभव का लाभ उन्हें मिला। उनके बड़े पिताजी स्वर्गीय नरहरि प्रसाद साय, स्वर्गीय केदारनाथ साय लंबे समय से राजनीति में रहे। स्वर्गीय नरहरि प्रसाद लैलूंगा और बगीचा से विधायक और बाद में सांसद चुने गए। केंद्र में संचार राज्यमंत्री के रूप में भी उन्होंने काम किया। स्वर्गीय श्री केदारनाथ साय तपकरा से विधायक रहे। श्री विष्णुदेव साय के दादा स्वर्गीय श्री बुधनाथ साय भी सन् 1947-1952 तक विधायक रहे।

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मध्य प्रदेश में जहां लोगों की नज़रें शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र सिंह तोमर,कैलाश विजयवर्गीय या ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे नेताओं में मुख्यमंत्री तलाश रही थीं। उस राज्य में शिवराज चौहान की सरकार में शिक्षा मंत्री रहे मोहन यादव को मुख्य मंत्री घोषित कर दिया गया। यहाँ भी मोहन यादव की सबसे बड़ी योग्यता यही है कि वे शुरू से ही संघ से भी जुड़े रहे और छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्धार्थी परिषद की राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे। मुख्यमंत्री के पद की शपथ लेते ही मोहन यादव के साम्प्रदायिकतावादी बयान भी वीडिओ पर वायरल होने लगे हैं।

राजस्थान में वसुंधरा राजे सिंधिया की अनदेखी कर पाना भाजपा के लिये आसान नहीं होगा। या फिर यू पी में योगी आदित्य नाथ की तर्ज़ पर राजस्थान में भी भाजपा योगी बालक नाथ के हाथों राजस्थान की बागडोर सौंप सकती है। अथवा गजेंद्रसिंह शेखावत,अर्जुन मेघवाल जैसे एक दो केंद्रीय मंत्रियों अथवा स्पीकर ओम बिड़ला के नाम की चर्चा चल रही थी। परन्तु भाजपा नेतृत्व ने सभी क़यासों पर विराम लगते हुये एक ऐसे नेता को राजस्थान का मुख्यमंत्री मनोनीत किया जिसके नाम की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था। पार्टी ने जयपुर की सांगानेर सीट से पहली बार जीत दर्ज करने वाले विधायक भजन लाल शर्मा को जो कि चार बार भारतीय जनता पार्टी के राज्य महासचिव के रूप में भी कार्य कर चुके हैं, को राज्य का मुख्यमंत्री पद सौंप दिया। पार्टी के प्रति उनकी वफ़ादारी की सबसे बड़ी योग्यता यही थी कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हैं। अपने छात्र जीवन से ही वे विद्यार्थी परिषद् से भी सक्रिय रूप से जुड़े थे और संघ व परिषद् के निर्देशों के अनुसार पूरी वफ़ादारी,मेहनत व सक्रियता से काम करते थे।

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