मनरेगा बंगाल फंड केस: सुप्रीम कोर्ट से ममता सरकार को राहत, TMC ने बताया ‘ऐतिहासिक जीत’

मनरेगा फंड मामला: सुप्रीम कोर्ट से पश्चिम बंगाल सरकार को बड़ी राहत, TMC ने बताया ‘ऐतिहासिक जीत’

सुप्रीम कोर्ट ने मनरेगा (MGNREGA) स्कीम के तहत फंड जारी करने के मामले में पश्चिम बंगाल सरकार को बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। इस फैसले के बाद, केंद्र सरकार को अब पश्चिम बंगाल में रुकी हुई मनरेगा स्कीम के लिए फिर से फंड जारी करना होगा।

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  • फंड पर रोक: केंद्र सरकार ने 9 मार्च 2022 को पश्चिम बंगाल में मनरेगा स्कीम के लिए फंड जारी करना बंद कर दिया था। केंद्र ने इस योजना में भारी गड़बड़ी और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था।
  • कलकत्ता हाई कोर्ट का आदेश: इस फैसले के खिलाफ एक मजदूर संगठन ने कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने जून 2025 में केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि 1 अगस्त 2025 से राज्य में मनरेगा स्कीम फिर से लागू की जाए। कोर्ट ने कहा था कि भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच होनी चाहिए, लेकिन योजना को बंद नहीं किया जा सकता।
  • सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद, टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के माध्यम से केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला:

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  • ‘ऐतिहासिक जीत’: उन्होंने कहा, “बोहिरागोटो बांग्ला-बिरोधी ज़मींदारों की एक और करारी हार। यह बंगाल के लोगों की ऐतिहासिक जीत है, जिन्होंने दिल्ली के अहंकार और अन्याय के आगे झुकने से इनकार कर दिया।”
  • ‘लोकतांत्रिक तमाचा’: बनर्जी ने आगे कहा कि आज का फैसला उन लोगों के मुंह पर एक ‘लोकतांत्रिक तमाचा’ है जो मानते थे कि बंगाल को धमकाया या चुप कराया जा सकता है।
  • ‘आर्थिक नाकेबंदी’: उन्होंने आरोप लगाया कि जब भाजपा उन्हें राजनीतिक रूप से हराने में विफल रही, तो उन्होंने ‘अभाव को हथियार बनाया’ और ‘पश्चिम बंगाल पर आर्थिक नाकेबंदी’ लगा दी। उन्होंने कहा कि भाजपा को उसके ‘अहंकार की सज़ा’ मिल गई है।

इस फैसले के बाद अब पश्चिम बंगाल के ग्रामीण क्षेत्रों के मनरेगा श्रमिकों को उनका बकाया फंड मिलने का रास्ता साफ हो गया है।